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सुरक्षा घेरे में एवरेस्ट की चोटी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में एवरेस्ट भी इन दिनों कड़े सुरक्षा घेरे में दिखाई दे रहा है. दरअसल ओलंपिक मशाल अगले महीने वहाँ पहुँचने वाली है. ओलंपिक मशाल चीन में तिब्बत की तरफ़ से एवरेस्ट लाई जाएगी. चीन और नेपाल दोनों को ही इस बात की आशंका है कि तिब्बत समर्थक किसी तरह से एवरेस्ट के दक्षिणी हिस्से से दाख़िल होकर कुछ परेशानी पैदा कर सकते हैं. उधर ऑस्ट्रेलिया की राजधानी केनबेरा में हज़ारों लोगों ने ओलंपिक मशाल रिले को देखा है. चाहे वहाँ ख़ासी बड़ी संख्या में चीन के समर्थक और विरोध जमा थे लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ जगह पर ही मामूली झड़पें हुई हैं. अतिरिक्त सुरक्षा चौकियाँ नेपाल के नामची बाज़ार इलाक़े के शेरपा गाँव में सुरक्षा बलों तीन अतिरिक्त सुरक्षा चौकियाँ भी बना दी गई हैं. कुछ अतिरिक्त सैन्य बल भी वहाँ पहुँचाए जा रहे हैं. यहीं से एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू होती है. मशाल की सुरक्षा देखते हुए मई के महीने में 10 दिनों तक एवरेस्ट पर ट्रैकिंग पर रोक लगा दी गई है. एवरेस्ट से निकलने वाली नदी दूध कोशी पर सुरक्षा बल सैलानियों के सामान की गहन तलाशी ले रहे हैं. वैसे तो ये सुरक्षा चौकी नई नहीं है लेकिन इन दिनों वहाँ बेहद कड़ाई से जाँच की जा रही है.
राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा में तैनात मेजर थापा कहते हैं, "हम चाहते हैं कि ओलंपिक सफल हों. हम किसी तिब्बत समर्थक को यहाँ कोई प्रदर्शन नहीं करने देंगे." चीन के इशारे पर सुरक्षा? सूत्रों के मुताबिक़ नेपाल में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम चीन के इशारे पर किए जा रहे हैं. चीन की सरकार ने कहा है कि नेपाल उन तमाम इलाक़ों में अतिरिक्त सुरक्षा चौकियाँ बनाए जहाँ से होकर मशाल को गुज़रना है. सूत्रों का ये भी कहना है कि तक़रीबन एक महीने पहले नामची बाज़ार इलाक़े में दर्जनों चीनी अधिकारियों और एक वरिष्ठ चीनी सेना के अफ़सर को यहाँ देखा गया था. ये सारे लोग पूरे इलाक़े की सुरक्षा का जायज़ा लेते देखे गए थे. दरअसल, इस इलाक़े में बड़ी तादाद में तिब्बती शरणार्थी रहते हैं. मंगलवार को नेपाल पुलिस के जवानों ने इस इलाक़े में ऐलान करवाया था कि दलाई लामा के तमाम बैनरों को यहाँ से उतार लिया जाए. प्रदर्शन की तैयारी
कड़ी सुरक्षा के बावजूद नामची बाज़ार इलाक़े में रह रहे कुछ तिब्बती शरणार्थी मशाल लाए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं. इलाक़े में किराने की दुकान चलाने वाले 30 साल के सोनाम ताशी का कहना है कि वो तिब्बत के लिए किसी तरह का प्रदर्शन ज़रूर करेंगे. ताशी का परिवार तिब्बत से आकर यहाँ बसा था. ताशी कहते हैं कि उनके नेपाली शेरपा पड़ोसी भी इन प्रदर्शनों में उनकी नैतिक तौर पर मदद करेंगे. सुरक्षा चौकियों पर कई सैलानियों के पास से तिब्बत समर्थक बैनर-पोस्टर बरामद किए गए हैं. |
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