मैरी कॉम विश्व चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल में पहुंचीं

मैरी कॉम

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ओलंपिक पदक विजेता भारतीय महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम रूस के उलान-उदे में चल रही महिला विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल में पहुंच गई हैं.

इसके साथ ही इस विश्व चैंपियनशिप में मैरी कॉम का पदक भी पक्का हो गया है.

मैरी कॉम ने क्वाटर्रफ़ाइनल में कोलंबिया की इनग्रिट वेलेंसिया को एकतरफ़ा मुक़ाबले में 5-0 से मात दी.

मैरी कॉम 51 किलोग्राम भारवर्ग में हिस्सा ले रही हैं. इस जीत के साथ ही उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में अपना आठवां पदक पक्का कर लिया है.

मौजूदा विश्व चैंपियनशिप के पहले राउंड में मैरी कॉम को बाई मिला था जबकि दूसरे राउंड में उन्होंने थाईलैंड की मुक्केबाज़ जुतामस जितपोंग को 5-0 से हराया था,

मैरी कॉम छह बार विश्व चैंपियन का ख़िताब अपने नाम कर चुकी हैं जबकि एक बार उन्होंने रजत पदक जीता था. मैरी कॉम ने 51 किलोग्राम भारवर्ग में अपना पहला विश्व चैंपियनशिप पदक जीता है.

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विश्व चैंपियनशिप के अलावा मैरी कॉम ओलंपिक में कांस्य, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक-एक स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं.

विश्व चैंपियनशिप में आठ पदक जीतने वाली मैरी कॉम पहली मुक्केबाज़ हैं. उन्होंने साल 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में स्वर्ण पदक जीते हैं.

हाल ही में मैरी कॉम ने बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में बताया था कि उन्हें आज भी ओलंपिक में स्वर्ण पदक ना जीत पाने का मलाल है.

अगर मैरी कॉम मौजूदा विश्व चैंपियनशिप को अपने नाम कर लेती हैं तो टोक्यो ओलंपिक में उनके क्वालिफ़ाई करने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी.

मैरी कॉम के जीवन में सबसे बड़ा लम्हा तब आया था जब उन्होंने 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था.

ये पहली बार था जब महिला बॉक्सिंग को ओलंपिक में शामिल किया गया. तब वो सेमीफ़ाइनल में ब्रिटेन की निकोला एडम्स से हार गई थीं और कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था.

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मैरी कॉम पहले 48 किलोग्राम वर्ग के मुक़ाबलों में हिस्सा लेती थीं लेकिन ओलंपिक में 51 किलोग्राम भार वर्ग से ही मुक़ाबलों की शुरुआत होती है.

इस वजह से उन्होंने अपना वज़न बढ़ाकर 51 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेना शुरू किया. अब मैरी कॉम का लक्ष्य अगले साल टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.

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