महिला हॉकी विश्व कप 2022: सविता पूनिया की मुस्तैदी भी काम ना आई, महिला हॉकी में भारत का सपना टूटा

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
भारतीय महिला हॉकी टीम एफ़आईएच महिला विश्व कप हॉकी चैंपियनशिप में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी.
स्पेन के हाथों क्रॉसओवर मैच में इकलौते गोल से मात खाने के कारण उसका अभियान थम गया. वह पिछले विश्व कप का प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी और इस बार क्वॉर्टर फ़ाइनल में स्थान नहीं बना सकी.
भारतीय कप्तान और गोल कीपर सविता पूनिया ने पूरे मैच में गोल बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया. लेकिन खेल समाप्ति से चार मिनट पहले वह गोल बचाने में असफल हो गईं और यह भारतीय सफ़र को थामने के लिए काफ़ी साबित हुआ.
स्पेन की क्लारा सर्किल में गेंद लेकर घुसीं और उन्होंने गोल पर निशाना साधा, गेंद सविता पूनिया के पैड से रिबाउंड हुई, जिस पर सेगू मार्टा ने कब्ज़ा बनाकर गोल भेद दिया. स्पेन का अब क्वॉर्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मुक़ाबला होगा. वहीं टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी भारतीय टीम 11 जुलाई को नौवें से 16वें स्थान के लिए कनाडा से भिड़ेगी.
भारतीय पुरुष हॉकी में जिस तरह श्रीजेश को अभेद्य दीवार माना जाता है. वही छवि महिला हॉकी में सविता पूनिया की है. हालांकि वह पूल मैचों में अपनी छवि के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकीं थीं.

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लेकिन आज वह अपनी भूमिका में एकदम से मुस्तैद दिखीं. दूसरे हाफ़ में स्पेन के हमलावर रुख़ अपनाने पर कम से चार ऐसे मौक़े आए, जब यह लगा कि स्पेन गोल कर सकता था, लेकिन सविता पूनिया ने शानदार बचाव से स्पेन को बढ़त बनाने से रोके रखा. पर आख़िर में स्पेन इस दीवार को गच्चा देने में सफल हो ही गया.
भारतीय डिफेंडरों के आख़िरी दो क्वॉर्टर ढंग से बचाव नहीं कर पाने की वजह से सविता के प्रयास भी टीम को संकट से बचाने वाले साबित नहीं हो सके.
असल में पहले दो क्वॉर्टर में दबकर खेलने वाली स्पेन की टीम आख़िरी दो क्वॉर्टर में एकदम से बदली हुई टीम नज़र आई. उसने ताबड़-तोड़ हमले बनाकर भारतीय डिफेंस को छितराकर रख दिया. असल में किसी भी डिफेंस की सही परीक्षा मुश्किल में ही होती है और इस इम्तिहान में भारतीय डिफ़ेंडर गुरजीत कौर और दीप ग्रेस एक्का सफल नहीं हो सकीं.
आख़िरी क्वॉर्टर में स्पेन के हमलों में तेज़ी आने से निकी प्रधान और सलीमा टेटे भी समय पर बचाव के लिए नहीं आ सकीं. दूसरे हाफ़ लाइन के बचाव में व्यस्त होने से भारतीय हमलों में एकदम से कमी आ गई और इसका भी फ़ायदा स्पेन को मिला. सही मायनों में भारतीय खिलाड़ियों की रिकवरी पर काम करने की ज़रूरत है.

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वंदना की असफलता बनी हार का कारण
भारतीय हमलों की जान वंदना कटारिया को माना जाता है. भारत ने शुरुआत में जिस तरह से हमलावर रुख़ अपनाकर खेल पर पकड़ बनाई थी. उस दौरान वंदना को कम से कम दो गोल जमाने के मौक़े मिले. पर वह दोनों ही मौक़ों पर गोल जमाने के लिए अच्छी स्थिति में होने पर भी स्पेन की गोलची गार्सिया मेलानले को गच्चा देने में कामयाब नहीं हो सकीं. उन्होंने यदि शुरुआत में गोल जमा दिए होते तो इस मैच की तस्वीर ही कुछ अलग होती.
भारत पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलने के मामले में एक बार फिर असफल साबित हुआ. हालांकि स्पेन की डिफेंडरों ने भारतीय हमलावरों को टैकिल करने में ज्यादा होशियारी का परिचय दिया और इस कारण भारत को चार ही पेनल्टी कॉर्नर मिल सके. पर भारतीय विशेषज्ञ ड्रेग फ्लिकर गुरजीत कौर इस चैंपियनशिप में सीधी शॉट से गोल भेदने की ग़लती लगातार दोहराती रहीं. उन्होंने यदि इन-डायरेक्ट ढंग से पेनल्टी कॉर्नर लेने का प्रयास किया होता तो कहीं बेहतर परिणाम मिल सकता था.
आख़िरी क्वॉर्टर के तीसरे मिनट में तो लगा कि अब भारत गोल खाने से शायद ही बचे. इस मौक़े पर इगलेशियस बेलेन डिफेंस में दरार बनाकर ठीक गोल के सामने पहुँच गई और उनके सामने सिर्फ़ सविता थीं. लेकिन वह सविता को गच्चा देने में सफल नहीं हो सकीं.
तीसरे क्वॉर्टर से स्पेन की टीम एकदम से बदली हुई नज़र आई और उन्हेंने भारत की बराबरी से हमले बनाने शुरू कर दिए.
इस दवाब में भारतीय खिलाड़ियों पर थोड़ी हड़बड़ाहट दिखने लगी. इस कारण हमारी खिलाड़ी हमले बनाते समय ग़लत पास देकर खुद ही कुछ मौक़ों पर उनकी जान निकालने वाली साबित हुईं. पर हमलों को फिनिश करने के मामले में उनकी भी स्थिति भारत वाली ही रही.

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हाफ़ टाइम तक बनी रही गोलरहित बराबरी
भारतीय टीम ने पहले दो क्वॉर्टर में ज़रूर हमलावर रुख अपनाकर खेल पर नियंत्रण तो बनाए रखा. लेकिन इस दबदबे को वह गोल की शक्ल देने में सफल नहीं हो सके. वह सर्किल में पहुँचने के बाद हमलों को फिनिश देने में इस दौरान नाकामयाब दिखे. वहीं पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में नहीं बदल पाने की कमज़ोरी में पहले हाफ में भी कोई सुधार नज़र नहीं आया. इस मैच से पहले भारतीय टीम तीन मैचों में 27 पेनल्टी कॉर्नरों में से मात्र तीन को ही गोल में बदल सकी थी.
इस हाफ़ के दौरान भले ही अधिकांश समय खेल पर भारत दबदबा रहा. लेकिन स्पेन ने जवाबी हमले बनाकर इस दौरान कम से कम दो बार भारतीय गोल को खतरे में डाला. पर आज भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया मुस्तैद नजर आई. स्पेन की ओर से तीसरे पेनल्टी कॉर्नर पर तो तीन बार गोल पर निशाने साधे गए पर वो बचाव करने में कामयाब रहीं.
भारत ने खेल की शुरुआत आक्रामक ढंग से की और पहले क्वॉर्टर के ज्यादातर समय वह गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रही. लेकिन पूल मैचों की तरह इस क्वार्टर में भी हमलों को सही फिनिश नहीं दे पाने की कमी साफ दिखी. वंदना कटारिया की अगुआई में कम से कम दो बार भारतीय खिलाड़ी खाता खोलने की स्थिति में पहुंची पर मौकों का फायदा नहीं उठाया जा सका.

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भारत और स्पेन की एफआईएच रैंकिंग आगे-पीछे है. इस समय भारत छठी और स्पेन सातवीं रैंकिंग पर है. इस कारण दोनों टीमों के बीच पिछले कुछ मुकाबलों में बराबरी रही थी. इस साल फ़रवरी में भुवनेश्वर में एफआईएच प्रो लीग मुकाबलों में पहले मैच में भारत ने 2-1 से तो दूसरे में स्पेन ने 4-3 से विजय प्राप्त की थी.
वहीं भारत ने 2019 में स्पेन का दौरा करके चार टेस्ट की सीरीज खेली थी, जिसमें दोनों टीमों ने एक-एक जीत प्राप्त की और दो मैच ड्रा रहे थे. वैसे ओवरऑल भारतीय टीम बेहतर स्थिति में है. अब तक खेले गए 17 मुक़ाबलों में भारत ने सात और स्पेन ने पाँच मुक़ाबले जीते हैं और पांच ड्रॉ रहे हैं. पर स्पेन घर में खेलने का लाभ उठाकर इस मैच को अपने पक्ष में बदलने में सफल रहा.
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