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बोल्ट बने दुनिया के सबसे तेज़ धावक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जमैका के उसैन बोल्ट ने विश्व रिकॉर्ड कायम करते हुए बीजिंग ओलंपिक में सौ मीटर फ़र्राटा दौड़ का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. बोल्ट महज 9.69 सेकेंड में फिनिश लाइन पार कर गए और 9.72 सेकेंड के अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया. पूरी दौड़ में उनकी बादशाहत इस क़दर रही कि रजत पदक जीतने वाले त्रिनिदाद और टोबैगो के रिचर्ड थॉम्पसन उनसे 0.20 सेकेंड पीछे रहे. अमरीका के वाल्टर डिक्स ने 9.91 सेकेंड का समय लेते हुए कांस्य पदक लिया लेकिन बोल्ट के हमवतन और पूर्व विश्व रिकॉर्डधारी असाफ़ा पावेल का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. उन्होंने यह दूरी 9.95 सेकंड में तय की और पांचवें स्थान पर रहे. उनसे भी अधिक निराशाजनक प्रदर्शन तो विश्व चैंपियन टायसन गे का रहा जो 100 मीटर के फ़ाइनल के लिए ही क्वालिफाई नहीं कर पाए. क्रिकेटर बनते-बनते फर्राटा धावक बन गए बोल्ट ने दमखम और पावर का बेमिसाल प्रदर्शन करते हुए जमैका को एथलेटिक्स की इस सबसे ख़ास स्पर्धा का पहला ओलंपिक ख़िताब दिला दिया. उनकी कामयाबी यह देखते हुए आश्यर्चजनक लगती है कि उन्होंने पिछले साल तक 100 मीटर की केवल एक पेशेवर रेस में हिस्सा लिया था. आम तौर पर 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लेने वाले 21 वर्षीय बोल्ट ने इस बार 100 मीटर दौड़ की अनुमति हासिल की थी. बोल्ट ने कहा था कि अगर वह 200 मीटर दौड़ में अपने देश का रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहे तो उन्हें 100 मीटर की रेस में भी हिस्सा लेने दिया जाए. बोल्ट अपने वादे को पूरा करने में सफल रहे और देखते ही देखते एथलेटिक्स जगत पर धूमकेतु की तरह छा गए. |
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