50-100 जुटाने पड़े महिला आइस हॉकी टीम को

इमेज स्रोत, harjinder jindi twitter
- Author, सुमीरन प्रीत कौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
सरकारी मदद पाए बिना भी भारतीय महिला आइस हॉकी टीम अब अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट मे भाग लेने लगी है. उन्होंने ये उपलब्धि क्राउड फ़ंडिंग की मदद से पाई है.
थाईलैंड में चल रहे 'चैलेंज कप ऑफ़ एशिया' में भाग लेने के लिए इन्होंने लोगों से मदद ली और इतिहास रच दिया.
सरकार की तरफ़ से इनकी टीम को कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलने के बावजूद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ने का फ़ैसला किया.
इंडियन आइस हॉकी एसोसिएशन के डायरेक्टर अक्षय कुमार का कहना है कि उन्होंने क्राउड फ़ंडिंग के सहारे ये मंज़िल हासिल की है.
उन्होंने बताया, "हमने एक इंटरनेट कैंम्पेन के ज़रिए पैसा इकट्ठा किया. किसी ने पचास रुपए दिए किसी ने सौ रुपये. लोगों ने सामने आ कर मदद की और हमने 32 लाख इकट्ठे किए और लड़कियों की टीम अब हिस्सा ले रही है अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में."

इमेज स्रोत, Indian women's ice hockey facebook
इसी टूर्नामेंट में टीम ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच जीता है. भारत ने फिलीपींस को 4-3 से हराया. इस टूर्नामेंट में 16 मार्च तक कुछ और भी मैच होंगे.
भारत में महिला आइस हॉकी की टीम की शुरुआत दो साल पहले हुई.
अक्षय कुमार ने बताया, "सफ़र आसान नहीं था. दो साल से हमने विमेन्स टीम पर ध्यान देना शुरू किया .इस देश में यह खेल लोकप्रिय नहीं. हमको सरकार से कोई मदद नहीं मिलती. हमारे पास अभ्यास की भी जगह नहीं. एक स्टेडियम देहरादून में है लेकिन वो बंद ही रहता है. इसलिए ज़्यादातर प्रैक्टिस सिर्फ़ लद्दाख में होती है. हमें इस टूर्नामेंट की तैयारी के लिए दो महीने का ही वक़्त मिल पाया."

इमेज स्रोत, harjinder jindi twitter
उन्होंने बताया, "ज़्यादातर लड़कियां लद्दाख के गाँव की हैं और कुछ तो ऐसी जगह से आती हैं जहाँ आने जाने में दो दिन लगते हैं. इनमें से कुछ के तो बच्चों भी हैं. इस जीत से बाकी महिला खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी. इनमें से कुछ लड़कियों को लोगों की और अपने परिवार की मानसिकता से लड़ना पड़ा."
आगे वो बताते हैं, "लोगों का अच्छा साथ मिल रहा है लेकिन हमें सरकार से मदद की ज़रूरत है. यह एक महंगा खेल है. एक खिलाड़ी की किट महंगी होती है. हम ज़्यादातर किट बाहर से मंगवाते हैं. भारत में कुछ नहीं बनता. कभी-कभी खिलाड़ी ख़ुद का पैसा लगाते हैं. कुछ लोग और संस्था हमारी मदद करती है डोनेशन के ज़रिए. हम बस इतना चाहते हैं कि कम से कम छह महीने अभ्यास करने की जगह तो मिले."
'विमेन्स आइस हॉकी चैलेंज कप ऑफ एशिया' में भाग लेने वाले देश हैं भारत, मलेशिया , न्यूज़ीलैंड, फिलीपींस, सिंगापोर, थाइलैंड और यूएई.
भारत ने इससे पहले 2016 में भाग लिया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












