यूसुफ़ पठान ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार

क्रिकेट प्रेमियों ने जैसे ही यह ख़बर सुनी कि यूसुफ़ पठान ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है तो उनके ज़हन में उस मैच की तस्वीर ताज़ा हो गई जब उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ एकदिवसीय मैच में ऐसी धुँआधार पारी खेली थी कि सबने दांतों तले अंगुलियां दबा ली थीं.

हॉलाकि तब यूसुफ़ पठान भारत को मैच तो नहीं जीता सके थे लेकिन उन्होंने सबका दिल जीतते हुए साबित किया कि उनमें कितनी प्रतिभा भरी है.

वह मैच साल 2011 में दक्षिण अफ्रीका में ही खेली गई एकदिवसीय सिरीज़ का पाँचवा और आख़िरी निर्णायक मैच था.

इससे पहले दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं. सेंचूरियन में खेले गए उस मैच में भारत ने टॉस जीतकर दक्षिण अफ़्रीका को पहले बल्लेबाज़ी करने की दावत दी थी. दक्षिण अफ्रीका ने हाशिम अमला के नाबाद 116 रनों की मदद से 46 ओवर में नौ विकेट खोकर 250 रन बनाए थे.

इसके बाद जीत के लिए 251 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के आठ विकेट केवल 119 रनों पर गिर गए तो लगा कि मैच अब ख़त्म हुआ तब हुआ, लेकिन मैच में असली रोमांच तो उसके बाद ही शुरू हुआ.

वैसे आउट होने वालों में पार्थिव पटेल, रोहित शर्मा, विराट कोहली, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना जैसे खिलाड़ी शामिल थे.

यूसुफ़ पठान की शानदार बल्लेबाज़ी

यूसुफ़ पठान के साथ विकेट पर नौवें विकेट की जोड़ी के रूप में ज़हीर ख़ान थे.

अचानक यूसुफ़ पठान ने आक्रामक रुख़ अपनाया और गेंद को बाउंड्री लाइन के पार पहुँचाना शुरू कर दिया. तब दक्षिण अफ़्रीका की टीम में डेल स्टेन, लॉवाबो सोत्सोवे और मोर्ने मोर्कल जैसे गेंदबाज़ थे जो अपनी तेज़ गेंदों से बल्लेबाज़ों को छकाने की क्षमता रखते थे.

यूसुफ़ पठान ने उनके बाउंसर पर लगभग गिरते हुए जिस तरह से शॉट्स लगाए उससे एक बार तो वो भी हैरान हो गए. यूसुफ़ पठान ने न केवल 70 गेंदों पर आठ चौके और आठ छक्के ठोकते हुए 105 रन की शतकीय पारी खेली, बल्कि उन्होंने ज़हीर ख़ान के साथ पूरे सौ रन की साझेदारी की.

जब तक वह विकेट पर थे तब तक मैच में भारत की जीत की उम्मीद जगी रही, लेकिन उनके आउट होते ही दक्षिण अफ़्रीका एक बार मैच में वापसी करने और 33 रन से जीतने में भी कामयाब रहा. दक्षिण अफ़्रीका ने एकदिवसीय सिरीज़ 3-2 से जीती लेकिन डंका को यूस़ुफ़ पठान के नाम का बज रहा था.

यूसुफ़ पठान उसके बाद वैसी जानदार और शानदार पारी कम ही खेल सके. इसकी वजह शायद यह भी रही कि उन जैसे स्वभाविक प्रतिभा वाले खिलाड़ी का इस्तेमाल भारतीय कप्तान उस तरह नहीं कर सके जैसा आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए साल 2018 में कप्तानी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्पिनर शेन वॉर्न ने किया.

पहले ही सीज़न में राजस्थान रॉयल्स की टीम चैंपियन बनकर उभरी जिसमें यूसुफ़ पठान स्टार बनकर चमके. उन्होंने 435 रन बनाने के अलावा आठ विकेट भी हासिल किए. उन्होंने उस सीज़न में डेक्कन चार्जर्स के ख़िलाफ़ केवल 21 गेंदों पर अर्धशतक जमा दिया था.

फ़ाइनल में राजस्थान रॉयल्स ने उस चेन्नई सुपर किंग्स को तीन विकेट से हराया जो बाद में आईपीएल की सबसे कामयाब टीमों में से एक बनी. उस फ़ाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स ने पाँच विकेट खोकर 163 रन बनाए. बाद में राजस्थान रॉयल्स ने यूसुफ़ पठान के 56 रन की मदद से तीन विकेट से जीत हासिल की थी.

यूसुफ़ पठान ने तीन चौके और चार छक्कों की मदद से केवल 39 गेंदों पर वह तेज़ तर्रार पारी खेली. इससे पहले उन्होंने गेंदबाज़ी करते हुए 22 रन देकर तीन विकेट भी झटके. नतीजे में वह प्लेयर ऑफ़ द् मैच भी बने.

37 गेंदों पर शतक जमाया

यूसुफ़ पठान ने साल 2010 में आईपीएल के तीसरे सीज़न में तब ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरीं जब उन्होंने दूसरे ही मैच में मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ केवल 37 गेंदों पर नौ चौके और आठ छक्कों के सहारे 100 रन बनाए. उनके शतक के बावजूद राजस्थान रॉयल्स चार रन से मैच हार गई. वह मुंबई इंडियंस के छह विकेट पर 212 रन के मुक़ाबले सात विकेट खोकर 208 रन बना सकी.

यूसुफ़ पठान ने आईपीएल में 174 मैच खेले और उनकी 154 पारियों में 3204 रन बनाए जिसमें मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ खेली गई इस शतकीय पारी के अलावा 13 अर्धशतक भी शामिल हैं. उन्होंने आईपीएल में 42 विकेट भी हासिल किए.

यूसुफ़ पठान ने एकदिवसीय क्रिकेट में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ साल 2010 में ही बैंगलोर में खेले गए मैच में 123 रन की नाबाद शतकीय पारी खेली.

वह पाँच एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ का चौथा मैच था. न्यूज़ीलैंड ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर जेम्स फ़्रैंकलिन के नाबाद 98 रन की मदद से निर्धारित 50 ओवर में सात विकेट खोकर 315 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, लेकिन यूसुफ़ पठान ने 96 गेंदों पर सात चौके और सात छक्कों की मदद से नाबाद 123 रन बनाए और भारत को 48.5 ओवर में ही पाँच विकेट से जीत दिला दी.

ज़रा कल्पना कीजिए जब यूसुफ़ पठान का बल्ला आग उगल रहा था तब स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का क्या हाल हुआ होगा. ऐसी पारी दर्शकों के लिए पूरा पैसा वसूल पारी होती है.

यूसुफ़ पठान की यह पारियाँ साबित करती हैं कि वह बेहद आक्रामक अंदाज़ में बेफ़िक्र होकर बल्लेबाज़ी करते थे जो शायद उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी साबित हुई. पिच पर पहुँचकर पहली गेंद से ही चौके छक्के लगाने की कोशिश में कई बार वह अपना विकेट सस्ते में गंवा देते थे.

आंकड़े गवाही देते हैं कि एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए दो शतक और तीन अर्धशतक बनाने के बावजूद वह 57 मैचों में 27.0 की औसत से 810 रन ही बना सके.

एकदिवसीय क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट 113.6 का रहा. उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट में 33 विकेट भी हासिल किए, यानि वह बेहद उपयोगी ऑलराउंडर थे.

उनकी इसी ऑलराउंडर प्रतिभा को देखते हुए उन्हें साल 2011 में हुए विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खेलने वाली भारतीय टीम में भी शामिल किया गया. विश्व कप में उन्होंने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ आठ रन बनाने के अलावा 49 रन देकर एक विकेट हासिल किया.

अगले मुक़ाबले में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने 14 रन बनाए और आयरलैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने 24 गेंदों पर नाबाद 30 रन बनाए.

इसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल थे. इसके बाद वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ वह 11 रन बना सके लेकिन कसी हुई गेंदबाज़ी करने में कामयाब रहे और सात ओवर में केवल 28 रन खर्च किए. इसके बाद नॉकआउट स्टेज के मुक़ाबले खेलने का मौक़ा यूसुफ़ पठान को नहीं मिला, लेकिन वह उस विश्व कप को जीतने वाली टीम का हिस्सा तो बने.

यूसुफ़ पठान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खेलने वाली उस टीम की हिस्सा भी थे जिसने साल 2007 में दक्षिण अफ़्रीका में हुए पहले आई वर्ल्ड टी-20 को भी जीता था.

यूसुफ़ पठान ने भारत के लिए 22 टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले और 236 रन बनाने के अलावा 13 विकेट भी हासिल किए.

पठान बंधु

यूसुफ़ पठान के भाई इरफ़ान पठान भी भारत के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं. इन्हें पठान बंधुओं की जोड़ी के रूप में जाना जाता है.

इनसे पहले अमरनाथ बंधुओं के तौर पर मोहिन्दर अमरनाथ और सुरेंद्र अमरनाथ भारत के लिए खेले तो पांड्या बर्दस के तौर पर हार्दिक और राहुल पांड्या भारत के लिए खेल रहे हैं.

एक तरफ़ जहॉ इरफ़ान पठान बेहद स्टाइलिश हैं वहीं यूसुफ़ पठान बेहद शर्मिले स्वभाव के हैं. वह बेहद नपे तुले जवाब देते हैं.

17 नवंबर 1982 को गुजरात के बड़ौदा शहर में जन्में यूसुफ़ पठान 38 बसंत देख चुके हैं. सभी जानते हैं कि उनके पिता पूरे परिवार सहित एक मस्जिद में रहते थे और जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था. उन्होंने जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव के बीच कामयाबी और नाकामी दोनों देखी है. उनकी पत्नी का नाम आफ़रीन है और उन दोनों को एक पुत्र है.

कहते हैं कि हर ख़ूबसूरत कहानी का भी एक अंत होता है फिर यूसुफ़ पठान की कहानी तो एक खिलाड़ी की है जहॉ कई बार करिश्माई प्रदर्शन भी टीम की कहानी का अंत सुखांत नहीं कर सकता.

साल 2018 में आईपीएल का फ़ाइनल चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइज़र्स हैदराबाद के बीच खेला गया. हैदराबाद ने यूसुफ़ पठान के केवल 25 गेंदों पर बनाए गए नाबाद 45 रन की मदद से छह विकेट खोकर 178 रन बनाए, जवाब में शेन वॉटसन के नाबाद 117 रन की मदद से चेन्नई ने आठ विकेट से फ़ाइनल और आईपीएल अपने नाम किया.

कमाल की बात है कि यह वही शेन वॉटसन थे जो साल 2008 में हुए पहले आईपीएल में उसी राजस्थान रॉयल्स टीम में यूसुफ़ पठान के ही साथी थे जिसने आईपीएल का ख़िताब जीता था. अब इसे इत्तेफ़ाक़ ही कहा जा सकता है कि शेन वॉटसन भी पिछले साल अपना आख़िरी आईपीएल खेल चुके हैं.

वैसे यूसुफ़ पठान साल 2012 और 2014 में आईपीएल का ख़िताब जीतने वाली कोलकाता नाइटराइडर्स टीम के सदस्य भी रहे. 2012 के फ़ाइनल में तो वह कुछ ख़ास नहीं कर सके लेकिन 2014 के फ़ाइनल में किंग्स इलेवन पंजाब के ख़िलाफ़ उन्होंने 22 गेंदों पर उपयोगी 36 रन बनाए.

यूसुफ़ पठान कभी किसी विवाद का हिस्सा नहीं रहे और ना ही अपने हैरतअंगेज़ कारनामों पर कभी किसी ख़ुशी का इज़हार ही किया.

यूसुफ़ पठान भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने साल 2011 में विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठा लिया था और उस पल को अपने जीवन का सबसे भावुक पल मानते हैं.

आज भरे मन से भले ही उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है लेकिन उन्हें और उनके चाहने वालों को इस बात की ख़ुशी हमेशा रहेगी कि यूसुफ़ पठान के कंधों ने आईसीसी वर्ल्ड टी-20 और विश्व कप की ट्रॉफ़ी उठाई है.

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