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इंग्लैंड टेस्ट सिरीज में जीत से विराट कोहली ने उठ रहे सवालों पर लगाया विराम
- Author, सुरेश मेनन
- पदनाम, फाउंडिंग एडिटर, विसडन इंडिया अलमनैक
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ की जीत के साथ ही विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने टेस्ट सिरीज़ की लगातार 10वीं जीत दर्ज की. इसी के साथ ही भारत के कप्तान के तौर पर उन पर उठ रहे सवालों पर भी विराम लग गया.
जब कोहली अपनी बच्ची की डिलीवरी से पहले घर वापस लौट गए थे, तब अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में एक टेस्ट ड्रॉ हुआ और दो में टीम ने जीत हासिल की. अजिंक्य रहाणे की सफलता के बाद कयास के दौर शुरू हुए. जब इंग्लैंड के खिलाफ भारत पहला टेस्ट मैच हार गया तो ये कानाफूसी और बढ़ गई.
लेकिन, ये कोहली की टीम है और उसी जोश और भरोसे के साथ खेलती है जिससे कप्तान खुद.
किसी ने एक बार मज़ाक में कहा कि जब भी वे निराश महसूस करते हैं तो ऊर्जा के लिए कोहली को छू लेते हैं. ग्रीम स्मिथ (53), रिकी पोंटिंग (48), स्टीव वॉ (41) के बाद क्लाइव लॉयड (36 जीत) के साथ विराट कोहली चौथे सबसे सफल कप्तान बन गए हैं.
चेन्नई में मिली हार के बाद भारतीय टीम बेहतर होती चली गई. वहीं इंग्लैंड की टीम उल्टी दिशा में बढ़ी. दोनों के बीच हार का अंतर भी बढ़ गया. किसी टीम का सबसे अच्छा प्रदर्शन दूसरे टीम के सबसे ख़राब प्रदर्शन के साथ आ सकता है.
सिरीज़ में 32वां शिकार
3-1 से सिरीज हारने और 2-2 से ड्रॉ होने के पीछे टीम के चयन, बैटिंग के दौरान लेंथ के गलत आकलन, खराब किस्मत, अंपायर के ख़राब फ़ैसले जैसी चीजों को वजह माना जा सकता है. या फिर यह कहा जा सकता है कि विपक्षी टीम बहुत अच्छी थी.
रविचंद्न अश्विन की गेंद पर इंग्लैंड का आख़िरी विकेट गिरा, जो अश्विन का इस सिरीज़ में 32वां शिकार है. मुमकिन है कि इंग्लैंड की टीम इन सभी वजहों को अपनी हार के लिए जिम्मेदार मान रही होगी.
इसके लिए पिच को दोष दिया जा सकता है कि ये स्पिनरों के लिए मददगार है. लेकिन दो बार भारत के आठवें नंबर के बल्लेबाजों ने यह दिखाया है कि इस पर कैसे खेला जाता है. अश्विन ने चेन्नई में शतक जड़ा और वॉशिंगटन सुंदर अहमदाबाद में 96 रन पर नॉट आउट रहे.
बबल पॉलिसी
इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने ईमानदारी से हार की वजह को स्वीकारते हुए कहा, "उनकी स्किल बेहतर थी."
सिरीज के बाद भारत के हेड कोच ने ये भी कहा कि वो "बबल से बाहर निकलना चाहते हैं."
यह हताशा समझी जा सकती है. भारत के कई खिलाड़ी सितंबर में आईपीएल के बाद से बबल में थे. इंग्लैंड ने बबल पॉलिसी जुलाई में शुरू की थी. इसमें एक रोटेशन पॉलिसी भी ज़रूरी थी. लेकिन क्रिकेट में बबल के कई अलग नियम हो जाते हैं.
आख़िरी टेस्ट मैच में जब भारत 6 विकेट पर 146 रनों के साथ खेल रहा था, तब शायद इंग्लैंड को लग रहा था कि सिरीज ड्रॉ हो जाएगी. लेकिन तब ऋषभ पंत ने जबरदस्त पारी खेली और मैच का रुख पलट दिया.
जब वॉशिंगटन सुंदर ने सातवें और आठवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी खेली तो दोनों टीमों के बीच का अंतर साफ हो चुका था. भारत के युवा खिलाड़ी, जिन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी में राहुल द्रविड़ ने तैयार किया है और अंडर-19 और ए टीम के जरिए इनके खेल में चमक आई थी, अब टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार थे.
युवाओं की टीम
ओपनर शुभम गिल महज 21 साल के हैं. उन्होंने अपनी पहली सीरीज में ही ब्रिस्बेन में रन का पीछा करते हुए 91 रन बनाए थे. पंत 23 साल के हैं, जबकि वॉशिंगटन 21 के हैं.
अपने पहले ही मैच में शतक लगा चुके पृथ्वी शॉ भी महज 21 साल के हैं और बड़ी उड़ान भरने के लिए तैयार हैं. इसके अलावा, 20 साल के तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी और 19 साल के यशस्वी जायसवाल भी कतार में खड़े हैं.
भारत ने जसप्रीत बुमरा, इशांत शर्मा, मुहम्मद शमी, अश्विन और रविंद्र जडेजा जैसे दिग्गजों का ज्यादा इस्तेमाल किए बगैर ही ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की सीरीज को खेला है. दूसरी ओर, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या जैसे मजबूत रिकॉर्ड वाले खिलाड़ियों को भी उतारने की जरूरत नहीं पड़ी.
भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत शायद पहले कभी नहीं थी. मोहम्मद सिराज और बायें हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल के डेब्यू के तुरंत बाद ही असर दिखाई देने लगा.
तीन टेस्ट मैच में अक्षर के 11 रन के कम के औसत के साथ 27 विकेट लिए. अक्षर और अश्विन के आंकड़े किसी भी बैट्समैन को डराने के लिए काफ़ी हैं.
इसका मतलब यह है कि कोहली (सिरीज में 172 रन, अश्विन के आंकड़े से भी कम), चेतेश्वर पुजारा (133) और अजिंक्य राहाणे (112) जैसे सीनियर खिलाड़ियों के अपेक्षाकृत कम सफल रहने के बावजूद टीम इस कॉन्फिडेंस के साथ खेली कि दूसरे खिलाड़ी बढ़िया परफॉर्म करने में सक्षम हैं.
इंग्लैंड के खिलाड़ियों पर दबाव
यह इंग्लैंड की टीम से एकदम उलट कहानी थी जहां रूट, बेन स्टोक्स, एंडरसन जैसे सीनियर खिलाड़ियों पर ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था. उनके लिए कुछ अच्छे क्षण रहे है जैसे रूट की डबल सेंचुरी जिस मैच में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की. इसके अलावा उन्होंने 8 रन देकर 5 विकेट भी लिए थे.
तेज़ गेंदबाज़ों से भरी इंग्लैंड की टीम की खामियां भी उजागर हो गईं. हालांकि एंडरसन ने बेहतरीन स्विंग गेदबाज़ी का भी प्रदर्शन किया गिल और राहाणे दोनों के विकेट ले लिए. इसी वजह से इंग्लैंड भारतीय उपमहाद्वीप में लगातार छह मैच जीतने में कामयाब रही.
इसके साथ ही भारत के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल के लिए क्वॉलिफाई करने के चांस को खतरे में डाल दिया था. ऑस्ट्रेलियाई टूर से पहले कोहली ने डब्ल्यूटीसी के नियमों में बदलाव की मांग की थी. उन्होंने इसे एक "भटकाने वाला" करार दिया था.
शास्त्री ने भी इस बात का समर्थन किया था. अब चूंकि भारत फाइनल में है तो कोहली ने कहा, "हमसे इंतजार नहीं हो रहा."
1970 के दशक में भारत सीमित ओवर के क्रिकेट फॉर्मैट को "असली" क्रिकेट यानी टेस्ट क्रिकेट से भटवाने वाला मानता था.1983 में भारत ने विश्व कप जीत लिया और इसके बाद क्रिकेट की पूरी दुनिया बदल गई.
एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया जब भारत ने टी20 को एक जोक बताया था. 2007 में भारत के विश्व कप जीतने के बाद चीजें पूरी तरह से बदल गईं. इसके बाद ही आईपीएल का उदय हुआ और इससे क्रिकेट की दुनिया एक बार फिर पूरी तरह बदल गई.
जून में जब भारत इंग्लैंड में डब्ल्यूटीसी फाइनल के लिए न्यूजीलैंड से भिड़ेगा, उस वक्त भारत ज्यादा गंभीरता के साथ इसे खेलेगा, जिसकी 1983 या 2007 में कमी दिखाई दी थी.
अगर वे जीतते हैं तो शायद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल इस फॉर्मेट पर फिर से नजर डालने के लिए राजी हो सकता है.
कोहली और शाास्त्री ने इंग्लैंड मे अगस्त में होने वाले पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ को लेकर अपनी राय ज़ाहिर नहीं की है. भारत ने 2007 में वहां जीत दर्ज की थी, इसके बाद तीन दौरों में उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा है.
"नया भारत", जैसा कि कोहली इस टीम को कहते हैं, ने ऑस्ट्रेलिया में पिछली दो सिरीज़ जीती हैं और इंग्लैंड में अपना रिकॉर्ड को सुधारना की कोशिश करेगी.
उम्मीद है उस समय तक टीम बबल से बाहर आ जाएगी और हालात सामान्य हो जाएंगे.
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