रूस के ओलंपिक और फुटबॉल वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध

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विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने रूस के सभी प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर चार साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.
इसका मतलब है कि रूस का झंडा और राष्ट्रगान टोक्यो में अगले साल होने वाले ओलंपिक और 2022 में क़तर में होने वाले फ़ुटबॉल विश्व कप में शामिल नहीं होगा.
हालांकि, जो खिलाड़ी यह साबित कर पाएंगे कि वो डोपिंग कांड से बाहर रहे हैं वो एक तटस्थ झंडे के तले खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले पाएंगे.
स्विट्ज़रलैंड के लुसाने में वाडा की कार्यकारी समिति की बैठक में एकमत से यह प्रस्ताव लिया गया है.
वाडा का यह फ़ैसला रूस की डोपिंग रोधी एजेंसी (रुसाडा) के ग़ैर-संगत व्यवहार के बाद आया है. जनवरी 2019 में पाया गया था कि रुसाडा ने जांचकर्ताओं को दिए लेब डेटा में हेरफेर किए थे.
किस प्रतियोगिता में भाग लेगा रूस?
राज्य प्रायोजित डोपिंग कांड के सामने आने के बाद वाडा ने रूस पर तीन साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था जिसके बाद 2018 में रूस की डोपिंग एजेंसी ने वाडा को इस शर्त पर अपना डेटा दिया था कि वो उससे प्रतिबंध हटा देगा. उस समय रूस पर से प्रतिबंध हटा दिया गया था.
वाडा के इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए रूस के पास 21 दिन का समय है.
2014 में सोची शीतकालीन ओलंपिक के दौरान रूस पर प्रतिबंध लगाया गया था जिसके बाद पिछले साल प्योंगचेंग में हुए शीतकालीन ओलंपिक में रूस के 168 खिलाड़ियों ने एक तटस्थ झंडे के तले प्रतियोगिता में भाग लिया था.
रूस पर एथलेटिक्स में भाग लेने पर 2015 से प्रतिबंध है.
इस प्रतिबंध के बावजूद रूस यूरो 2020 फ़ुटबॉल प्रतियोगिता में भाग ले पाएगा. यह प्रतियोगिता इस बार रूस के सेंट पीट्सबर्ग शहर में हो रही है.
डोपिंग रोधी उल्लंघन के नियमों के तौर पर यूरोपियन फ़ुटबॉल की गवर्निंग बॉडी यूएफ़ा को 'मुख्य खेल संगठन' नहीं माना जाता है.
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