टीम इंडिया की नाक बचा पाएंगे विराट?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मौजूदा टेस्ट सिरीज़ का चौथा और आखिरी टेस्ट मैच मंगलवार से सिडनी में खेला जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया इस सिरीज़ में 2-0 की निर्णायक बढ़त ले चुका है लेकिन सिरीज़ का आकर्षण अब भी कम नहीं हुआ है.
इससे पहले टीम इंडिया साल 2012 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया से सिरीज़ के चारों टेस्ट हारी थी.
उस सिरीज़ के मुक़ाबले भारत ने इस बार संघर्ष करने का दमख़म दिखाया और अगर भारतीय बल्लेबाज़ों ने थोड़ा साथ दिया होता तो कहानी कुछ और भी हो सकती थी.
सिडनी में उतरना ऑस्ट्रेलिया की टीम के लिए भी 'भावुक लम्हा' होगा, क्योंकि इसी मैदान पर नवंबर 2014 में फिलिप ह्यूज़ बाउंसर से चोटिल हो गए थे जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी.
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सिडनी में दोनों टीमें अलग-अलग समस्याओं से जूझेंगी. भारत की कमान विराट कोहली पहली बार पूर्ण रूप से संभालने जा रहे हैं.
महेंद्र सिंह धोनी के तीसरे टेस्ट मैच के बाद अचानक संन्यास के एलान के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह हैं कि वह किस टीम के साथ मैदान में उतरें.
सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन टेस्ट मैचों में नाकाम हो रहे हैं. चेतेश्वर पुजारा भी बड़ी पारी नही खेल रहे हैं, तो रही सही कसर गेंदबाज़ों ने पूरी कर दी है.
अनुभवी ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव और वरुण एरोन जैसे तेज़ गेंदबाज़ अगर ऑस्ट्रेलिया में भी विकेट नहीं ले सकते तो कहां लेंगे.
धोनी के बगैर

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स्पिनर आर अश्विन अकेले दम पर विदेशों में कुछ नहीं कर सकते. ऐसे में क्या विराट कोहली तीन तेज़ गेंदबाज़ और दो स्पिनर के साथ सिडनी में उतरना पसंद करेंगे?
क्या शिखर धवन की जगह केएल राहुल को सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर खिलाया जाएगा, और क्या सुरेश रैना को टीम में जगह मिलेगी.
इसके अलावा अब विराट के पास महेंद्र सिंह धोनी जैसा बल्लेबाज़ नहीं हैं जो नंबर पांच पर आकर टीम को मज़बूती देते थे.
हक़ीक़त तो यही है कि मेलबर्न में धोनी अगर विकेट पर नहीं टिकते तो वहां भी शायद भारत हार सकता था.
हार की गाथा

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वहीं ऑस्ट्रेलिया को सबसे बड़ा झटका तेज़ गेंदबाज़ मिचेल जॉनसन के चोटिल होकर बाहर होने से लगा है.
भूलना नहीं चाहिए कि ब्रिस्बेन में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में भारत की हार की गाथा जॉनसन ने ही लिखी थी.

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उन्होंने मैच के चौथे दिन विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और रोहित शर्मा को 10 रनों के अंतर में पैवेलियन भेजकर भारतीय खेमे में हलचल मचा दी थी.
भारत के पास मौक़ा है कि वह ऑस्ट्रेलिया पर पलटवार करे.
वैसे सिडनी पर भारत साल 1978 से नहीं जीता है, तब बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को एक पारी और दो रन से हराया था.
1947 से अब तक सिडनी में भारत की यही इकलौती जीत है.
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