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'खून से लाल हुई गुलाबी नगरी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने इस शांत शहर को दहला कर रख दिया. अभी तक कम से कम 60 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और सौ से ज़्यादा घायल हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है. राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने इस बात की जाँच शुरु कर दी है कि धमाकों के पीछे किसका हाथ था. मंगलवार शाम को हुए इन धमाकों से जुड़ी ख़बरें हिंदी और अंग्रेज़ी के लगभग सभी अख़बारों में छाई हुई है. धमाके दैनिक हिंदुस्तान लिखता है कि पंद्रह मिनट के भीतर एक के बाद एक आठ बम धमाकों में लगभग 75 लोग मारे गए हैं जबकि 150 से अधिक घायल हुए हैं. इसी ख़बर के साथ अख़बार ने सुर्खी लगाई है - निशाने पर हैं परमाणु और तेल ठिकाने भी. इसमें कहा गया है कि 'आतंकवादी' संगठनों की ओर से परमाणु केंद्रों, तेल शोधक संयंत्रों, रक्षा प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, बांधों, आईटी केंद्रों के अलावा टाटा और रिलायंस जैसे प्रतिष्ठित निजी औद्योगिक संस्थानों को निशाना बनाने की ख़ुफ़िया सूचना है. इसके मद्देनज़र सोमवार को फौरी बैठक बुलाकर इनकी सुरक्षा को पुख़्ता किए जाने पर विचार किया गया.
जनसत्ता ने मरने वालों की संख्या 70 बताई है जिनमें नौ महिलाएँ हैं. इसमें छपी रिपोर्ट के मुताबिक धमाकों के बाद जयपुर शहर से चार जिंदा बम मिले जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया है. जनसत्ता के अलावा दूसरे अख़बारों ने भी धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख और गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपए का मुआवाज़ा देने की घोषणा की ख़बर प्रकाशित की है. साथ ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया और देश के अन्य हिस्सों में अलर्ट की ख़बर को भी सभी अख़बारों ने जगह दी है. किस पर है शक? इन धमाकों के पीछे कौन है, इस पर अख़बारों में कई तरह के कयास लगाए गए हैं. नवभारत टाइम्स की सुर्खी है - धमाकों से पिंक सिटी हुआ लाल. अख़बार लिखता है कि आंतकवादियों ने जयपुर को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मैप पर इसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है, जिस तरह मंदिर को निशाना बनाया गया, उसके पीछे माहौल बिगाड़ने की साजिश नज़र आती है.
दैनिक जागरण का बैनर हेडलाइन है - गुलाबी नगरी खून से लाल, 70 मरे. अख़बार लिखता है कि धमाकों में लश्कर का हाथ होने की संभावना है. अख़बार में छपी एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सवेरे ही रक्षा मंत्री एके एंटनी ने घुसपैठ बढ़ने की पुष्टि के साथ पूरे देश में आतंकी घटनाओं का अंदेशा जताया था और शाम को ही यह सच हो गया. अमर उजाला ने ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से ख़बर प्रकाशित की है कि 'विस्फोटों को लेकर शक की सूई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहादी इस्लामिया' पर जा टिकी है. अख़बार ने धमाकों के बाद हैरान-परेशान एक महिला की तस्वीर छापी है जिसके चेहरे पर खौफ़ देखा जा सकता है. अंग्रेज़ी अख़बार द एशियन एज ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि धमाकों के पीछे सरकार को 'बाहरी हाथ' होने की आशंका है.
रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि 13 मई को ही दस साल पहले राजस्थान के पोखरण में भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया था. हालाँकि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि धमाकों का इस बात से कोई संबंध है या नहीं ये स्पष्ट नहीं है. क्या है मकसद? टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है- एंड नाऊ, इट्स जयपुर. अख़बार ने मृतकों की संख्या 80 बताई है. इस रिपोर्ट में धमाकों की तुलना मालेगाँव में हुए विस्फोटों से की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक जिस तरह मालेगाँव में साइकल पर रखे बमों में धमाके किए गए, उसी तरह जयपुर में भी अधिकांश धमाके साइकल बम के ज़रिए किए गए. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अधिकांश धमाके मंदिर वाले इलाक़ों में हुए हैं. अख़बार में प्रमुखता से प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के पैटर्न को देखा जाए तो ये पता चलता है कि मंगलवार को हुए धमाकों में मंदिरों को निशाना बनाया गया और शुक्रवार को हुए धमाके मस्जिदों के पास हुए जिसका मकसद न सिर्फ़ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को निशाना बनाना है बल्कि सांप्रदायिक तनाव कायम करना भी है. |
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