वर्ल्ड कप: क़तर में ईरान के फ़ुटबॉल फ़ैंस की 'सीक्रेट क्लब' की दुनिया

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- Author, लीना शेख़ोनी
- पदनाम, बीबीसी वल्ड सर्विस
कई ईरानी फ़ुटबॉल फ़ैंन अपनी टीम के प्रति नाराज़गी के कारण फ़ीफ़ा विश्वकप का बायकॉट कर रहे हैं.
इन फ़ैंस को लगता है कि उनकी फ़ुटबॉल टीम ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में वैश्विक मंच पर ज़्यादा कुछ नहीं किया जबकि ईरान की हुकूमत ने प्रदर्शन को दबाने के लिए सैकड़ों लोगों को मार दिया है.
लेकिन ईरान से बाहर रह रहे ईरीनी फ़ैंस ने दोहा में चल रहे फ़ुटबॉल विश्वकप में शामिल होने और प्रदर्शन को आगे चलाते रहने का फ़ैसला किया है.
युवा ईरानी महिला और फ़ुटबॉल फ़ैन तारा कहती हैं, "मैं खुश हूं कि मैं यहां हूं और ये कर पा रही हूं, मैं उनकी (टीम) आंखों में डर देख सकती हूं."
उन्होंने बताया की ईरान के मैच में स्टेडियम ईरान सरकार के समर्थक फ़ैंस से भरा रहता है.
इस महिला का असली नाम तारा नहीं है. जिन लोगों से हमने बात की, वे इंटरव्यू के लिए तभी सहमत हुए जब हमने उनकी पहचान गुप्त रखने की शर्त मानी.
आमिर अपनी पत्नी राना के साथ दोहा आए हैं. वो कहते हैं, "वो यही चाहते हैं कि हम यहां न आएं ताकि वे केवल अपने ही लोगों को स्टेडियमों में रख सकें."
उनकी पत्नी राना कहती हैं, "हमारा हनीमून होने वाला था. लेकिन दोहा में मैच देखकर मेरे भीतर अलग से इमोशन पैदा हो गए हैं."
"मुझे मैच देखते हुए रोना आ रहा था. मेरे भाई और बहन ईरान में मारे जा रहे हैं और मैं मैच के लिए उत्साहित हूं, खेल का मज़ा ले रही हूं, लेकिन मैं खुश नहीं हूं."
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'हमारी टीम को हमारे ख़िलाफ़ कर दिया'
सितंबर में महसा अमीनी नाम की 22 साल की महिला की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. जिसके बाद से सरकार विरोधी प्रदर्शनों से ईरान में हंगामा मचा हुआ है.
अमीनी को ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने ठीक से हिजाब ना पहनने के कारण हिरासत में लिया था और हिरासत में ही उनकी मौत हो गई.
लोगों की राय इस बात पर बंट गई है कि ईरानी फ़ुटबॉल टीम प्रदर्शनकारियों के साथ है या सरकार के साथ. फ़ुटबॉल टीम ने दोहा आने से पहले ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मुलाकात की थी.
इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर की गई जिसके बाद ईरान सरकार के विरोधियों ने टीम की निंदा की और बायकॉट करने की अपील की.
तारा कहती हैं, "टीम मेली (ईरानी टीम का उपनाम) उनकी थी जिनकी आवाज़ नहीं थी. टीम मेली अकेली चीज़ थी जिसने हमें जोड़े रखा."
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'ईरान जीत जाए...'
जब पहला मैच शुरू हुआ तो सब धड़कनें थाम कर बैठे थे. राना कहती हैं, "मैं चाहती थी कि ईरान जीत जाए, लेकिन मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था."
लेकिन, लोगों को फ़ारसी और अंग्रेज़ी में 'वीमेन, लाइफ़, फ़्रीडम' लिखी टी-शर्ट और नेल पॉलिश लगाए देखकर स्टेडियम में प्रदर्शन के समर्थकों का उत्साह बढ़ा.
राना कहती हैं, "यह एक सीक्रेट की तरह था, लेकिन इतना सीक्रेट क्लब भी नहीं, हम एक-दूसरे का उत्साह बढ़ा रहे थे."
अपने पहले मैच में ईरानी फ़ुटबॉल टीम ने देश का राष्ट्रगान नहीं गाया था और इसने ख़ूब सुर्खियां बंटोरी थीं. स्टेडियम में मौजूद ईरानी फै़न रो पड़े थे.
ईरान में सरकार विरोधी फ़ुटबॉल फैंस चाहते थे कि उनकी आवाज़ देश तक पहुंचे.
उन्होंने मैच के 88 वें मिनट में 'अली करीमी' के नारे लगाए. अली करीमी ईरान के पूर्व फ़ुटबॉलर थे जो वहां की सरकार के मुख़र आलोचक थे.
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तनाव भरा दूसरा मैच
लेकिन ईरान के दूसरे मैच का माहौल बिल्कुल अलग था. कड़ी सुरक्षा के बीच भी राना, तारा और आमिर विरोध प्रदर्शन का कुछ सामान लेकर स्टेडियम पहुंचे.
तारा कहती हैं- "ये बेहद डरावना था. आपको हर वक़्त डर लगता रहता है."
राना, तारा और आमिर ने बताया कि उन्हें लगा कि इस मैच में अधिक सरकार समर्थक थे.
तारा कहती हैं, "जैसे ही हम नारे लगाना शुरू करते, अगली पंक्ति मैं बैठे लोग 'ईरानी विद ऑन ऑन, ईरानी विद शान' कहने लगते. ये वो नारा है जिससे वो हमें चुप कराना चाहते हैं. "
"वो हर उस व्यक्ति से डरते हैं जो 'वीमेन, लाइफ़ और फ्रीडम...' के लिए खड़ा है. ये नारा सुनते ही वे तनाव में आ जाते हैं."
जब ईरान ने वेल्स के खिलाफ़ गोल किया तो उन्हें कैसा लगा, इसके जवाब में वो कहती हैं, "हम बहुत खुश नहीं हुए. मेरे तीन दोस्तों और मैंने एक-दूसरे को गले लगाया और हम रो पड़े."
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'असुरक्षा और डर'
क़तर के ईरान के साथ सालों से अच्छे राजनयिक संबंध रहे हैं.
2017 में, ईरान उन कुछ क्षेत्रीय देशों में से एक था जिसने क़तर का समर्थन किया था, जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर के खिलाफ़ 'नाकेबंदी' की थी.
ईरानी फ़ुटबॉल फ़ैंस जिन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन का समर्थन किया है, वो दोहा में ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते बेहद क़रीबी हैं.
तारा कहती हैं, "मैं यहां सुरक्षित महसूस नहीं करती. ऐसा लगता है कि ईरान सरकार की एक ब्रांच यहां आपको परेशान करने के लिए मौजूद है."
राना कहती हैं, "मैंने सुना है कि कुछ पत्रकारों को यहां आने के लिए वीज़ा देने से मना कर दिया गया था, ऐसे में हम लोगों का यहां होना और भी महत्वपूर्ण है."
"अब हम ही पत्रकार हैं."
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