सऊदी अरब ने रोनाल्डो पर इतना धन क्यों बरसाया

रोनाल्डो

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एक महीने से भी कम वक्त गुज़रा है, जब पुर्तगाल की फ़ुटबॉल टीम के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो क़तर में हो रहे विश्व कप के क्वॉर्टर फ़ाइनल में मोरक्को से 1-0 से हारने के बाद आंखों में आंसू लिए मैदान से बाहर जाते दिखे थे.

पुर्तगाल को हराने के बाद मोरक्को वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल तक पहुँचने वाला पहला अफ़्रीकी अरब देश बना था.

विश्व कप जीतने का सपना टूटने के कुछ सप्ताह बाद अब पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने यूरोपीय फ़ुटबॉल क्लब मैंचेस्टर यूनाइटेड छोड़कर, सऊदी अरब के 'अल-नस्र' से नाता जोड़ लिया है.

अल नस्र और रोनाल्डो के बीच हुआ क़रार अब तक का सबसे महंगा सौदा बताया जा रहा है. अल-नस्र 2025 तक हर साल रोनाल्डो को क़रीब 1800 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा.

मंगलवार को रोनाल्डो जब औपचारिक रूप से अपने नए क्लब से जुड़े तो उन्होंने कहा कि वो यूरोप में बहुत रिकॉर्ड बना चुके हैं और अब सऊदी अरब में कुछ रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं.

बीता वर्ल्ड कप रोनाल्डो के लिए कुछ ख़ास नहीं रहा. आख़िरी दो गेम में तो उन्हें शुरुआत में मैदान से बाहर तक बैठाया गया. रोनाल्डो ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के इस सीज़न में हुए 16 मैचों में केवल तीन ही गोल दागे, इनमें से भी एक पेनल्टी की वजह से हुआ.

इसके बावजूद रोनाल्डो के अल-नस्र से जुड़ने पर मध्य-पूर्वी देशों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है.

अल -नस्र क्लब ने भी टीम की जर्सी के साथ रोनाल्डो की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए ये उत्साह दिखाया है.

हालांकि, 37 वर्षीय रोनाल्डो के साथ अल-नस्र के इतने महंगे क़रार को कुछ जानकार सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुधारवादी नीति से भी जोड़ रहे हैं, जिसका लक्ष्य पश्चिमी देशों को पीछे छोड़ सऊदी अरब को वैश्विक शक्ति के तौर पर स्थापित करना है.

सऊदी अरब में बढ़ता फ़ुटबॉल का खुमार

क्रिस्टियानो रोनाल्डो

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इमेज कैप्शन, मोरक्को से हार के बाद मैदान पर ही रो पड़े थे क्रिस्टियानो रोनाल्डो

सऊदी अरब की फ़ुटबॉल टीम ने शुरुआती मैच में क़तर विश्व में 22 नवंबर को हुए मुक़ाबले में बड़ा उलटफेर करते हुए अर्जेंटीना को 2-1 से हरा दिया था.

मैच के दिन सऊदी के मंत्रालयों, सरकारी एजेंसियों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक में समय से पहले छुट्टी कर दी गई ताकि लोग रोमांचक मुक़ाबला देख सकें.

सऊदी अरब की जीत के बाद किंग सलमान ने अगले दिन राष्ट्रीय अवकाश का एलान कर दिया था.

सऊदी की जीत न केवल देश बल्कि इस पूरे क्षेत्र के लिए उत्साह से भरी थी. सोशल मीडिया पर दूसरे अरब देशों के लोग भी सऊदी की जीत को अपनी जीत के तौर पर देखने लगे.

ये जीत कोई इत्तेफ़ाक नहीं थी. सऊदी अरब के खेल मंत्री प्रिंस अब्दुलालज़िज़ बिन तुर्की अल फ़ैज़ल ने बताया कि उनकी टीम इस मौक़े के लिए तीन सालों से तैयारी में जुटी थी. खेल मंत्रालय का फ़ुटबॉल को यूं बढ़ावा देना उसकी दिशा और लक्ष्य का स्पष्ट संकेत देता है.

सऊदी के विज़न 2030 का अहम पहलू है खेल

सऊदी प्रिंस और फ़ीफ़ा चीफ़ विश्व कप के दौरान

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इमेज कैप्शन, सऊदी प्रिंस और फ़ीफ़ा चीफ़ विश्व कप के दौरान

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान क़तर विश्व कप के दौरान कई बार फ़ीफ़ा के प्रमुख जी वी इनफ़ैंन्तिनो के साथ दिखे. खेलों को साल 2016 में मोहम्मद बिन सलमान के 'विज़न 2030' के तहत प्राथमिकताओं में शामिल किया गया.

इसके बाद से ही सऊदी अरब के ख़ेल जगत में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं.

विज़न 2030 के तहत तीन लक्ष्य रखे गए, जिसका मक़सद खेलों में लोगों की भागीदारी को 2030 तक 40 फ़ीसदी तक बढ़ाना, विदेशों में सऊदी के एथलीटों की परफॉर्मेंस को सुधारना और खेल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है.

फ़ुटबॉल पर पकड़ रखने वाले पत्रकार उरी लेवी ने मोहम्मद बिन सलमान का एक वीडियो ट्वीट किया है. उन्होंने बताया है कि रोनाल्डो का सऊदी अरब पहुँचना बड़े बदलाव का संकेत है.

वीडियो में सऊदी क्राउन प्रिंस कह रहे हैं कि मध्य पूर्व अब नया यूरोप बनेगा.

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क्राउन प्रिंस ने वीडियो में कह रहे हैं, "अगले पाँच सालों में सऊदी अरब बिल्कुल अलग होगा. बहरीन एकदम अलग होगा. कुवैत.. यहां तक कि क़तर भी..उनके साथ हमारे मतभेदों के बावजूद..वो एक मज़बूत अर्थव्यवस्था है और अगले पांच सालों में बिल्कुल अलग होंगे. यूएई, ओमान, लेबनान, जॉर्डन, मिस्र, इराक़ और यहां जो मौके हैं... अगर अगले पांच सालों में हम सफल रहे तो बहुत से देश हमारे पदचिह्नों पर चलेंगे."

"अगले 30 सालों में नया वैश्विक पुनर्जागरण मिडिल ईस्ट में होगा. ये सऊदी की जंग है. ये मेरी जंग है और जब तक मैं मिडिल ईस्ट को दुनिया की अगुवाई करते नहीं देखता तब तक मैं इस जंग में मरना नहीं चाहता. मुझे लगता है कि ये लक्ष्य 100 फ़ीसदी हासिल होगा."

ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद भूराजनीतिक मसलों पर अपनी राय रखने वाले गोकुल साहनी ने भी एमबीएस का यही वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि शायद अब सऊदी अरब धर्म को आगे रखने वाली प्राथमिकता को छोड़कर एक मानक और अधिक व्यावहारिक "शक्ति" के तौर पर उभरना चाहता है.

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रोनाल्डो से सऊदी अरब को क्या फ़ायदा होगा?

सऊदी अरब फ़ुटबॉल

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इमेज कैप्शन, विश्व कप के दौरान सऊदी अरब के फ़ुटबॉल प्रशंसक

क्रिस्टियानो रोनाल्डो को साइन करने के बाद अल-नस्र ने ट्वीट किया, "इतिहास बन रहा है. ये डील न सिर्फ़ हमारे क्लब को बड़ी सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी बल्कि हमारी लीग, हमारे देश और आने वाली पीढ़ियों , लड़के और लड़कियों को उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी."

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रोनाल्डो ने डील का एलान करते हुए कहा, "मैं एक अलग देश में नए फ़ुटबॉल लीग का अनुभव पाने के लिए उत्साहित हूं."

"अल-नस्र जिस विज़न के साथ काम कर रहा है और पुरुष तथा महिला फ़ुटबॉल के लिहाज से जिस तरह सऊदी अरब में विकसित हो रहा है, वो प्रेरणादायक है. हम विश्व कप में सऊदी अरब के हालिया प्रदर्शन से देख सकते हैं कि ये फ़ुटबॉल के लिहाज से एक बेहद क्षमतावान देश है."

बेशक इस डील ने रोनाल्डो को इतिहास में सबसे अधिक भुगतान पाने वाला फ़ुटबॉलर बना दिया है लेकिन उनके स्टारडम का फ़ायदा सऊदी अरब को भी मिल सकता है.

मिडिल ईस्ट इकोनॉमी नाम की वेबसाइट लिखती है कि रोनाल्डो सऊदी अरब की 2030 फ़ीफ़ा विश्व कप की मेज़बानी हासिल करने की कवायद को मज़बूती दे सकते हैं. ख़ासतौर पर तब जब रोनाल्डो के आने से अब मीडिया पूरी तरह से सऊदी फ़ुटबॉल की ओर केंद्रित हो गई है.

वेबसाइट ने सऊदी के पर्यटन मंत्री अहमद अल-खतीब के हवाले से लिखा है कि सऊदी अरब फ़ीफ़ा विश्व कप 2030 के लिए मिस्र और ग्रीस के साथ संयुक्त मेज़बानी का प्रस्ताव दे सकता है.

अहमद अल-खतीब ने एक इंटरव्यू में कहा, "हम मिस्र और ग्रीस के साथ मिलकर प्रस्ताव देने का सोच रहे हैं और आशा करते हैं कि हम सफल हों. तीनों देश बुनियादी ढांचे पर भारी-भरकम निवेश करेंगे और बिल्कुल तैयार रहेंगे. और मैं जानता हूं कि तब तक सऊदी अरब में ख़ास स्टेडियम बन चुके होंगे."

सऊदी अरब को पहले ही सालाना होने वाली फॉर्मुला 1 रेस और एशियन विंटर गेम्स 2029 सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेज़बानी मिल चुकी है.

अल-नस्र क्लब का इतिहास क्या है?

रोनाल्डो

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इमेज कैप्शन, अल-नस्र से औपचारिक तौर पर जुड़े रोनाल्डो, भव्य स्वागत

रोनाल्डो ने जिस अल-नस्र से नाता जोड़ा है उस क्लब की स्थापना सऊदी अरब की राजधानी रियाद में साल 1955 में हुई थी. ये क्लब देश के सदी प्रोफ़ेशनल लीग़ (एसपीएल) में खेलता है, जिसमें कुल 18 टीमें हैं.

लीग में सबसे अधिक गोल करने वाले माजिद अब्दुल्लाह ने भी अल-नस्र के लिए खेलते हुए हर मैच में एक के औसत से कुल 189 गोल दागे हैं. अल-नस्र एसपीएल की दूसरी सबसे सफल टीम है, जिसने अभी तक 9 बार खिताब जीता है. आख़िरी बार अल-नस्र ने साल 2018-2019 में ये खिताब जीता था. केवल अल-हिलाल क्लब ही सबसे अधिक खिताब जीतने के मामले में अल-नस्र से आगे है.

अल-नस्र के मौजूदा कोच रूडी गार्शिया हैं. क्लब में कैमरून के वर्ल्ड कप हीरो रहे विनसेंट अबुबकर और ब्राज़ील के मिडफ़ील्डर रह चुके लुइज़ गस्तावो भी शामिल हैं.

गोल डॉट कॉम की ख़बर के अनुसार दिवंगत सऊदी प्रिंस अब्दुल रहमान बिन सऊद अल सऊद ने सन् 1960 में क्लब की कमान संभाली थी. उन्होंने अल-नस्र को देश के सर्वश्रेष्ठ क्लब में शामिल करवाने में अहम भूमिका निभाई.

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माना जाता है कि साल 2004 में उनके निधन के बाद भी क्लब को सऊदी के शाही परिवार से वित्तीय सहायता मिलना जारी रहा और क्लब बड़े खिलाड़ियों को शामिल कर पाया.

क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अल-नस्र के साथ साल 2025 तक के लिए डील की है. अल-नस्र क्लब इसके लिए रोनाल्डो को हर साल करीब 177 मिलियन पाउंड यानी करीब 1773 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा.

बीते साल ही सऊदी की दूसरी टीम अल-हिलाल ने भी रोनाल्डो को ऑफ़र दिया था. लेकिन उस समय रोनाल्डो ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया था और कहा था कि वो मैंचेस्टर यूनाइटेड के साथ खुश हैं.

हालांकि, मैंचेस्टर यूनाइटेड के साथ बात तब बिगड़ी जब बीते साल नवंबर में एक इंटरव्यू के दौरान रोनाल्डो ने क्लब के मैनेजर एरिक टेन से नाखुशी जताई. इसके बाद मैंचेस्टर यूनाइटेड ने उन्हें रिलीज़ कर दिया था.

कॉपी: प्रियंका झा

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