पेले: जैसा मैंने फ़ुटबॉल लीजेंड को नज़दीक से देखा

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- Author, फ़र्नेंडो डुआर्टे
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
आख़िरी बार मैंने पेले को सेंट्रल लंदन के एक सबवे काउंटर के पीछे देखा था तब वे सैंडविच में सलाद भरने की कोशिश कर रहे थे.
यह मार्च, 2015 की बात है. फ़ुटबॉल की दुनिया के लीजेंड कोई आर्थिक तंगी में नहीं थे बल्कि वे अमेरिकी फ़ास्ट फ़ूड कंपनी की पब्लिसिटी से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे. यह फ़ुटबॉल करियर के बाद उनके कई व्यापारिक अनुबंधों में से एक था.
तब तक मैं उनसे कई बार मिल चुका था. यही वजह थी कि पत्रकारों की भीड़ में होने के बाद भी वे मेरी ओर देखने पर मुस्कुराए. मैं भाग्यशाली था कि उनसे वन-टू-वन इंटरव्यू करने का मौका भी मिला. इस दोपहर की सबसे सुखद याद यही है कि 74 साल की उम्र में पेले पूरी तरह फ़िट और स्वस्थ्य थे.
मैंने उनसे कहा, "किंग, आपने सभी को चिंता में डाल दिया था." उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, "आप भूल गए कि मेरा जन्म ट्रेस कोराकोस (पुर्तगाली में तीन हृदय) शहर में हुआ था. तीन हृदय वाले किसी शख़्स को दफ़नाना मुश्किल है."
दरअसल, इससे एक साल पहले, ज्यूरिख़ फ़ीफ़ा अवॉर्ड समारोह में जब वे आए तो काफ़ी थके हुए और लाचार दिखे थे. दूसरे ब्राज़ीली पत्रकारों की तरह ही मैं भी चिंतित हुआ कि शायद वे लंबे समय तक नहीं रहें.
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मालूम हुआ कि पेले किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. उनकी मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई थीं क्योंकि 1970 के दशक में उन्होंने एक किडनी खो दिया था.
उनकी किडनी लगातार 21 साल तक विपक्षी टीम के खिलाड़ियों की ओर से लगातार चोट पहुंचाने के चलते क्षतिग्रस्त हो गयी थी.
इसके बाद जब भी हमारी मुलाकात हुई, मैं अगले पूरे दिन उनके बारे में सोचता था. यह एक तरह से उनको सक्रिय देखने भर से ख़ुश होने का भाव था.
अधिकांश फ़ुटबॉल फ़ैंस, ख़ासकर ब्राज़ीली फ़ुटबॉल फ़ैंस के लिए पेले यानी एडसन एरेंटस डो नासिमेंटो किसी महामानव से कम नहीं थे. फ़ुटबॉल के सबसे महानतम खिलाड़ी.
जैसे कि अमेरिकी सिंगर जॉन लेनन ने एक बार कहा था चक बेरी के योगदान को देखते हुए रॉक एंड रोल म्यूज़िक का नाम चक बेरी होना चाहिए, उसी तरह से फ़ुटबॉल को पेले भी कहा जा सकता है.

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एक खिलाड़ी के तौर पर तीन-तीन बार वर्ल्ड कप जीतने का करिश्मा दिखाने वाले वे इकलौते खिलाड़ी हैं. ब्राज़ील जब पहली बार 1958 में फ़ीफ़ा चैंपियन बनी थी तब उस टीम में महज़ 17 साल की उम्र में पेले शामिल थे.
इसके 12 साल बाद, मेक्सिको में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम में भी वो शामिल थे. इस टीम को अभी भी वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम कहा जाता है. इस टूर्नामेंट में पेले के प्रदर्शन की सबसे बेहतरीन तारीफ़ इटली की टीम के डिफ़ेंडर टारसिसो बर्गनिक ने की थी, जिन पर फ़ाइनल मुक़ाबले में पेले को मार्क करने की ज़िम्मेदारी थी.
उन्होंने कहा, "मैच से पहले मैंने ख़ुद को कहा था कि यह भी आम आदमी की तरह हड्डियों और त्वचा से बना होगा, लेकिन मैं ग़लत था."
सबसे मशहूर ब्राज़ीली
पेले ने ख़िताबी मुक़ाबले में एक गोल दागा और दो गोल करने में मदद की. उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन के चलते ही ना केवल ब्राज़ील बल्कि पेले ने भी अपना तीसरा वर्ल्ड कप जीता. इस मैच में उनका गोल, उनके करियर के बाक़ी 1200 से ज़्यादा गोलों से ज़्यादा अहम साबित हुआ था.
पेले ने इस खेल पर ऐसी छाप छोड़ी जो कि खेल से भी आगे निकलती नज़र आई. यही वजह कि अमेरिकी कलाकार एंडी वारहोल ने शोहरत और प्रसिद्धि को लेकर दिए गए अपने बयान को संशोधित करते हुए भविष्यवाणी की थी, "पेले उन चुनिंदा लोगों में हैं, जो मेरी थ्योरी के उलट हैं- 15 मिनट की प्रसिद्धि की जगह वे 15 शताब्दी तक प्रसिद्ध रहेंगे."
इंटरनेशनल खिलाड़ी के तौर पर पेले, 1973 में मेरे जन्म से पहले ही रिटायर हो चुके थे. लेकिन ब्राज़ील में पलने-बढ़ने के दौरान, आपको उनकी कामयाबी की कहानी बार-बार सुनने को ना मिले, यह असंभव है.

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ब्राज़ील को दुनिया की सबसे कामयाब फ़ुटबॉल टीम बनाने के अलावा काले खिलाड़ी के तौर पर पेले का योगदान कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण रहा- गुलामी प्रथा के शर्मनाक अतीत और भेदभाव की आज तक चल रही विरासत के बीच वे उस स्तर तक पहुंचने में कामयाब रहे जहां उन्हें राष्ट्रीय संपत्ति का दर्जा हासिल हुआ.
वे पहले भी और आज भी, सबसे मशहूर ब्राज़ीली शख़्सियत है. जहां-जहां मैं गया हूं- न्यूयार्क से लेकर अफ़्रीका तक- जहां भी मैंने अपने देश का नाम बताया है, लोगों ने सबसे पहले पेले का नाम लिया है.
हालांकि पेले की आलोचना करने वाले भी मौजूद हैं. इन लोगों का मानना है कि पेले को 1964 से 1985 तक के दमनकारी सैन्य शासन के ख़िलाफ़ बोलना चाहिए था, इन शासकों ने फ़ुटबॉल की राष्ट्रीय टीम की कामयाबी को तिजोरी की भांति भुनाया भी. इन शासकों के दमन के ख़िलाफ़ पेले ही नहीं उनके साथी खिलाड़ी भी चुप रहे, लेकिन किसी दूसरे में पेले जैसा करिश्मा नहीं था.
2021 की नेटफ़्लिक्स डॉक्यूमेंट्री में पेले ने लगभग खेद जताते हुए कहा है, "सैन्य शासन के दिनों में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में फ़ुटबॉलर भी कोई बदलाव नहीं ला सके. अगर मैं कहूं कि मुझे इन उल्लंघनों की जानकारी नहीं थी, तो मैं झूठ बोल रहा हूं. हालांकि हमें ठीक-ठीक नहीं मालूम था कि क्या हो रहा था."
बाद के सालों में पेले ने दावा किया था कि सैन्य शासन के ख़िलाफ़ ही उन्होंने 1974 के वर्ल्ड कप में खेलने के लिए संन्यास के बाद वापसी नहीं की थी.

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टीवी पर कमेंट्री, राजनीति और विज्ञापन
ब्राज़ीली नस्लवाद पर पेले ना तो खेलते वक्त बोले और ना ही संन्यास लेने के बाद बोले और ना ही इस मामले को लेकर सक्रियता दिखायी.
2014 में उन्हें काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा जब ब्राज़ीली चैंपियनशिप के एक मुक़ाबले में नस्लवादी घटना को उन्होंने यह कह कर सामान्य बताने की कोशिश की कि खेलने के दिनों में उन्होंने जिन मैचों में हिस्सा लिया, उसे रोकने के लिए पर्याप्त नस्लवादी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा था.
वैसे पेले की निजी ज़िंदगी में विवादों का साया रहा. उनके बेटे एडसन को ड्रग्स की तस्करी के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. उन्होंने 1960 के दशक में हुए एक अफ़ेयर से पैदा हुई बेटी सांद्रा को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
नेटफ़्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री में पेले ने स्वीकार किया है, "इतने अफ़ेयर रहे कि मैं नहीं जानता हूं कि मेरे कितने बच्चे हैं." पेले ने 1977 में अमेरिका में पहली बार प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल लीग में हिस्सा लिया था, लेकिन यह अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा और उन्होंने खेल को अलविदा कह दिया.
इसके बाद वे खेल प्रबंधन में नहीं गए. हालंकि टीवी एक्सपर्ट के तौर पर वे खेल से जुड़े रहे. 1994 में जब लॉस एंजलिस के रोज़ बाउल स्टेडियम में ब्राज़ील ने वर्ल्ड कप जीता तो हेडसेट लगाए हुए प्रेस बॉक्स में पेले उछलने लगे थे, उनकी इस छवि को यादकर मेरी आंखों में आज भी आंसू आ जाते हैं.

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वे टीवी धारावाहिकों में भी दिखे और 'एस्केप टू विक्ट्री' जैसी फ़िल्मों में भी नज़र आए. इसके अलावा 1995 से 1998 के बीच वे ब्राज़ील के खेल मंत्री भी रहे.
पेले अनगनित नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों के उत्पादों का विज्ञापन करते नज़र आए. हालांकि इसके लिए उनका मजाक़ भी उड़ाया जाता रहा. जैसे कि 2000 के दशक में उन्होंने इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन के निदान संबंधी दवा का भी विज्ञापन किया था. आने वाले दिनों में इसे बहादुरी भरा क़दम माना गया.
इसके अलावा नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया को बयान देने के लिए भी वो उपलब्ध रहे. उहोंने कभी नाप-तौल कर बोलने की ज़हमत नहीं उठायी, भले ही उनकी बातों से कोई दूसरा प्रभावित क्यों ना हो जाए.
ब्राज़ील के लिए वर्ल्ड कप जीतने वाले फ़ॉरवर्ड रोमारियो ने एक बार कहा था, "ज़ुबान बंद हो तो पेले एक कवि हैं."
पेले के कई अनुमान ग़लत
पेले ने कई भविष्यवाणियां भी कीं जो ग़लत साबित हुई हैं. पेले ने 1970 के दशक में भविष्यवाणी की थी कि 21वीं सदी से पहले कोई अफ़्रीकी टीम वर्ल्ड कप जीतेगी. जबकि हमलोगों ने देखा कि 2022 के वर्ल्ड कप में पहली बार कोई अफ़्रीकी टीम (मोरक्को) सेमीफ़ाइनल में पहुंची.
उन्होंने 1994 में कोलंबिया के वर्ल्ड कप जीतने का अनुमान लगाया था. यह अनुमान उन्होंने तब लगाया जब कोलंबिया ने वर्ल्ड कप में क्वालीफ़ाई करने के लिए अर्जेंटीना को हरा दिया था. लेकिन कोलंबिया पहले ही राउंड में बाहर हो गई थी.
1998 में उन्होंने फ़्रांस और 2002 में अर्जेंटीना के जीतने का अनुमान लगाया था. दोनों टीमें ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थीं. 2002 में उन्होंने अपनी टीम का नाम नहीं लिया था, जो बाद में चैंपियन बनी.
ब्राज़ील के पत्रकारों के बीच पेले के इन अनुमानों को 'किस ऑफ़ डेथ' कहा जाने लगा और इसको लेकर ख़ूब मजाक़ भी बना.
लेकिन 2006 में बर्लिन में उन्होंने मुझसे कहा, "इस खेल को लेकर मेरा इतिहास मुझे अपने मन की बातों को कहने का अधिकार देता है."
उस दिन मैं होटल में उनके लग्ज़री सुइट में था, जहां वे अपने स्टॉफ़ के साथ इंग्लैंड और इक्वाडोर के बीच राउंड-16 मैच का देख रहे थे.

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पेले ने मेसी के बारे में क्या कहा था
उस दोपहर, उन्होंने हर किसी के बारे में बोलना शुरू कर दिया. उनके मुताबिक़ डियोगो मैराडोना सहित तमाम लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और यह सही नहीं है. उन्होंने जो भी कहा उन बातों को अगर लिखा जाता तो फ़ुटबॉल की दुनिया में हंगामा मच जाता, लेकिन उन्होंने स्पष्टता से कह दिया था, "आप दोस्त के तौर पर यहां मौजूद हैं, पत्रकार के तौर पर नहीं."
मैंने भी उनकी बातों का ख़्याल रखा. जब उस टूर्नामेंट के क्वार्टरफ़ाइनल में ब्राज़ील फ़्रांस से हार गया तो पेले ने केवल मुझे और मेरे अख़बार को इंटरव्यू दिया था.
इसके बाद फ़ुटबॉल की दुनिया में लियोनेल मेसी आए. लोग यह दावा करने लगे कि पेले की जगह मेसी दुनिया का सबसे बेहतरीन फ़ुटबॉलर साबित होंगे. लेकिन पेले की राय इससे उलट रही.
लंदन में उन्होंने कहा था, "मैं हेडर से गोल कर सकता था. दोनों पैर से किक लगा सकता था. जबकि मेसी अपने बाएं पैर का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं और उन्हें एक हज़ार गोल करने की भी ज़रूरत है."
काश, तब मैंने उन्हें कहा होता कि अर्जेंटीना के पास तीन वर्ल्ड कप भी नहीं है, इससे पेले निश्चित तौर पर ज़ोर से हंसते. मैं उनकी हंसी की कमी महसूस करूंगा.
हालांकि 2022 का वर्ल्ड कप जीतने के बाद अर्जेंटीना की झोली में तीन वर्ल्ड कप हो चुके हैं.
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