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बहुत आसान होता है भूलना.... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडियन प्रीमियर लीग के मैच का स्कोर और साथ-साथ जयपुर धमाके में मरने वालों की संख्या के बारे में जानने की कोशिश में लगातार चैनल बदलते-बदलते एकाएक मैं ठंडा सा पड़ गया. एक मनोरंजन था तो दूसरा एक हादसा. न्यूज़ रीडर मरने वालों की संख्या गिन रहे थे और ये भी बता रहे थे कि एक बार फिर भारत चरमपंथियों के निशाने पर है. साथ में हमें इसकी भी एक्सक्लूसिव जानकारी दी जा रही थी कि कौन से चरमपंथी संगठन इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं हालाँकि उस समय इस धमाके की जाँच भी शुरू नहीं हुई थी. न्यूज़ चैनल्स पर हादसे से प्रभावित लोगों की तस्वीरें दिखाई जा रही थी, उनका आतंकित चेहरा देखकर हम सभी अपने को इतना असहाय महसूस कर रहे थे और स्तब्ध थे. लेकिन भय के माहौल के बीच न्यूज़ चैनल्स ने अपने स्क्रीन से आईपीएल का स्कोर नहीं हटाया. कितनी अच्छी बिजनेस सोच है ये. मैच का मनोरंजन दूसरी ओर आईपीएल मैच के दौरान उत्सव जैसा माहौल भी चल रहा था. विकेट गिरने, चौके-छक्के लगने और किसी फ़िल्मी सितारों को दिखाने पर शोर-शराबा भी जारी था. आईपीएल के आयोजक ललित मोदी को भी टीवी स्क्रीन पर आह्लादित देखा जा सकता था. इससे तो यही लग रहा था कि स्टेडियम में मौजूद किसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जयपुर में इतना बड़ा धमाका हुआ है. ललित मोदी भी जयपुर के ही हैं और अगर उन्हें ये पता होता कि शहर में क्या हो रहा है तो शायद वे भी ऐसे मूड में नहीं होते. ईडन गार्डन में जब मैच ख़त्म हुआ तो ऐसा लगा कि ये किसी और ग्रह के शहर में है जो जयपुर की घटनाओं से बिल्कुल प्रभावित नहीं. ललित मोदी शाहरुख़ ख़ान के साथ मंच पर मौजूद थे और वे कोलकाता नाइट राइडर्स और ख़ासकर शोएब अख़्तर के प्रदर्शन से काफ़ी ख़ुश लग रहे थे. दूसरे दिन सभी ने जयपुर की घटनाओं पर दुख व्यक्त किया लेकिन साथ ही उन आशंकाओं को भी ख़ारिज किया कि जयपुर में होने वाला मैच रद्द कर दिया जाएगा. द्वंद्व इससे छोटी घटनाओं पर भी इस उपमहाद्वीप का दौरा रद्द करने वाले ऑस्ट्रेलियाई और दक्षिण अफ़्रीका के खिलाड़ियों ने जयपुर की घटना पर दुख तो व्यक्त किया लेकिन प्रतियोगिता से हटने के बारे नें उन्होंने विचार नहीं किया. स्पष्ट रूप से अपने देश का प्रतिनिधित्व करना बड़े सम्मान की बात होती है और ऐसे मुद्दे पर कोई रुख़ लेना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. लेकिन जब आप व्यक्तिगत रूप से खेल रहे होते हैं, ऐसी स्थिति में आपकी जान पर ज़्यादा ख़तरा होता है. सच ये भी है कि देश की ओर से खेलने पर जितना पैसा आपको मिलता है, यहाँ आप उससे कहीं बहुत ज़्यादा पैसा कमा रहे हैं. दुख की बात है. चिंता तो सबको है लेकिन अब आईपीएल को पीठ दिखाने का सवाल ही नहीं. ख़ासकर वैसी स्थिति में जब इस तरह के खेल ने क्रिकेट में 'क्रांतिकारी' परिवर्तन कर दिया है और आगे भी इसी तरह का क्रिकेट होना है. इन सबसे आयोजकों, प्रायोजकों और टीवी चैनलों को कितनी राहत मिली होगी. जयपुर में होने वाले मैच के दौरान खिलाड़ियों की सुरक्षा का सवाल तो उठा लेकिन ललित मोदी ने इन सभी चिंताओं को ख़ारिज कर दिया. साहसी प्रसाद उन्होंने यह भी आश्वासन दे दिया कि स्टेडियम में इतनी कड़ी सुरक्षा होगी कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा. इन सब सवालों और कथित चिंताओं के बीच आईपीएल का हिस्सा एक पूर्व क्रिकेटर ने साहस दिखाया है.
व्यापार, बिजनेस, कॉरपोरेटाइज़ेशन और पैसे कमाने की होड़ के बीच इस क्रिकेटर ने जीवन के प्रति अपने नज़रिए को साहस से सामने रखा है. बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स के कोच वेंकटेश प्रसाद ने कहा- हमें इस मुद्दे पर थोड़ा समझदार और संवेदनशील होने की ज़रूरत है. जब लोग कष्ट झेल रहे हैं और धमाके के बाद अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, उस समय हम क्रिकेट के रूप में मनोरंजन परोसने की कोशिश कर रहे हैं. मैं नहीं जानता कि जयपुर के लोग इसे कैसे लेंगे. वेंकटेश प्रसाद की प्रतिक्रिया आज के माहौल में आपको हो सकता है कि अजीब लगे, क्योंकि जिस दुनिया में हम जी रहे हैं, वहाँ हम सभी उन लोगों की भावनाओं के बारे में कहाँ सोचते हैं, जिन्होंने अपने परिजनों को ऐसे हादसों में खो दिया है. हम तो सिर्फ़ ये सोचते हैं कि मैच रद्द हो जाने से कैसे आयोजकों को नुक़सान होगा और 'हम' क्रिकेट के इस रोज़ाना खुराक से वंचित रह जाएँगे. ये हमारे लिए बहुत आसान और आरामदायक है कि हम अपने 'दिमाग़ी गोदाम' यानी अपनी याद्दाश्त में आईपीएल मैचों के स्कोर को सहेजे और ज़िंदगी की डगर पर आगे बढ़ जाए. (लेखक हिंदुस्तान टाइम्स स्पोर्ट्स के सलाहकार हैं) |
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