|
'ओलंपिक खेलों पर राजनीति हो रही है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के विदेश मंत्री यांग जेयची ने कहा है कि कुछ 'चीन विरोधी ताक़तें' वर्ष 2008 में बीजिंग में होने वाले ओलंपिक खेलों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश में लगी हैं. उन्होंने आलोचना करते हुए कहा है कि कुछ लोग और समूह मिल कर चीन की छवि को दुनिया के सामने धूमिल करना चाहते हैं. हाल के कुछ सप्ताहों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के कई समूहों और हॉलीवुड की शख़्सियतों ने मानवाधिकार मामलों पर चीन की आलोचना की थी. न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि नए बीजिंग को बनाने में प्रवासी मज़दूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है. इस संस्था की एक अधिकारी सोफ़ी रिचर्डसन ने कहा, "जब बात निर्माण कार्यों में लगे प्रवासी मज़दूरों के अधिकारों की और सामाजिक सुविधाओं की आती है तो चीन की सरकार सिर्फ़ बातें बना के रह जाती है." 'ह्यूमन राइट्स वॉच' के मुताबिक बीजिंग में चल रहे निर्माण कार्यों में लगे मज़दूरों में क़रीब 90 प्रतिशत प्रवासी मज़दूर हैं. इस संस्था का कहना है कि कुछ मज़दूरों को एक साल तक का वेतन नहीं दिया गया. 'छवि धूमिल' उधर यांग जेयची ने शिनहुआ समाचार एजेंसी को बताया, "जो लोग चीन की छवि धूमिल करना चाहते हैं...उनकी ख़ुद की छवि ही धूमिल होगी." ग़ौरतलब है कि सूडान सरकार को समर्थन दिए जाने के कारण चीन सरकार की काफ़ी आलोचना हुई थी. तिब्बत के कार्यकर्ताओं ने भी चीन में होने वाले ओलंपिक के मुद्दे को लेकर तिब्बत में चीनी शासन के मसले को उठाया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 20वें शीतकालीन ओलंपिक शुरू हुए11 फ़रवरी, 2006 | खेल की दुनिया 'लाइन न तोड़ें, थूकना मना है'11 फ़रवरी, 2007 | खेल की दुनिया हू जिंताओ के दौरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन20 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस चीन ने तिब्बत तक पहली रेल लाइन बनाई16 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस लंदन होगा 2012 ओलंपिक का मेज़बान06 जुलाई, 2005 | खेल की दुनिया 'आज भी भारत में लाखों बाल मज़दूर हैं'10 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||