चेतन सकारिया: टेम्पो चलाने वाले के बेटे का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफ़र

चेतन सकारिया

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    • Author, जिगर भट्ट
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए

श्रीलंका के ख़िलाफ़ जुलाई महीने में तीन वनडे और तीन टी-20 सिरीज में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में गुजरात के चेतन सकारिया को को भी जगह मिली है.

चेतन गुजरात में भावनगर ज़िले के वारतेज गांव के रहने वाले हैं. उनके और उनके परिवार के परिवार के लिए हाल के दिन उतार चढ़ाव भरे रहे हैं. उन्हें बीते फरवरी महीने में ही पहली बार इंडियन प्रीमियर लीग में हिस्सा लेने के लिए चुना गया, वो भी राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें एक करोड़ 20 लाख रुपये में ख़रीदा.

तब उनका परिवार छोटे भाई की आत्महत्या के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा था. इस सदमे के बारे में चेतन सकारिया की मां वर्षा बहन सकारिया ने बीबीसी गुजराती से फरवरी में कहा, "चेतन ने कठिन मेहनत से आईपीएल में जगह बनायी. हमलोग भी आर्थिक तंगी के बाद भी उसकी मदद करते रहे.''

हालांकि हमें दुख है कि चेतन के छोटे भाई ने चेतन के क्रिकेट करियर के लिए अपनी पढ़ाई छोड़कर नौकरी करनी शुरू कर दी थी, वह इस दिन को देखने के लिए नहीं है. उसने एक महीने पहले ही आत्महत्या कर ली."

चेतन की मां ने यह भी बताया था, "अगर चेतन का छोटा भाई होता तो वह चेतन के सेलेक्शन पर पूरे घर में नाचता. जब भी किसी मैच में चेतन का प्रदर्शन शानदार होता तो दोनों भाई घर में काफी मस्ती किया करते थे."

इसके कुछ ही दिनों बाद चेतन सकारिया जब आईपीएल में खेल रहे थे तो कोविड-19 संक्रमण के चलते उनके पिता की मौत हो गई थी.

द इंडियन एक्सप्रेस के दिए गए इंटरव्यू में चेतन सकारिया ने कहा है, "मैंने पहले छोटे भाई को खोया और एक महीने बाद मुझे आईपीएल का बड़ा अनुबंध मिला. पिछले महीने मेरे पिता की मौत हुई और अब टीम इंडिया में मेरा चयन हो गया है. काश मेरे पिता जीवित होते. वे मुझे भारत की ओर से खेलते हुए देखना चाहते थे. मुझे उनकी कमी महसूस हो रही है."

23 साल के चेतन सकारिया बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं और अब तक वो भारत की ए-टीम में भी शामिल नहीं रहे हैं. लेकिन इस साल के कोविड के चलते निलंबित हुए आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए सात मैचों में सात विकेट चटकाए हैं.

चेतन सकारिया

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आर्थिक तंगी से निकल कर बनाया मुकाम

चेतन जब नौवीं कक्षा में थे तब उन्होंने विद्या विहार सेकेंडरी स्कूल से क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी. यह स्कूल उनके गांव से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित था.

चेतन के स्कूल के शिक्षक कमलेश सर ने बताया, "हमलोग कई सालों से कक्षाएं समाप्त होने के बाद एक घंटे तक क्रिकेट खेलने वाले छात्रों को कोचिंग दे रहे हैं. शुरूआत टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने की होती है. नियमित रूप में कई सारे टूर्नामेंट भी कराते हैं. इन टूर्नामेंट में जो छात्र बेहतर खेलते हैं उन्हें हम कोचिंग देते हैं. चेतन ने इन मैचों में ओपनिंग बल्लेबाज़ी करते हुए ढेरों रन बनाए हैं."

कभी ओपनिंग बल्लेबाज़ रहे चेतन आज स्विंग तेज़ गेंदबाज़ कैसे बन गए, इस बारे में कमलेश सर ने बताया, "हमने यह देखा कि वह गेंदों को बेहतरीन ढंग से स्विंग करा लेते थे तो हमलोगों ने उन्हें गेंदबाज़ी में प्रशक्षित करना शुरू किया और उनका गेंदबाज़ी में शानदार प्रदर्शन रहा."

2012 से 2015 के बीच गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी से चेतन अपने स्कूल को कई टूर्नामेंट के फाइनल तक ले गए. यह वक्त था जब उनका परिवार आर्थिक तंगियों का सामना कर रहा था.

चेतन की मां ने बताया, "चेतन के पिता टेंपो चलाते थे. आर्थिक तंगी के चलते मुझे ईंट के भट्टे में मजदूरी करने जाना होता था. एक हादसे के बाद चेतन के पिता विकलांग हो गए थे लेकिन उन्होंने टेंपो चलाना जारी रखा."

आर्थिक तंगी के समय में चेतन के मामा ने परिवार की मदद की. चेतन बचपन से ही भावनगर में अपने मामा के घर में पले और बड़े हुए. चेतन के मामा भावनगर में एक स्टेशनरी शॉप चलाते हैं. चेतन पढ़ाई में काफी अच्छे थे लिहाजा मामा उन्हें सरकारी अधिकारी बनाना चाहते थे.

चेतन के मामा मनसुख भाई जांबूचा ने बताया, "चेतन क्रिकेट खेलना चाहता था. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लिहाजा मैं चाहता था कि वह किसी तरह से सरकारी नौकरी में चला जाए. एक दिन चेतन के स्कूल टीचर ने मुझे फ़ोन करके बताया कि वह एक अच्छा क्रिकेटर है, उसे खेलने दीजिए. तब हमने उसे खेलते रहने दिया."

रवींद्र जडेजा के साथ सकारिया

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क्रिकेट खेलने के लिए घर पर पिटाई

हालांकि चेतन का परिवार चाहता था कि वे जल्दी से पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी में चले जाएं. तब परिवार वालों का मनाना था क्रिकेट के लिए उन्हें अपने करियर को दांव पर नहीं लगाना चाहिए था.

चेतन की बहन ज्ञिज्ञासा ने बताया, "चेतन को क्रिकेट खेलना इतना पसंद था कि वे स्कूल से झूठ बोलकर, क्लास बंक करके खेलने जाते थे. जब घर वालों को इसका पता चला तो उनकी पिटाई भी हुई."

चेतन को दसवीं में 87 प्रतिशत अंक हासिल हुए थे, इसके बाद उन्होंने 11वीं-12वीं में विज्ञान पढ़ने का फ़ैसला लिया.

मनसुख भाई जाम्बूचा बताते हैं, "क्रिकेट में इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है कि आपका चयन होगा या नहीं. अगर आप अच्छी नौकरी चाहते हैं तो आपको पढ़ाई में बेहतर होना होता है. हालांकि चेतन नहीं चाहता था लेकिन हमने उसे विज्ञान पढ़ने को कहा. उसने खेलना भी जारी रखा. उसे 55 प्रतिशत अंक आए. इसके बाद उसने कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की थी."

चेतन सकारिया

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छोटे भाई का त्याग

चेतन ने साथ में भावनगर में क्रिकेट के एडवांस कोचिंग शुरू की. उन्होंने भावनगर के भरूचा क्लब से खेलना शुरू किया. अच्छी क्रिकेट खेलने की वजह से जल्दी ही उनका चयन सौराष्ट्र की अंडर-16 और अंडर-19 टीम के लिए हो गया लेकिन वे खेल और पढ़ाई में सुंतलन नहीं रख पा रहे थे.

भावनगर में उन्होंने अपने मामा की स्टेशनरी शॉप में दोपहर में काम करना शुरू कर दिया, जबकि सुबह और शाम वे क्रिकेट की प्रैक्टिस के लिए भरूचा क्लब जाने लगे.

आर्थिक तंगी के चलते चेतन के छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और वह भी मामा की दुकान पर काम करने लगे. चेतन एक अच्छे क्रिकेटर हैं, इसे समझते हुए छोटे भाई ने मदद की. यह ऐसा समय था जब बीमारी और उम्र की वजह से चेतन के पिता के लिए टेंपो चलाना बेहद मुश्किल हो गया था.

चेतन को अंडर -16 टीम में मौका ज़रूर मिला लेकिन वे एक भी मैच नहीं खेल पाए. पर चेतन मेहनत करते रहे और जल्दी ही उन्हें सौराष्ट्र की अंडर-19 टीम की ओर से खेलना का मौका मिल गया.

कूच बेहार ट्रॉफ़ी में सौराष्ट्र की अंडर-19 टीम की ओर से छह मैचों में चेतन ने 18 विकेट चटकाए. कर्नाटक के ख़िलाफ़ जब उन्होंने पांच विकेट लिए तो लोगों का ध्यान उन पर गया.

चेतन सकारिया

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स्पाइक वाले जूते नहीं थे

सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन ने चेतन को तेज़ गेंदबाज़ी के गुर सीखने के लिए एमआरएफ़ पेस फाउंडेशन अकादमी भेजा. अकादमी में तेज़ गेंदबाज़ ग्लेन मैक्ग्रा से मिली ट्रेनिंगके बाद चेतन सहजता से 130 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज़ रफ़्तार में गेंद फेंकने लगे.

जब चेतन ट्रेनिंग के लिए एमआरएफ़ पेस फाउंडेशन पहुंचे तो उनके पास स्पाइक वाले जूते तक नहीं थे. कूच बेहार ट्रॉफ़ी के दौरान उन्होंने साथी क्रिकेटरों के जूते पहनकर हिस्सा लिया था. एमआरएफ़ पेस फाउंडेशन अकादमी में जब चेतन ट्रेनिंग ले रहे थे तब भारत के एक अन्य उभरते हुए युवा क्रिकेटर शेल्डन जैक्सन ने उन्हें उपहार में स्पाइक वाले जूते दिए.

चेतन ने ईएसपीएन क्रिकइंफ़ो एक इंटरव्यू में बताया है, "शेल्डन जैक्सन तब आईपीएल में खेल रहे थे. वे बड़े खिलाड़ी थे. उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं उनका विकेट लूंगा तो वे मुझे स्पाइक शूज़ गिफ़्ट करेंगे. मैं उन्हें आउट करके गिफ़्ट हासिल कर लिया, मैं यही जूते लेकर एमआरएफ़ अकादमी गया."

2018-19 के दौरान उन्होंने कोई ख़ास मौका नहीं मिला लेकिन रणजी ट्रॉफ़ी में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया. चेतन सकारिया को सौराष्ट्र के तेज़ गेंदबाज़ जयदेव उनादकट के घायल होने के चलते यह मौका मिला. उन्होंने अपना पहला रणजी मैच गुजरात के ख़िलाफ़ खेला और इसमें पांच विकेट चटकाए. उन्होंने आठ मुक़ाबले में कुल 30 विकेट लिए.

स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए चेतन एक बार फिर एमआरएफ़ पेस फाउंडेशन अकादमी गए. चोट के चलते वे विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में हिस्सा नहीं ले पाए. रणजी ट्रॉफ़ी के बीते सत्र में भी वे बहुत कामयाब नहीं हुए, उन्हें महज 11 विकेट मिले. लेकिन सौराष्ट्र प्रीमियर लीग में वे मैन ऑफ़ द सिरीज़ चुने गए.

चेतन सकारिया

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इमेज कैप्शन, चेतन सकारिया अपने मामा के साथ

कोविड लॉकडाउन में ऐसे की प्रैक्टिस

मनसुख भाई जाम्बूचा ने बताया, "चेतन लॉकडाउन के दौरान भी प्रैक्टिस करना चाहता था. उसने मुझसे बात की, फिर हमने अपने खेत पर ही पिच बनाया दिया और एक जिम भी बनवाया. चेतन ने उसीमें प्रैक्टिस की और उस प्रैक्टिस का परिणाम रहा कि आईपीएल में उसे मौका मिल गया."

चेतन को इस सीजन में राजस्थान रॉयल्स ने 1.20 करोड़ रुपये की बोली पर ख़रीदा था, उनका बेस प्राइस महज 20 लाख रूपये था. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स के बीच चेतन को ख़रीदने को होड़ दिखी क्योंकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) में नेट गेंदबाज़ के तौर पर वे पिछले साल जुड़े हुए थे और बेंगलुरू टीम के साथ दुबई भी गए थे.

चेतन सकारिया ने द इंडियन एक्सप्रेस से एक साक्षात्कार में बताया, "मुझे आईपीएल में इस बार चयनित होने का पूरा भरोसा था, मैं दुबई में नेट गेंदबाज़ के तौर पर गया था. माइक हैसन और साइमन कैटिच ने मुझसे कहा था आईपीएल टीम में चयनित होने की पात्रता मैं पूरी करता हूं."

बहन ने नहीं देखा था भाई का मैच

आईपीएल मुकाबलों से पहले तक चेतन सकारिया की छोटी बहन ज्ञिज्ञासा ने उनका कोई मैच नहीं देखा था. उन्होंने बताया, "मैंने अब तक अपने भाई का एक भी मैच नहीं देखा है. जब वे राजकोट में खेल रहे थे तब उन्होंने टिकट दिया था लेकिन मेरी परीक्षा थी और मैं नहीं जा सकी थी. लेकिन अब मैं ज़रूर देखूंगी.जब से मैंने यह सुना है कि वे टीम इंडिया की ओर से खेलेंगे तब से लग रहा है मैं कोई सपना देख रही हूं."

चेतन के मामा मनसुख भाई जाम्बूचा ने कहा, "चेतन का विकेट लेना मुझे अच्छा लगता है, मैं उसका वीडियो बार बार देखता हूं. यह मेरे लिए आनंद बन गया है." चेतन के विद्या विहार स्कूल के एक शिक्षक ने बताया, "चेतन भावनगर के हीरो हैं. पूरे शहर में उनकी ही बात हो रही है. हमारे स्कूल का हर लड़का चेतन सकारिया बनना चाहता है."

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