फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप फ़ाइनल अर्जेंटीना बनाम फ्रांस: क्या लियोनेल मेसी कर पाएंगे डिएगो मैराडोना की बराबरी?

लियोनेल मेसी

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इमेज कैप्शन, इस वर्ल्ड कप में मेसी ने छह मैच खेले हैं और इनमें से चार में वे मैन ऑफ़ द मैच चुने गए हैं
    • Author, गैरी लिनेकर
    • पदनाम, पूर्व फुटबॉलर, बीबीसी हिंदी के लिए

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप फुटबॉल का फ़ाइनल अर्जेंटीना और फ्रांस के बीच खेला जाएगा. इस मैच का नतीजा चाहे जो निकले, लेकिन वर्ल्ड कप फुटबॉल में लियोनेल मेसी का सफ़र यहीं थम जाएगा. मुझे मालूम है कि उनके बिना फुटबॉल का आनंद कुछ कम हो जाएगा.

रविवार को खेले जाने वाले फ़ाइनल मुक़ाबले में जो भी हो, लेकिन अब तक मेसी ने अपने प्रदर्शन से दुनियाभर के फुटबॉल प्रेमियों के दिल में अपनी जगह मज़बूती से जमा ली है.

क्रोएशिया के ख़िलाफ़ जीत के बाद एक सुंदर पल तब आया जब एक रिपोर्टर ने मेसी से कहा कि आपने हर किसी के जीवन पर प्रभाव छोड़ा है, यह फ्रांस के ख़िलाफ़ मुक़ाबले और जीतने की सूरत में पहला वर्ल्ड कप जीतने से ज़्यादा अहम है.

उस रिपोर्टर ने बिल्कुल ठीक कहा था.

लोग ये भी कहते रहते हैं कि मैं मेसी को लेकर कितनी बातें करता रहता हूं लेकिन इसके लिए मुझे कोई माफ़ी नहीं मांगनी है क्योंकि मेसी को खेलते हुए देखना मेरे लिए लिए बीते दो दशकों से आनंद भरा रहा है.

35 साल के मेसी अब लंबे समय तक नहीं खेल पाएंगे ऐसे में हमें उनके खेल के हर पल का आनंद उठाना चाहिए.

इस वर्ल्ड कप में मेसी ने छह मैच खेले हैं और इनमें से चार में वे मैन ऑफ़ द मैच चुने गए हैं. उन्होंने अपनी टीम की ओर से पांच गोल किए हैं और तीन गोल करने में मदद की है

गोल और गोल के लिए मदद में बेमिसाल

मेसी टूर्नामेंट में सबसे अलग खिलाड़ी के तौर पर नज़र आए हैं. खेल के मैदान पर कई बार ऐसा दिखा है कि उन्हें तीन चार खिलाड़ियों ने घेर रखा है, ऐसा लगता है कि वे इनसे निकल पाएंगे लेकिन वे हर बार निकल आते हैं.

मैं ये कई बार कह चुका हूं कि वे अब तक के सबसे महानतम खिलाड़ी हैं. यह उनके गोलों की संख्या के चलते मैं नहीं कहता बल्कि उनके विज़न, उनकी जागरुकता और उनके निर्णय लेने की क्षमता के चलते कहता हूं. ऐसा लगता है कि वे खेल नहीं रहे हैं बल्कि वे खेल को ऊपर से देख रहे हैं.

इस वर्ल्ड कप में जब भी गेंद उनके पास गई है, लोगों की नज़रें उन पर जम जाती हैं. लोगों को उनके जादू का इंतज़ार होता है और हर बार वे उम्मीदों पर खरे उतरते हैं.

उनको खेलते हुए देखते वक्त तो कई बार सांसें अटक जाती हैं, जैसा कि शानदार ढंग से ड्रिब्लिंग करते हुए वे नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ वे गोल करने के लिए सटीक पास देते हैं या फिर मेक्सिको के ख़िलाफ़ खूबसूरती से गोल करते हैं, इस गोल से ही अर्जेंटीना की किस्मत वर्ल्ड कप 2022 में बदली है.

सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में उन्होंने जुलियन अल्वारेज़ को जिस तरह से गोल करने के लिए पास दिया था, वह भी अविश्वसनीय ही था. पलक झपकने जितने समय में मेसी दुनिया की सबसे मज़बूत रक्षा पंक्ति को ना केवल भेद देते हैं बल्कि ये भी सोच लेते हैं कि अब आगे क्या करना है और गेंद अल्वारेज़ को बढ़ा देते हैं.

मेसी

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इमेज कैप्शन, गोल बनाने में भी माहिर हैं मेसी

मेसी का एक्स फैक्टर

मेसी ने पिछले कई सालों में यह साबित किया है कि वे एक अविश्वसनीय खिलाड़ी हैं. अगर आपने केवल उन्हें केवल इसी वर्ल्ड कप में खेलते देखा है तो भी आपको यक़ीन हो सकता है कि वे एक विशिष्ट खिलाड़ी हैं और आधुनिक दौर में कोई उनके आसपास नहीं ठहरता.

जब एक खिलाड़ी की दूसरे से तुलना करनी होती है तो कई बार हमलोग गोल की संख्या से ये तुलना करने लग जाते हैं. लेकिन मेरे लिए महान खिलाड़ी का मतलब यह है कि वे मुझसे बेहतर खिलाड़ी हैं. अगर इस आधार पर कहूं तो मैं खुद को डिएगो मैराडोना से थोड़ा बेहतर मानता हूं, हालांकि किसी को भी ये बेतूका लग सकता है.

इन दिनों मेसी बनाम क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर भी यही चर्चा देखने को मिल रही है. गोल करने के मामले में दोनों आसपास ही हैं लेकिन मैं मानता हूं कि मेसी में कहीं ज़्यादा एक्स फैक्टर है.

रोनाल्डो कभी भी शानदार गोल कर सकते हैं, किलियन एमबापे अपनी तूफ़ानी गति से ये कारनामा कर सकते हैं लेकिन जो मेसी कर सकते हैं वह इन दोनों के वश में नहीं है.

मेसी पलकों के भीतर चार-पांच डिफेंडरों को ना केवल छका सकते हैं बल्कि पांच ग़ज़ की दूरी से गोल करने के लिए किसी को सटीक पास दे सकते हैं और कोई ना हुआ तो खुद ही गेंद को अंजाम तक पहुंचा सकते हैं.

वे अपने पूरे करियर में ऐसा करते आए हैं और इस टूर्नामेंट में भी ऐसा ही किया है. हालांकि कुछ विश्लेषकों ने उनके फॉर्म को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी क्योंकि पेरिस सेंट जर्मेन के लिए खेलते हुए वे संघर्ष कर रहे थे. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं था.

मुझे मेसी का खेल देखना पसंद है लिहाज़ा मैंने पीएसजी के सभी मुक़ाबले देखे हैं और वे इस सीज़न शानदार ढंग से खेल रहे थे.

ये ज़रूर है कि उनमें अब पहले वाली तेज़ी नहीं रही लेकिन अभी भी उनका नैसर्गिक अंदाज़ कायम है, इतने लंबे समय से शीर्ष पर रहने के बाद भी खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है.

मेसी

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इमेज कैप्शन, मेसी ने साबित किया है कि वे अविश्वसनीय खिलाड़ी हैं

अर्जेंटीना 1986 में बना था चैंपियन

बतौर खिलाड़ी मेसी की एक ख़ासियत पर आप सबकी नज़र गई होगी. मैदान में जब वे एक्शन में नहीं हों, तब उनको देखिए. हो सकता है आप अचरज में पड़ जाएं कि वे क्या कर रहे हैं - ऐसा लगता है कि वे खेल का आकलन कर रहे हैं, या फिर हर पॉजिशन पर खेलने वाले खिलाड़ी को तौल रहे हैं या फिर वे उन पलों में आराम कर रहे हैं?

वे ऐसा हमेशा करते दिखाई देते हैं लेकिन बार्सिलोना की ओर से खेलते हुए जब वे ज़्यादा आक्रामक थे, तब से वे ऐसा ज़्यादा करते नज़र आए हैं. मुझे लगता है कि अर्जेंटीना की टीम ने मेसी के इस अंदाज़ के साथ तालमेल बिठा लिया है और इसी वजह से यह टीम 1986 की वर्ल्ड चैंपियन की तरह नज़र आती है.

1986 की वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम में ऑस्कर रगेरी और जोसे लुई ब्राउज जैसे डिफेंडर थे. मिडफ़ील्ड में जूलियो ओलार्टिकोहेया और जॉर्ज बुरुचागा थे, इन सबके साथ जॉर्ज वालडानो भी थे. मैराडोना तो थे ही.

2022 की अर्जेंटीना में दूसरी जगहों पर भले विश्वस्तरीय खिलाड़ी नहीं हों लेकिन टीम पूरी तरह संगठित दिख रही है और अल्वारेज़ जैसा फॉरवर्ड खिलाड़ी भी उभर कर सामने आया है.

बावजूद इसके दोनों टीमों में जो समानता दिख रही है इसकी वजह हैं मेसी. मेसी अपनी टीम के लिए वही कमाल दिखा सकते हैं जो मैराडोना ने 1986 में दिखाया था.

मेसी, मैराडोना

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मेसी और मैराडोना की तुलना

ऑल टाइम ग्रेटेस्ट फुटबॉलर पर चर्चा करना हमेशा मज़ेदार होता है क्योंकि हर किसी की अपनी अपनी राय होती है, लेकिन आपने जिन खिलाड़ियों को खेलते देखा होता है, उनका असर ज़्यादा होता है.

मैं ऑलटाइम ग्रेटेस्ट खिलाड़ियों में पेले की गिनती नहीं कर पाता हूं क्योंकि मैंने उन्हें बहुत खेलते हुए नहीं देखा था. हालांकि 1970 के वर्ल्ड कप फुटबॉल में जब उन्होंने अपनी टीम को चैंपियन बनाया था तब मैं नौ साल का हो चुका था.

मेरे लिए तो दो ही खिलाड़ी इस सूची में हैं, मैराडोना और मेसी. दोनों एक ही देश के हैं, दोनों बाएं पांव से खेलने वाले फुटबॉलर हैं और दोनों बहुत लंबे खिलाड़ी नहीं रहे हैं. कम लंबाई की वजह से ही दोनों खेल के मैदान में काफ़ी कुछ दिलचस्प अंदाज़ में करते रहे हैं.

मैराडोना

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बावजूद इसके दो अलग अलग दौर के खिलाड़ियों की तुलना नहीं हो सकती, क्योंकि इस दौरान खेल भी काफ़ी बदल चुका है. मैराडोना लगातार गेंद को किक करते रहते थे.

जब मैं बार्सिलोना की ओर से खेलता था तब मुझे 1987 में फुटबॉल लीग के शताब्दी समारोह पर उनके साथ, रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड टीम की ओर से खेलने का मौका मिला. जब वे हमारे साथ ड्रेसिंग रूम में आए तो हम सबको यक़ीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि हम सब पर उनका असर था.

मेसी

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इमेज कैप्शन, मैराडोना और मेसी. दोनों एक ही देश के हैं, दोनों बाएं पांव से खेलने वाले फुटबॉलर हैं

जब हमलोग वॉर्म अप मैच के लिए खेल रहे थे और मैराडोना को गेंद मिली. उन्होंने हाफ़लाइन के पास गेंद को 50 ग़ज़ ऊपर हवा में उछाल दिया, और जब गेंद नीचे आयी तो उन्होंने फिर से गेंद संभाल ली. ऐसा उन्होंने कम से कम 12 बार किया था.

मैं बार्सिलोना के दूसरे खिलाड़ियों से इस अंदाज़ पर बात करता रहा और जब हम लोग स्पेन लौटे तो हम सबने मिलकर कोशिश की थी, हम में से जो सबसे बेहतरीन धावक था वह केवल तीन बार इसे कर पाया था.

मेसी की तरह ही मैराडोना को खेलते हुए देखना किसी अचरज में डूब जाना होता था. दोनों में ढेरों समानता दिखती है लेकिन हर किसी को याद रखना चाहिए कि मैराडोना अपना सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल सात साल तक ही खेल पाए, क्योंकि मैदान से बाहर भी उनके मसले थे.

बतौर फुटबॉलर लंबे समय तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना ही वह पैमाना है जो बताता है कि इन दोनों में बेहतर कौन है. क्लब फुटबॉल और इंटरनेशनल फुटबॉल में जितनी कामयाबी मेसी ने हासिल की है, उनके आसपास कोई नहीं है.

मेरे ख़याल से वे क़तर में इसलिए भी शानदार ढंग से खेल रहे हैं क्योंकि वे अर्जेंटीना के लिए 2021 का कोपा अमेरिका कप जीत चुके हैं, लिहाज़ा बहुत दबाव महसूस नहीं कर रहे होंगे. लेकिन इसके बाद भी वे वर्ल्ड कप जीतना चाहेंगे- मेरे ख़याल में इससे बेहतर अंदाज़ में टूर्नामेंट का समापन नहीं हो सकता.

(गैरी लिनेकर ने क़तर, दोहा में बीबीसी स्पोर्ट्स संवाददाता क्रिस बेवन से बातचीत में जैसा बताया)

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