चेतेश्वर पुजारा: भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज़ का ये रिकॉर्ड

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- Author, शिवाकुमार उलगनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सिरीज़ का दूसरा टेस्ट शुक्रवार से दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में शुरू हो गया है. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.
सूर्य कुमार यादव को टीम में जगह नहीं मिली है. भारतीय टीम में खेल रहे खिलाड़ी हैं - रोहित शर्मा (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएस भरत, रविंद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज.
दूसरे टेस्ट के साथ ही टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा एक नया मुकाम बना रहे हैं. ये उनके टेस्ट करियर का सौवां टेस्ट है. पुजारा इस मुकाम तक पहुंचने वाले भारत के 13वें क्रिकेटर हैं.
पुजारा की शुरुआत
क्रिकेट का खेल पुजारा को विरासत में मिला है, उनके पिता पूर्व रणजी क्रिकेटर रहे हैं, पुजारा ने अंडर-14 क्रिकेट के दिनों में ही तिहरा शतक जमा कर संकेत दे दिया था कि उनके इरादे फ़ौलादी हैं.
सौराष्ट्र के इस खिलाड़ी ने अपनी तकनीक और डिफ़ेंस स्टाइल से रणजी और विजय हज़ारे ट्राफ़ी में लोगों को प्रभावित किया था.
कई साल तक सौराष्ट्र और पश्चिमी क्षेत्र के लिए पसीना बहाने के बाद चेतेश्वर पुजारा को आख़िरकार 2010 में भारत की ओर से डेब्यू करने का मौका मिला.
पुजारा उस दौर में टीम में आए जब भारतीय क्रिकेट बदलावों के दौर से गुज़र रहा था. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे बेहतरीन क्रिकेटर अपने करियर के आख़िरी दौर में थे जबकि सुरेश रैना और विराट कोहली जैसे युवा सितारे टेस्ट टीम के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे.
सीनियर खिलाड़ियों के रिटायर होने से पुजारा के सामने मौका ज़रूर था, लेकिन उन्हें टीम में जगह बनाने के लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ी.

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रक्षात्मक बल्लेबाज़ पुजारा
पुजारा अपने करियर के आरंभिक दौर में आक्रामक शाट्स नहीं खेलते थे, लिहाज़ा क्रिकेट प्रेमियों को उनकी बल्लेबाज़ी बहुत रास नहीं आई. लेकिन अपने डेब्यू टेस्ट में, ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बेंगलुरु टेस्ट की दूसरी पारी में पुजारा ने 72 रन बनाए थे.
उसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कई बेहतरीन पारियां खेलीं. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पिछली तीन सिरीज़ के दौरान, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर लगातार दो जीत शामिल है, पुजारा टीम के आधार स्तंभ रहे.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पिछली सिरीज़ में वे भले शतक नहीं बना पाए, लेकिन उनकी मौजूदगी भर से दूसरे बल्लेबाज़ पर दबाव काफ़ी कम था.
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पुजारा की बेहतरीन टेस्ट पारियों में अहमदाबाद में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दोहरा शतक, श्रीलंका के ख़िलाफ़ 2015 में कोलंबो टेस्ट में जीत दिलाने वाले नाबाद 145 रन और 2018 के एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में 123 रन और दूसरी पारी 71 रन, शामिल हैं.
2018-19 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान मज़बूत गेंदबाज़ी के सामने पुजारा ने 521 रन बनाए और उन्हें मैन ऑफ़ द सिरीज़ चुना गया था. ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर भारतीय क्रिकेट टीम की पहली टेस्ट सिरीज़ जीत में पुजारा की बल्लेबाज़ी का अहम योगदान था.
पुजारा ने अब तक भारत के लिए 99 टेस्ट मैच खेले हैं, इस दौरान उन्होंने केवल पांच वनडे मैच खेला है. मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेटर पुजारा ने 99 टेस्ट मैचों में 19 शतक और 35 अर्धशतक की मदद से अब तक 7,021 रन बनाए हैं.
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पुजारा के 13 साल लंबे करियर के बारे में वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली कहते हैं, "चेतेश्वर पुजारा को करियर के शुरुआती दौर से ही पता था कि वनडे में उन्हें सीमित मौके ही मिलेंगे. वे बहुत आक्रामक बैटिंग करने वाले बल्लेबाज़ नहीं हैं, उनकी स्ट्राइक रेट भी प्रभावी नहीं है. राहुल द्रविड़ विकेटकीपिंग भी कर लेते थे, इससे उनके वनडे करियर को मदद मिली, ऐसा पुजारा के साथ नहीं हुआ."
टेस्ट क्रिकेटर के तौर पर पुजारा की ख़ासियतों के बारे में लोकपल्ली कहते हैं, "केवल टेस्ट खिलाड़ी के तौर पर पुजारा ने लंबी पारियां खेलने पर ध्यान फ़ोकस किया, इससे उन्हें भी फ़ायदा मिला और टीम को भी. जब भी आलोचकों ने टीम में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं, तब-तब उन्होंने कहीं ज़्यादा शानदार पारी के साथ वापसी की है. प्रतिबद्धता और कठिन मेहनत उनकी मज़बूती रही है."
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आलोचकों को जवाब
पिछले दो साल में पुजारा बल्ले से बहुत कामयाब नहीं रहे हैं. आलोचक टीम में उनकी जगह को लेकर भी सवाल उठाते रहे. कुछ पारियों में वे सस्ते में आउट हो गए. टेस्ट टीम से अजिंक्य रहाणे के बाहर होने के बाद पुजारा का स्थान भी संकट में आ गया था.
लेकिन पुजारा ने इन आलोचनाओं से उबरते हुए वापसी की. पहले तो 2022 के काउंटी चैंपियनशिप में उन्होंने काफ़ी रन बटोरे. इसके बाद, दिसंबर, 2022 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़, तीन साल के अंतराल पर टेस्ट मैचों में शतक जमाया.
हाल में एक प्रेस कांफ्रेंस में वे अपने सौवें टेस्ट को लेकर खासे उत्साहित दिखे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतना उनका सपना है.
पुजारा अपना ये सपना पूरा कर पाते हैं या नहीं, ये तो भविष्य में पता चल पाएगा. लेकिन वे अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं रखेंगे. आख़िरकार उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में राहुल द्रविड़ की जगह को भरा है.
राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट में नंबर तीन बल्लेबाज़ के तौर पर दीवार कहा जाता था. चेतेश्वर पुजारा ने उनकी जगह भरते हुए सौ टेस्ट मैचों का सफ़र पूरा किया है.
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