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अर्शदीप की नो बॉल पर भड़के कई खिलाड़ी, हार्दिक पंड्या ने बताया 'गुनाह'
- Author, दिनेश उप्रेती
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इंटरनेशनल क्रिकेट मैच में एक गेंद पर 14 रन.
सुनने में ताज्जुब लगेगा, लेकिन ये हक़ीक़त है. पुणे में गुरुवार को श्रीलंका के ख़िलाफ़ दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुक़ाबले में भारत के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह के हिस्से ये अनचाहा रिकॉर्ड आया.
दरअसल, कप्तान हार्दिक पंड्या ने पारी का पहला ओवर डालने के बाद गेंद अर्शदीप को थमाई. अर्शदीप की पहली गेंद पर निसांका ने मिडऑन क्षेत्र में ज़ोरदार बाउंड्री जड़कर 'आईसीसी के वर्ष के सर्वश्रेष्ठ नवोदित खिलाड़ी' के लिए नामांकित अर्शदीप को दबाव में ला दिया.
अर्शदीप ने हालांकि अगली दो गेंदों पर कोई रन नहीं दिया, चौथी गेंद पर एक रन और पांचवीं गेंद डॉट डाली. लेकिन ओवर की आख़िरी गेंद पर अर्शदीप ने जो किया, उसकी निराशा अर्शदीप के चेहरे पर तो दिख ही, कप्तान हार्दिक पंड्या भी काफी हताश नज़र आए.
अर्शदीप लगातार तीन नो बॉल फेंकने वाले पहले भारतीय बने. तीन नो बॉल (एक वैध गेंद) पर अतिरिक्त तीन रन के साथ कुल मिलाकर 14 रन (एक छक्का, एक चौका और एक सिंगल) बने. इस तरह अर्शदीप ने इस ओवर में कुल 19 रन दिए.
निशाने पर अर्शदीप सिंह
इसके बाद पंड्या ने अर्शदीप को गेंदबाज़ी आक्रमण से हटा दिया. लेकिन 19वें ओवर में उन्होंने एक बार फिर अर्शदीप पर दांव खेला. अर्शदीप ने इस ओवर में भी दो नो बॉल डाली और कुल मिलाकर 18 रन दिए.
इस तरह 23 साल के अर्शदीप ने महज़ दो ओवर फेंके और उनमें कुल मिलाकर पांच नो बॉल डाली और न्यूज़ीलैंड के हमीश रदरफ़ोर्ड के बाद टी20 इंटरनेशनल मुक़ाबलों में ऐसा करने वाले दूसरे गेंदबाज़ बन गए.
हालांकि, अर्शदीप की 'ओवरस्टैपिंग' की समस्या नई नहीं है और वह 22 टी20 इंटरनेशनल मुक़ाबलों में 14 बार ओवरस्टैपिंग (नो बॉल) कर चुके हैं.
उमरान मलिक और शिवम मावी ने भी एक-एक नो बॉल डाली और इस तरह भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों ने कुल जमा 7 नो बॉल कीं.
जानकारों का मानना है कि भारत के लिए ये नो बॉल बहुत महंगी साबित हुई और हार की अहम वजह साबित हुई. अर्शदीप के लय में नहीं होने के कारण पंड्या को विकल्प के अभाव में 18वां ओवर उमरान मलिक से कराना पड़ा, जो उनके लिए बेहद सहज स्थिति नहीं है.
उमरान भी रंग में नहीं दिखे
उमरान मलिक के पास भले ही रफ्तार बहुत अधिक हो, लेकिन स्लॉग ओवर्स में रन रोकने का मारक हथियार माने जाने वाले यॉर्कर में उन्हें महारत हासिल करना बाकी है. साथ ही दूसरी समस्या लाइन और लेंग्थ की थी. मलिक ने इस ओवर में 21 रन लुटाए.
आख़िरकर मुक़ाबले का फ़ैसला उन्हीं गेंदों से हुआ जो मैच में आधिकारिक रूप में नहीं गिनी गई यानी नो बॉल से. नो बॉल और उन पर मिले फ्री हिट की कीमत टीम इंडिया ने 27 रन देकर चुकाई और हार-जीत का फ़ासला रहा 16 रन का.
भारत यह मैच 16 रन से हार गया और इस तरह श्रीलंका ने तीन मैचों की टी20 सिरीज़ में 1-1 से बराबरी हासिल कर ली.
मैच के बाद पंड्या ने कहा, " अच्छा-बुरा दिन हर किसी का हो सकता है, लेकिन बेसिक्स को नहीं छोड़ सकते. ऐसे हालात में गेंदबाज़ी करना हमेशा कठिन रहता है. बात अर्शदीप को कसूरवार ठहराने की नहीं है, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि किसी भी फॉर्मेट में नो बॉल फेंकना अपराध है."
ख़फ़ा हैं खिलाड़ी
पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर भी 'नो बॉल' एपिसोड से बेहद ख़फ़ा दिखे. उन्होंने कहा, "बतौर पेशेवर, आप ऐसा नहीं कर सकते. हम इन दिनों अक्सर गेंदबाज़ों से सुनते हैं कि चीज़ें उनके काबू में नहीं हैं, लेकिन क्या नो बॉल नहीं फेंकना भी आपके बस में नहीं है. आप गेंद फेंकते हैं और इसके बाद बल्लेबाज़ उस पर क्या करता है, ये अलग बात है, लेकिन नो बॉल नहीं फेंकना तो आपके बस में होना ही चाहिए."
अर्शदीप बीमारी के बाद टी20 टीम में लौटे थे और मुंबई में श्रीलंका के ख़िलाफ़ पहले मुक़ाबले में नहीं खेले थे. शायद यह भी एक वजह थी कि गुरुवार के मुक़ाबले में वो लय से भटकते हुए दिखे.
दिनेश कार्तिक ने ट्वीट किया, "आपको अर्शदीप पर तरस आ रहा होगा, ये बस मैच प्रेक्टिस की कमी है. ये कभी आसान नहीं होता"
कार्तिक से इस ट्वीट के जवाब में @GSPR हैंडल से ट्वीट किया गया, "बहानेबाज़ी छोड़िए, नो बॉल का मैच प्रैक्टिस से कोई लेना-देना नहीं है. बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी टीमें जिस अंदाज़ में खेल रही हैं, उसकी तारीफ़ की जानी चाहिए."
एक और यूजर राहुल राजीव ने लिखा, "वो (अर्शदीप) खेल ही क्यों रहे थे अगर उन्होंने मैच प्रेक्टिस नहीं की थी.... ये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट है, कोई गली क्रिकेट नहीं."
हालांकि टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने गेंदबाज़ों का बचाव करते हुए कहा, "बेशक, कोई भी किसी भी मुक़ाबले में वाइड या नो बॉल नहीं करना चाहेगा, लेकिन टी20 फॉर्मेट में ये बहुत खलता है. लेकिन अगर आप इस टीम को देखें, तो कई युवा हैं, ख़ासकर हमारे गेंदबाज़ी विभाग में. हमें धैर्य रखना चाहिए और समझना चाहिए कि इस तरह की चीज़ें हो सकती हैं."
उन्होंने कहा, "अच्छी बात ये है कि इस साल फोकस 50 ओवरों के वर्ल्ड कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप पर है. टी20 मुक़ाबले युवा क्रिकेटरों को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का मौका है और हमें ऐसे कठिन समय में उनका साथ देना चाहिए और समर्थन करना चाहिए"
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