क़तर वर्ल्ड कप 2022: क्या 'भव्य आयोजन' उठ रहे सवालों को पीछे छोड़ देगा?

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"नाऊ इज़ ऑल” यानी “वर्तमान ही सबकुछ है” क़तर विश्व कप का अधिकारिक नारा है. शायद ये संदेश है कि वर्तमान और खेल के मैदान पर ध्यान रखो, जहां जल्द ही मुक़ाबले शुरू होने वाले हैं. यानी पिछली बातों से आगे बढ़ा जाए. लेकिन क्या ये इतना आसान है?
बहुत से लोग क़तर 2022 वर्ल्ड कप को हालिया इतिहास का सबसे विवादित खेल आयोजन मान रहे हैं. बीते दो दशकों में चीन ने दो बार ओलंपिक खेलों का आयोजन किया है. रूस फ़ुटबॉल विश्व कप 2018 और शीत ओलंपिक की मेज़बानी कर चुका है.
रूस और चीन दोनों ही मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए बदनाम रहे हैं और ये चिंता पैदा हुई थी कि इतने बड़े खेल आयोजन यहां की तानाशाही सत्ता को और मज़बूत कर सकते हैं.
लेकिन निस्संदेह सबसे ज़्यादा विवाद क़तर की विश्वकप की मेज़बानी पर ही हो रहा है. बीते 12 सालों में बार-बार फ़ुटबॉल के सबसे बड़े आयोजन को क़तर को सौंपने को लेकर ग़ुस्से और बेचैनी का इज़हार किया जाता रहा है.
भव्य होगा वर्ल्ड कपः क़तर

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क़तर पश्चिमी देशों का अहम सहयोगी देश है और बड़ा निवेशक है. रिपोर्टों के मुताबिक़ ब्रिटेन में ज़मीन के मालिक़ाना हक़ वाले दस शीर्ष निवेशकों में क़तर शामिल है. यही नहीं क़तर गैस का बड़ा सप्लायर है और यूरोप में बढ़ रहे गैस संकट के बीच क़तर की भूमिका अहम हो सकती है. पूर्व फ़ीफ़ा प्रमुख सेप ब्लैटर का बयान हो या फिर क़तर के वर्ल्ड कप एंबेसडर ख़ालिद सलमान का समलैंगिकों को लेकर दिया गया विवादत बयान - क़तर वर्ल्ड कप पर एक के बाद एक सवाल उठ रहे हैं.
वर्ल्ड कप से जुड़े निर्माण कार्यों में लगे मज़दूरों की हालत और उनके मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भी क़तर पर सवाल उठते रहे हैं.
इस सबके बीच क़तर का कहना है कि वर्ल्ड कप की बदनामी के प्रयास अनुचित हैं. ये मध्य पूर्व का पहला वर्ल्ड कप है और क़तर का कहना है कि ये भव्य और दर्शनीय होगा और इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का जश्न मनाया जाना चाहिए. क़तर ने कहा है कि इस विशाल आयोजन में सबका स्वागत है, ये खेल को बढ़ावा देगा, युवाओं को प्रेरित करेगा, पर्यटन को बढ़ाएगा, देश की अर्थव्यवस्था में विविधता लाएगा.
सबसे बड़ा सवालः क़तर में क्यों हो रहा है वर्ल्ड कप?

बीते सोमवार को फ़ीफ़ा के पूर्व प्रमुख सेप ब्लैटर ने कहा कि क़तर में विश्व कप कराना एक ग़लती है. मंगलवार को क़तर के वर्ल्ड कप एंबेसडर ख़ालिद सलमान ने समलैंगिकता को “दिमाग़ की ख़राबी” बता दिया.
क़तर ने कहा है कि वर्ल्ड कप में सभी का स्वागत है, लेकिन इस बयान को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है.
ऐसे में ये सवाल बार-बार उठ रहा है कि तीस लाख की आबादी वाले देश में जहां गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है और जहां समलैंगिकता पर पाबंदी है, उसे वर्ल्ड कप की मेज़बानी कैसे मिली?
क़तर ने कभी भी वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफ़ाई तक नहीं किया था, मेज़बानी करना तो अलग ही बात थी. लेकिन साल 2010 में ये बदल गया. फ़ीफ़ा ने साल 2022 के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की मेज़बानी के लिए क़तर को विजेता घोषित किया.
फ़ीफ़ा की कार्यकारी समिति ने ये फ़ैसला लिया था. साल 2014 में इसमें मतदान करने वाले एक सदस्य मिशेल प्लातिनी ने बीबीसी को बताया था कि उन्होंने क़तर को ही क्यों चुना.
प्लातिनी ने कहा था, “मैंने ये फ़ैसला किया था कि इस बार हम ऐसे हिस्से में जाएंगे जहां पहले कभी वर्ल्ड कप नहीं हुआ है.”
फ़ीफ़ा के लिए क़तर को चुनने का ये एक कारण था, लेकिन इसके और भी कारण हो सकते हैं. संडे टाइम्स की एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट के बाद मतदान से पहले समिति के दो सदस्यों को हटा दिया गया था. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन दोनों सदस्यों ने अपने वोट बेचने की पेशकश की थी.
मेज़बानी तय करने के लिए हुए उस मतदान में बाक़ी सदस्यों ने अमेरिका की जगह क़तर को चुना था. हालांकि अमेरिका को पहली पसंद बताया जा रहा था.
इसके बाद साल 2011 में संडे टाइम्स की एक और ख़ुफ़िया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि समिति के दो अन्य सदस्यों को भी क़तर के समर्थन में मतदान करने के लिए पंद्रह लाख डॉलर दिए गए थे. उन्होंने इन आरोपों को ख़ारिज किया था.
साल 2012 में फ़ीफ़ा ने इसकी जांच की घोषणा कर दी थी. इस जांच की रिपोर्ट में कहा गया कि वोट ख़रीदे नहीं गए थे, लेकिन इसमें ये भी कहा गया था कि कुछ ख़ास लोगों का आचरण समस्याओं का संकेत देता है.
- इसी दौरान ये भी सामने आया कि अमेरिकी ख़ुफ़िया जांच एजेंसी एफ़बीआई कई सालों से फ़ीफ़ा की जांच कर रही थी. क़तर में होने जा रहा फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप इतना विवादों में क्यों है?

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एफ़बीआई ने साल 2015 में कहा कि फ़ीफ़ा में रिश्वत, अवैध भुगतान और फ़ायदा पहुंचाना काम करने का तरीक़ा बन गया था. हालांकि एफ़बीआई ने क़तर के विश्व कप की मेज़बानी हासिल करने का ख़ास उल्लेख नहीं किया था. हालांकि इसके बाद से ये फ़ैसला लेने वाली कार्यसमिति के 22 सदस्यों में से 11 को या तो निलंबित कर दिया गया या उन पर ज़ुर्माना लगाया गया या मुक़दमा चला. इनमें से दो दोषी साबित हुए, लेकिन क़तर की मेज़बानी के मामले में नहीं. अब मतदान के 12 साल बाद क़तर ने कहा है कि उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जो अवैध हो या अनैतिक हो. लेकिन इस सप्ताह सेप ब्लैटर ने इस बारे में और भी अधिक कहा है. उन्होंने कहा है कि ज़ाहिर है ये पैसे का मामला भी है. उन्होंने कहा कि वो ये बात लोगों के नहीं, देशों के संदर्भ में कह रहे हैं.
उन्होंने बिना किसी सबूत के ये संकेत दिए हैं कि हो सकता है क़तर का फ़्रांस से लड़ाकू विमान की बिक़्री का सौदा क़तर की वर्ल्ड कप की मेज़बानी हासिल करने की वार्ता के ज़रिए आसान हुआ हो.
हालांकि अभी ये संबंध स्थापित नहीं हुआ है और ना ही बड़े खेल आयोजनों की मेज़बानी देने के पीछे राजनीतिक वजहें होना कोई असामान्य बात हो.
लेकिन ये बात ऐसा व्यक्ति कह रहा है जो फ़ीफ़ा का प्रमुख रहा है और उसके कहने का मतलब ये है कि क़तर के वर्ल्ड कप की मेज़बानी हासिल करने के तार फ़्रांस के क़तर को सैन्य उपकरण बेचने से जुड़े हो सकते हैं. हमें ये भी याद रखना चाहिए कि सेप ब्लैटर जिन दिनों फ़ीफ़ा के प्रमुख थे, उसे फ़ीफ़ा में भ्रष्टाचार के दौर के रूप में जाना जाता है.
क़तर और फ़ीफ़ा दोनों ही किसी भी तरह से कुछ भी ग़लत होने से इनकार करते रहे हैं.
इस सबके बीच, जब खिलाड़ी क़तर जाने की तैयारियां कर रहे हैं, इस सवाल का जवाब अभी मिलना बाक़ी है कि ये वर्ल्ड कप क़तर में क्यों हो रहा है?
सर्दियों में क्यों हो रहा है वर्ल्ड कप?

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फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट आमतौर पर जून और जुलाई में आयोजित किया जाता है, लेकिन क़तर में साल के इन महीनों में औसत तापमान लगभग 41 डिग्री सेल्सियस होता है और ये 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. इतनी गर्मी ख़तरनाक है और ऐसी स्थिति में 90 मिनट खेलने की बात सोच भी नहीं सकते हैं. बोली प्रक्रिया के दौरान, क़तर ने एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग तकनीक का इस्तेमाल करने का वादा किया था. ऐसा कहा गया था कि ये स्टेडियम और ट्रेनिंग पिच जैसी जगहों को 23 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर देगा. हालांकि, 2015 में फ़ीफ़ा ने ये फैसला लिया कि टूर्नामेंट सर्दियों में आयोजित कराया जाएगा. वर्ल्ड कप 20 नवंबर से शुरू हो रहा है और फाइनल 18 दिसंबर को खेला जाना है. इसका मतलब ये है कि ये कई देशों के क्लब फुटबॉल सीज़न के ठीक बीच में आएगा, जिससे उन्हें रुकावट का सामना करना पड़ेगा.
किन स्टेडियमों में खेले जाएंगे मुक़ाबले?

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इस टूर्नामेंट के लिए क़तर में कुल 8 स्टेडियम तैयार किए गए हैं. 8 में से 7 तो इस टूर्नामेंट के लिए बिल्कुल शुरुआत से बनाए गए हैं. बाकी बचे एक को भी पूरी तरह से फिर से तैयार किया गया है. ये सभी स्टेडियम एक-दूसरे से क़रीब एक घंटे की ड्राइव और ज़्यादा से ज़्यादा 43 मील की दूरी पर हैं.
ये 8 स्टेडियम हैं:
- लुसैल स्टेडियम (क्षमता- 80,000)
- अल बेत स्टेडियम (क्षमता- 60,000)
- स्टेडियम 974 (क्षमता- 40,000)
- ख़लीफ़ा इंटरनेशनल स्टेडियम (क्षमता- 45,416)
- एजुकेशन सिटी स्टेडियम (क्षमता- 40,000)
- अल थुमामा स्टेडियम (क्षमता- 40,000)
- अल जनुब स्टेडियम (क्षमता- 40,000)
- अहमद बिन अली स्टेडियम (क्षमता- 40,000)
FIFA वर्ल्ड कप 2022 का फ़ाइनल मुक़ाबला 18 दिसंबर को लुसैल स्टेडियम में खेला जाएगा.
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