वो सिंधु, जो है बड़े-बड़ों के लिए ख़तरा

पीवी सिंधु

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

यह बात दिल्ली में इसी साल मार्च-अप्रैल में संपन्न हुए इंडियन ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के दौरान की है.

दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में इस टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले एक संवाददाता सम्मेलन में पीवी सिंधु अन्य भारतीय खिलाड़ियों के साथ मौजूद थीं.

तब हमने पीवी सिंधु से रियो ओलंपिक को लेकर सवाल किया तो शलवार-सूट पहने लंबे क़द की मालिक सिंधु ने मासूमियत से जवाब दिया, "अभी मैं इसके बारे में नहीं सोच रही हूं. मेरा पूरा ध्यान सिर्फ़ अपने खेल पर है."

उन दिनों पीवी सिंधु की रैंकिंग लगातार गिर रही थी.

लेकिन इसे लेकर भी वह अधिक चिंतित दिखाई नहीं दी और कहा कि रैंकिंग तो ऊपर-नीचे होती रहती है.

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आज वही पीवी सिंधु रियो ओलंपिक के फ़ाइनल में पहुंच चुकी है. कमाल की बात है कि यह पीवी सिंधु का पहला ही ओलंपिक है.

पूरा भारत आश्चर्य से उन पर नज़र गड़ाए हुए है.

वो शुक्रवार को रियो में नंबर एक रैंकिंग वाली स्पेन की कैरोलिना मारिन के ख़िलाफ बैडमिंटन में महिला एकल वर्ग का फ़ाइनल खेलेंगी.

पांच जुलाई 1995 को तेलंगाना में जन्मी पांच फुट साढ़े 10 इंच लम्बी पीवी सिंधु तब सुर्खियों में आई जब उन्होंने साल 2013 में ग्वांग्झू चीन में आयोजित विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. पीवी सिंधु के पिता पीवी रमन्ना और मां पी विजया ख़ुद वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुके है, शायद यही कुछ सिंधु को भी खेल में ही खींच लाया.

सिंधु के खेल को सजाने-संवारने का काम किया आल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन रह चुके पुलेला गोपीचंद.

उल्लेखनीय है कि पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन ऐकेडमी हैदराबाद में ही है.

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विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली सिंधु भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनी.

इसके बाद सिंधु ने इसी कामयाबी को अगले ही साल 2014 में कोपेनहागेन में भी दोहरा दिया.

उन्होंने लगातार दूसरे साल विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर बैडमिंटन पंडितों का ध्यान अपनी तरफ खींचा.

साल 2013 में ही उन्होंने मलेशिया ओपन और मकाऊ ओपन का ख़िताब जीता.

मकाऊ ओपन के फाइनल में उन्होंने कनाडा की मिशैल ली को 21-15, 21-12 से मात दी.

उन्हीं मिशैल ली को उन्होंने रियो में ग्रुप मैच में कड़े संघर्ष के बाद 19-21, 21-15, 21-17 से हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई.

वैसे पीवी सिंधु अभी तक छह ख़िताब जीत चुकी है.

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इसके अलावा पांच टूर्नामेंट में वह उपविजेता रही है.

साल 2014 में सय्यद मोदी अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट के फाइनल में वह साइना नेहवाल से 21-14, 21-17 से हारीं.

साइना नेहवाल से अपनी प्रतिद्वंद्विता की बात को लेकर वह विनम्रता से कहती है कि कोर्ट पर साइना उनसे बेहतर है.

कोर्ट के बाहर साइना नेहवाल से मिलने वाले सहयोग को वह नहीं भूलतीं.

पीवी सिंधु ने अभी तक दुनिया की हर बड़ी खिलाड़ी को हराया है.

उनके बारे में भारत के पूर्व एशियन चैंपियन दिनेश खन्ना दिलचस्प बात कहते है कि सिंधु हमेशा बड़े खिलाड़ियों के लिए ख़तरा पैदा करती है.

लेकिन जैसे ही उनका सामना कम रैंकिंग या कमज़ोर खिलाड़ी से होता है उनका खेल भी कमज़ोर पड जाता है.

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रियो जाने से पहले सिंधु के कोच पुलेला गोपीचंद ने खुले दिल से स्वीकार किया था कि वह छुपी रूस्तम खिलाड़ी साबित होंगी.

ख़ुद गोपीचंद और सिंधु कभी बडे-बडे दावे नही करते.

रियो में भी सिंधु ने अपने से ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है.

सिंधु को रियो में नौवी वरीयता मिली.

सिंधु ने क्वार्टर फाइनल में दूसरी वरीयता हासिल चीन की यिहान वांग को और सेमीफाइनल में छठी वरीयता हासिल जापान की नोज़ूमी ओकूहारा को हराया.

पीवी सिंधु ने रियो में अपनी लम्बाई का पूरा फ़ायदा उठाते हुए ना सिर्फ दमदार स्मैश लगाए है वरन उन्होंने कोर्ट कवरिंग में भी कमाल का खेल दिखाया है.

लम्बी रैली में भी अब वह बेहतर है. ऐसे में उनसे रियो में स्वर्ण पदक की उम्मीद तो बनती है.

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