सऊदी फुटबॉल क्लब से क़रार के बाद भी मैच क्यों नहीं खेल रहे रोनाल्डो

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स्टार फ़ुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो को सऊदी अरब के क्लब अल-नस्र के लिए अपना पहला मैच खेलने के लिए फ़िलहाल इंतज़ार करना होगा.
रोनाल्डो इस वक़्त इंग्लिश फ़ुटबॉल एसोसिएशन (एफ़ए) की तरफ़ से दो मैचों की पाबंदी का सामना कर रहे हैं.
रोनाल्डो को गुरुवार को सऊदी प्रो लीग के क्लब अल-ताई के ख़िलाफ़ अपना पहला मैच खेलना था.
37 वर्षीय रोनाल्डो ने इसी हफ़्ते सऊदी क्लब अल-नस्र के साथ क़रार किया था. इसके लिए उन्हें साल 2025 तक हर साल क़रीब 20 करोड़ यूरो दिए जाएंगे.
रोनाल्डो इससे पहले मैनचेस्टर यूनाइटेड क्लब के लिए खेलते थे.
पिछले सोमवार को वो सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे जहां उनका शानदार स्वागत किया गया. अगले दिन यानी मंगलवार को अल-नस्र क्लब के होम ग्राउंड पर उनका विधिवत स्वागत समारोह किया गया था.
रोनाल्डो ने अपने नए क्लब के साथियों के साथ ट्रेनिंग सेशन में भी हिस्सा लिया था. अल-नस्र को पूरी उम्मीद थी कि रोनाल्डो शुक्रवार ( 06 जनवरी) को अपना पहला मैच खेलेंगे. इस मैच की 28 हज़ार टिकटें भी बिक चुकीं थीं.
लेकिन उसके बाद अल-नस्र को बताया गया कि इंग्लिश फ़ुटबॉल एसोसिएशन की तरफ़ से नवंबर में उन पर दो मैचों की पाबंदी लगा दी गई थी. यह पाबंदी अप्रैल में खेले गए एक मैच के बाद होने वाली एक घटना के कारण लगाई गई थी.
रोनाल्डो ने अपने एक समर्थक का फ़ोन उनके हाथ से गिरा दिया था.
पाबंदी क्यों लगाई गई थी ?
रोनाल्डो ने जिनका फ़ोन गिरा दिया था वो ऑटिस्टिक थे. रोनाल्डो ने इसके लिए माफ़ी भी मांगी थी लेकिन उस व्यक्ति ने माफ़ी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
मैनचेस्टर यूनाइटेड यह मैच 0-1 से हार गया था और मैच ख़त्म होने के बाद रोनाल्डो खिलाड़ियों के जाने के लिए बनाई गई सुरंग से गुज़र रहे थे, उसी दौरान उन्होंने अपना हाथ मारकर एक नौजवान लड़के के हाथों से उसका मोबाइल गिरा दिया था.
पुलिस ने इसके लिए रोनाल्डो को चेतावनी भी दी थी.
रोनाल्डो ने बाद में सोशल मीडिया पर माफ़ी मांगी थी और अपने उस समर्थक को ओल्ड ट्रैफ़र्ड स्टेडियम पर एक मैच देखने के लिए मेहमान के तौर पर दावत भी दी थी.
इस घटना के बारे में रोनाल्डो ने कहा था, मुश्किल हालात में अपनी भावनाओं पर क़ाबू पाना आसान नहीं होता है, लेकिन इन सबके बावजूद हमें सम्मानित तरीक़ा अपनाते हुए इस ख़ूबसूरत खेल से मोहब्बत करने वाले नौजवानों के लिए उदाहरण पेश करना है.
लेकिन 14 साल के ऑटिस्टिक जैक ने रोनाल्डो के इस ऑफ़र को ठुकरा दिया और उनकी माफ़ी भी क़बूल नहीं की.
फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के कारण रोनाल्डो पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकी थी और इसीलिए अब उन्हें अपने नए क्लब में उस पाबंदी से गुज़रना पड़ेगा.

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क्या है फ़ीफ़ा का नियम?
फ़ीफ़ा के क़ानून के मुताबिक़ अगर किसी खिलाड़ी पर चार मैचों या तीन महीने की पाबंदी लगाई गई है लेकिन उनके ट्रांसफर तक उसे लागू नहीं किया जा सका तो उसे उस नए क्लब पर लागू करवाना अनिवार्य है जिसके साथ वो खिलाड़ी अपना नया क़रार कर रहा है.
उस वक़्त उनके क्लब एफ़ए ने कहा था कि रोनाल्डो पर लगी पाबंदी को हर हालत में लागू किया जाएगा चाहे वो उसी क्लब में रहें या किसी और क्लब चले जाएं.
अल-नस्र क्लब का अगला मैच 14 जनवरी और उसके बाद 21 जनवरी को है. इसलिए उम्मीद है कि रोनाल्डो अपने नए क्लब से 21 जनवरी को ही अपना पहला मैच खेल सकेंगे. 21 जनवरी को अल-नस्र का मैच इत्तफ़ाक़ क्लब से है.

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रोनाल्डो से 'सऊदी स्पोर्टस वाशिंग' का हिस्सा न बनने की अपील
दुनिया भर मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले पर नज़र रखने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि रोनाल्डो को सऊदी अरब में मानवाधिकार उल्लंघन पर बात करनी चाहिए.
एमनेस्टी ने एक बयान जारी कर कहा है कि अल-नस्र क्लब का रोनाल्डो के साथ क़रार करने का फ़ैसला दर असल सऊदी अरब सरकार की स्पोर्ट्स वाशिंग से संबंधित विस्तृत नीति का हिस्सा है.

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यह संभव है कि रोनाल्डो की सऊदी अरब में मौजूदगी का प्रचार करके सऊदी शासन मुल्क के बदतरीन मानवाधिकार रिकॉर्ड से लोगों का ध्यान हटाने में सफल हो जाए. रोनाल्डो को अपनी लोकप्रियता और सेलेब्रिटी स्टेटस को 'सऊदी स्पोर्ट्स वाशिंग' का हथियार नहीं बनने देना चाहिए.
रोनाल्डो के स्टार पावर का यह आलम है कि पिछले हफ़्ते तक अल-नस्र क्लब के इंसटाग्राम पर सिर्फ़ पांच लाख फ़ॉलोअर थे, अब उनके 91 लाख फ़ॉलोअर हो गए हैं.
सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर लोग रोनाल्डो की प्रैक्टिस के वीडियो भी लगा रहे हैं और उनकी तारीफ़ कर रहे हैं.
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