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ओलंपिक मशाल विरोधियों को चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल ने माउंट एवरेस्ट तक जाने वाली ओलंपिक मशाल यात्रा का विरोध करने वालों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. नेपाल ने कहा है कि वह चीन विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना का प्रयोग करने को तैयार है और प्रदर्शनकारियों पर गोली भी चलवा सकता है. ओलंपिक मशाल मई के शुरुआत में चीन में आने वाले तिब्बती क्षेत्र से दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ी माऊंट एवरेस्ट पर ले जाई जाएगी. नेपाल में बीबीसी के संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड के अनुसार नेपाल ऐसे विरोध प्रदर्शनों को रोकना चाहता है जो चीन के साथ उसके रिश्ते को प्रभावित कर सकते हैं. मशाल दौड़ के रास्ते में पड़ने वाले कुछ शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो चुके हैं. मशाल दौड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए एवरेस्ट के दक्षिण तरफ़ पुलिस और सेना के जवान बड़ी संख्या में तैनात किए जाएंगे. बीबीसी संवाददाता के अनुसार नेपाल चीन को अलग नहीं करना चाहता है, जो उसके दो प्रमुख पड़ोसी देशों में से एक है. नेपाल चीन पर विदेशी सहायता और कूटनीतिक मदद के लिए निर्भर है. पर्वातारोहियों पर नज़र नेपाल के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मोदराज दोतेल ने बीबीसी को बताया कि एवरेस्ट आधार शिविर से पहले सेना और पुलिस के अतिरिक्त जवानों ने एक विशेष जांच चौकी बनाई है. यह चेकपोस्ट छह हज़ार सात सौ मीटर की ऊंचाई पर हैं. यहां से एवरेस्ट पहाड़ी पर चढ़ने वाली सभी टीमों की निगरानी की जाती है. उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी तरह की चीन विरोधी हिंसक गतिविधियों को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो सेना का प्रयोग किया जाएगा, जो गोलीबारी भी कर सकती है. दोतेल ने बताया कि यही तरीका आधार शिविर के पास भी प्रयोग किया जा सकता है, जहां साधारण पर्वतारोही भी आसानी से पहुंच सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस सत्र में पर्वतारोही दलों के साथ जाने वाले सरकार के संपर्क अधिकारी पुलिस या सेना के जवान होंगे. किसी भी पर्वतारोही दल को एक से दस मई के बीच में सात हज़ार पाँच सौ मीटर से अधिक की ऊंचाई पर शिविर नहीं लगाने दिया जाएगा. इस कारण ब्रिटिश पर्वतारोही सर रनूल्फ़ फ़िन्नेस और अन्य पर्वतारोहियों को बेस कैंप के पास शायद इंतज़ार करना पड़े. नए नियम नेपाल ने 10 मई तक आधार शिविर के आगे कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर रोक लगाने के लिए क़ानून बनाया है. पिछले छह सप्ताह से नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थी राजधानी काठमांडू में तिब्बत में चीन के शासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. नेपाल पुलिस ने हर बार उनके प्रदर्शन को असफल कर दिया है. पुलिस या तो उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है या उनपर डंडे बरसाती है. ओलंपिक मशाल दौड़ के दौरान लंदन, पेरिस और सैन फ़्रांसिस्को जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. वहीं नई दिल्ली, थाईलैंड के बैंकाक, तंजानिया और अर्जेंटिना की राजधानी ब्यूनेस आयरिस में ओलंपिक मशाल दौड़ शांतिपूर्वक संपन्न हो चुकी है. |
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