क़तर: शेख़ के फार्म हाउस पर कैसी है ज़िंदगी? बीबीसी संवाददाता की आंखों देखी

- Author, होसे कार्लोस क्वेतो
- पदनाम, बीबीसी मुंडो संवाददाता, क़तर से
"ये फ़ुटबॉल, दोस्तों और अच्छे खाने की रात है. हम राजनीति को इससे अलग रखेंगे."
क़तर की राजधानी दोहा से क़रीब 15 किलोमीटर दूर उम्म सलाल में जब अपने परिवार के फार्म गार्डन पर बो सलेम (जिसका मतलब है सलेम के बेटे) ने मेरा स्वागत किया तो सबसे पहले यही घोषणा की.
एक क़रीबी मित्र के ज़रिए मेरी उनसे पहचान हुई थी और मुझे यहां आकर पुर्तगाल बनाम घाना और सर्बिया बनाम ब्राज़ील के मैचों को देखने का निमंत्रण मिला. यहां स्थानीय क़तर के नागरिकों के अलावा मध्य पूर्व के कई देशों के लोग भी थे.
ये गुरुवार का दिन था. मुस्लिम राष्ट्रों में शुक्रवार की छुट्टी होती है और आम तौर पर लोग गुरुवार की रात आराम करते हैं. लोग शाम में मैच देखने के लिए भी जुटते हैं. दो लगातार हार के बावजूद फ़टबॉल वर्ल्ड कप में अभी भी क़तर की उम्मीदें बाक़ी हैं.
राजधानी दोहा में गगनचुंबी इमारते हैं, फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़े बड़े-बड़े सेट हैं और भविष्य से आंख मिलाता इंफ्रास्ट्रक्चर है. वहां से कुछ दूर ये मेरे लिए स्थानीय लोगों और संस्कृति को समझने का बेहतर मौका था.
क़तर में वर्ल्ड कप कवर करते हुए यहां के स्थानीय लोगों से बात कर पाना आसान नहीं है. ये एक विवादित वर्ल्ड कप है और बहुत से लोग प्रेस से बात करने से बचते हैं. मैं एक ऐसे देश के बारे में और अधिक जानने के आतुर था जो पिछले एक दशक से वर्ल्ड कप को लेकर विवादों में है.
"क्या तुम क्यूबा से हो, सिगार लाए हो"
बेडुइन टेंट (अरबी तंबू) में तीस से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था है, बड़े टीवी सेट लगे हैं और दर्जनों लोग आग के चारों ओर बैठे हैं.
कई तरह के फ्लेवर के शीशों से धुआं उड़ रहा है.
जब लोग मुझे देखते हैं तो अरबी और अंग्रेज़ी में स्वागत करते हैं और सलाम कहते हैं.
जैसे ही लोगों को पता चलता है कि मैं क्यूबा से हूं और सिगार नहीं लाया हूं, तो चुटकुले बनने लगते हैं.
क़तर में एक सप्ताह से अधिक समय बिताने के बाद मुझे ये तो पता चल ही गया है कि यहां दोस्ती करने का एक आसान तरीका सिगार है. फिदेल कास्त्रो को भी लोग पहचानते हैं.
क़तर में शराब पर रोक है और दुनियाभर में लोगों को आकर्षित करने वाली रम के पास यहां कोई मौका नहीं है.
इस फार्म में एक बग़ीचा भी है जिसके आखिरी छोर में बकरियां और जानवर पाले जाते हैं. उनके लिए कटी ताज़ी घास की ख़ुशबू आ रही है.
कई गोल चक्करों और एक बड़े हाइवे और खाली किनारों को पार करके हम यहां पहुंचे हैं.
यहां बनी संपत्तियां ऊंची दीवारों से ढंकी हैं और इनमें झांकना आसान नहीं हैं. लेकिन इनमें कई दरवाज़े हैं जो खुले हैं.
क़तर के बारे में कहा जाता है कि ये इतना सुरक्षित है कि यहां लोग दरवाज़े बंद नहीं करते हैं. धारणा सी लगने वाली ये बात यहां पहुंचकर सच लगने लगती है.

अमीर के प्रति सम्मान और क़तर के लोगों की ज़िंदगी
ये एक बड़ा फार्म हाउस है और पत्थरों से बना है.
बग़ीचे के किनारे चाय पीने के लिए एक कमरा है. यहां बात करते हुए बो सलेम मुझे पुराने और नए गैजेट दिखाते हैं.
ये वातानुकूलित ठिकाना है और क़तर में गर्मियों में जब पारा 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है तब ये लोग यहीं बैठकें करते हैं.
किसी बेडुइन खेमे में रात में खुले में खाना एक लग्ज़री है जो सर्दियों की रातों में ही संभव है जब बाहर पारा 20 डिग्री होता है और हालात बहुत सुकून देने वाले होते हैं.
जो चीज़े बो सलेम मुझे दिखा रहे हैं उनमें क़तर के अमीर तमीन बिन हमाद अल थानी की फोटो भी है.
मैं पूछता हूं, "क्यूबा में जैसे फ़िदेल कास्त्रो की तस्वीर हर जगह है, वैसे ही क़तर में अमीर की तस्वीर हर जगह दिखाई देती है, इसकी क्या वजह है?"
"प्यार, अमीर हमें मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं. वो हमें क़तर पर गर्व महसूस करवाते हैं."

क़तर में बहुत से लोगों को इस बात पर गर्व है कि कैसे उनके देश ने बहुत कम समय में बहुत तरक्की हासिल की है. इसके पीछे गैस और तेल से आने वाला पैसा है.
बो सलेम कहते हैं, "जिस जगह मैं पला-बढ़ा वो अब पहचान में भी नहीं आती है. दोहा में भी ऐसी सड़के हैं जहां हम कुछ महीने जाते हैं तो सब कुछ बदला हुआ नज़र आता है क्योंकि सब कुछ बदल गया है."
बो सलेम खाना बनाने के लिए स्टोव पर बड़ी 50 लीटर की कढ़ाई चढ़ाते हैं. वो पारंपरिक अरबी डिश गल्फ़ कब्सा (मसालों में बना मीट) बना रहे हैं.


वो कहते हैं, "आप इसमें चिकेन या कोई और मांस भी डाल सकते हैं लेकिन आज ये मेहमान विशेष है और हम बकरे का मांस इस्तेमाल कर रहे हैं."
और मेहमान पहुंचते हैं, पहले से ही 25 लोग मौजूद थे. लेकिन बो सलेम ख़ुश हैं.
"हमें लोगों का स्वागत करना पसंद है"
यहां सब पुरुष हैं
"महिलाएं भी आएंगी", मैं पूछता हूं.
फ़ेसबुक पर फोटो दिखाते हुए बो सलेम कहते हैं, "हां, कल एक विदेशी महिला आईं थीं, उनका जन्मदिन था और हमने उन्हें मुबारकबाद देते हुए गीत भी गाया. वो बहुत ख़ुश हुई"
"क़तर एक विरात बना रहा है"
पुर्तगाल और घाना मैच के पहले हाफ़ में कोई गोल नहीं हुआ, लेकिन दूसरे हाफ में जल्द ही क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पेनल्टी पर पुर्तगाल के लिए गोल कर दिया और मैच में रोमांच बढ़ गया.
रोनाल्डो ने जब अपनी चिर-परिचित मुद्रा में 'सियू' कहकर जश्न मनाया तो यहां भी कई लोग उछल पड़े, इनमें एक पुर्तगाली मेहमान भी शामिल थे.
ये वर्ल्ड कप क़तर के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है.
यहां मौजूद एक व्यक्ति कहता है, "कई लोग चाहते हैं कि क़तर नाकाम हो जाए, इस पर मुझे ग़ुस्सा आता है. वो इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टेडियमों में किए गए निवेश की आलोचना करते हैं, लेकिन ये एक विरासत है, जैसे कि प्रीमियर लीग के इंग्लिश स्टेडियम."
वो मेरा नाम लेकर मुझे उस कढ़ाई की तरफ पुकारते हैं जहां खाना बन रहा है. वो जानते हैं कि मैं यहां वीडियो बनाने भी आया हूं और वो नहीं चाहते कि इस प्रक्रिया का कोई अहम हिस्सा छूट जाए.
मुझे समझाते हुए एक व्यक्ति बताता है, "हम मांस को तब तक पकाते हैं जब तक ये मुलायम नहीं हो जाता. इसका राज़ है कढ़ी पत्ता और जला हुआ नींबू डालना."
मैं भी ध्यान से सुन रहा हूं क्योंकि लंदन लौटकर मैं इस रेसिपी को ज़रूर आज़माना चाहूंगा.
कुछ ही देर में एक युवक ब्राज़ील की जर्सी पहनकर पहुंचता है. वो बताता है कि इस मौके का जश्न मनाने का उसने कितना इंतज़ार किया है.
"12 सालों से हम इंतज़ार कर रहे थे. इसे लेकर मेरी भावनाएं मिश्रित थीं. मैं ख़ुश था लेकिन एक बात ये भी है कि क़तर ने कभी इतने बड़े पैमाने पर किसी आयोजन की मेज़बानी नहीं की थी तो ये विचार भी था कि इसे लेकर कितना दबाव हो सकता है."
वो "अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा मानवाधिकार के मुद्दे पर बनाई गई क़तर की छवि" के बारे में भी सोचते हैं.
"अरबी में हमारा एक मुहावरा है जिसका अनुवाद ये हो सकता है कि हर देश का अपना एक क़ब्रिस्तान होता है. हम चाहते हैं कि हाल के सालों में हमने जो कुछ भी हासिल किया है उसके बारे में भी बात होनी चाहिए."
अरबी कॉफ़ी के साथ धर्म
3-2 के रोमांचक मुक़ाबले में पुर्तगाल ने घाना को हरा दिया है.
ब्राज़ील का मैच शुरू होता है तो हम अरबी कॉफ़ी और शीशा पीना शुरू करते हैं.
फ़लस्तीनी मूल के क़तरी नागरिक नबील कहते हैं, "धीमे-धीमे पियो, अगर आपको इसकी आदत नहीं है तो आप गिर सकते हैं."
कॉफ़ी में पीलापन है और ये मसालेदार है, ये पश्चिम की ग़हरे रंग की रोस्टेड काफ़ी की तरह नहीं है.

नबील बताते हैं, "कॉफ़ी बीज़ को अधिक रोस्ट नहीं किया गया है इसलिए ये रंग ऐसा है. हो सके तो इसे किसी मीठी चीज़ के साथ पियो क्योंकि ये बहुत कड़वी है."
इस कॉफ़ी बातचीत का फ़ायदा मैं ये समझने के लिए उठाता हूं कि अरबी संस्कृति में डिनर कैसे किया जाता है और किस तरह का व्यवहार करना चाहिए.
नबील बताते हैं, "अपने सीधे हाथ से खाओ, जो सामने हो उसे उठा लो और हाथ को ज़मीन पर नीचा करते हुए पीछे खींचो, जैसे कि तुम अपनी उंगलियों पर चल रहे हो."
हालांकि वो मुझे ये विश्वास भी दिलाते हैं कि मैं जैसे भी खाऊं, कोई मेरे बारे में कुछ नहीं सोचेगा.
एक क़तरी नागरिक मेरे बाईं तरफ रखी एक चीज़ उठाते हैं जो तस्बीह जैसी है.
वो समझाते हैं, "इसे यहां मिस्बाह कहते हैं, जैसे ईसाई रोज़री पर ईश्वर को याद करते हैं, वैसे ही हम इस पर गिनते हुए ईश्वर को याद करते हैं."
उन्होंने क़तर की पारंपरिक पोशाक थॉब (घुटनों तक आने वाली सफेद पोशाक) पहनी है और उस पर सफेद रंग का साफ़ा ओढ़ा है.
अन्य लोग टीशर्ट और ट्राउज़र में है. कुछ थॉब में ही है लेकिन सिर ढंका हुआ नहीं है. कई ने टोपियां लगाई हैं.
हाथ में तस्बीह लिए क़तरी व्यक्ति कहता है, "आज मैंने सर पर गुतरा (साफ़ा) बांधा है क्योंकि मैं एक औपचारिक बैठक से आ रहा हूं."
बातचीत कई बार धर्म पर पहुंच जाती है और फिर पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों में टकराव पर बात होने लगती है.

"पश्चिम के लोग कई बार इस्लाम को नहीं समझ पाते हैं. हमारे लिए ये जीवन जीने का मार्ग है, कैसे व्यवहार करें, दूसरों से कैसे पेश आएं, यहां तक की सड़क पर किस तरह चलें. इस्लाम शांति है."
नबील बातचीत में शामिल होते हैं और उन परंपराओं और नियमों का बचाव करते हैं जो पश्चिमी नज़रिए से देखने पर मानवाधिकारों के लिए सख़्त नज़र आती हैं.
वो सहिष्णुता भरी आवाज़ में कहते हैं, "मैं दूसरों की परंपराओं का सम्मान करता हूं और दूसरों को भी हमारी परंपरा का सम्मान करना चाहिए. मीडिया क़तर के बारे में पूरा सच नहीं दिखा रहा है. इस महीने में क़तर में ऐसी चीज़ें भी करने दी जा रही हैं जो आम बात नहीं हैं."
वो मुझसे पूछते हैं कि मुझे क़तर में क्या अलग लग रहा है. उनका अपमान किए बिना मैं कहता हूं, इस बड़ी तादाद में महिलाओं को ढंके हुए देखना.
क़तर में रहने वाले एक व्यक्ति कहते हैं, "हमें यहां वो खुलापन पसंद नहीं है. किसी और की आंखें किसी दूसरे की पत्नी को देखें. ये लालसा हमें पसंद नहीं है."
हालांकि वो मेरी बात का सम्मान करते हैं और मेरे इस विचार के प्रति भी सहिष्णुता ही दिखाते हैं.
वो ज़ोर देकर कहते हैं, "हम यहां मिलने और सीखने के लिए हैं, किसी बात पर बहस करने के लिए."
समूहिक भोजन
सर्बिया और ब्राज़ील के मैच में ब्रेक हुआ तो डिनर लगा दिया गया.
हम नंगे पैर बेडुइन खेमे में बैठे. इस क़बीले के लोग पहले रेगिस्तान में इसी तरह एक साथ बैठकर खाना खाया करते थे और आराम किया करते थे.

ज़मीन पर बैठकर बहुत से लोग हाथों से ही खा रहे हैं, मेरे जैसे लोग चम्मच का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन जब पूरा मांस खा जाने का नंबर आ जाता है तो मैं भी हड्डी उठा लेता हूं और उस पर एक रेशा भी नहीं छोड़ता.
सबके हिस्से में बहुत कुछ आ रहा है, मांस के साथ चावल परोसे जा रहे हैं और साथ में प्याज़ का सलाद भी है.
पानी और सोडा है लेकिन शराब की एक बूंद भी नहीं.
बो सलेम ने जिस तरह से खाने को पेश किया है वो अलग ही संतुष्टि दे रहा है.
साथ में खा रहा एक मेहमान कहता है, "हर बार जब वो खाना बनाते हैं, स्वाद पहले से बेहतर होता है."

मेरे सामने बैठकर खाना खा रहा एक युवक तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहा है. वो ये जता रहा है कि बीबीसी मुंडो के एक वीडियो में उसने मुझे देखा है.
कुछ मिनट पहले खाने की तारफ़ी करने वाला व्यक्ति पूछता है, "आपके वीडियो कितने लोगों तक पहुंचते हैं?"
"ये कई बातों पर निर्भर करता है. गांजे का दिमाग़ पर होने वाले असर का वीडियो लाखों लोगों ने देखा था."
इसी बीच ब्राज़ील के स्ट्राइकर रिचार्लसन ने गोल दाग दिया है और बाहर शोर शराबा होने लगता है.
क़तर में सबसे ज़्यादा समर्थक ब्राज़ील के ही हैं. हालांकि अर्जेंटिना के मैसी के समर्थकों की तादाद भी कम नहीं है.
"हम चाहते हैं कि दुनिया इस क़तर को देखे"

"हम चाहते हैं कि दुनिया क़तर के बारे में और अधिक जानें. हम सामान्य लोग हैं जो बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं."
चार घंटे के दोस्ताना और मौज मस्ती वाले माहौल के बाद हमारे मेज़बान ने यही आख़िरी संदेश दिया.
"अगर आप दोबारा आना चाहते हैं तो स्वागत है, लेकिन इस बार सिगार लेकर आइयेगा."
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