IPL: हार का दूसरा नाम क्यों बन गई है विराट कोहली की बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
सोमवार को आईपीएल-12 के मुक़ाबले में मुंबई की बल्लेबाज़ी के दौरान बैंगलोर के गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज जब अपना दूसरा और पारी का 18वां ओवर कर रहे थे तब कवर में खड़े कप्तान विराट कोहली के पास एक शॉट आया और उसे रोकने की कोशिश में गेंद उनके हाथ से फिसल गई.
निराश विराट कोहली ने जैसे-तैसे उसे संभाला और फिर ग़ुस्से में पांव से सरका दिया.
यह मंज़र बता रहा था कि विराट कोहली अपनी टीम के प्रदर्शन से कितने निराश है.
डगआउट में उनकी टीम के कोच आशीष नेहरा का चेहरा भी उतरा हुआ था.
जीत के लिये 172 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही मुंबई इंडियंस के सामने आख़िरी दो ओवर में 22 रन बनाने की चुनौती थी.
विराट ने गेंद पवन नेगी को थमाई.
नेगी का सामना कर रहे थे हार्दिक पांड्या और उन्होंने अकेले ही इस ओवर में मैच का फ़ैसला कर दिया.

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नेगी की पहली गेंद पर तो कोई रन नही बना लेकिन अगली गेंदों पर हार्दिक पांड्या का बल्ला ऐसा गरजा कि बैंगलोर के फ़ील्डर आंखे फाड़े देखते रह गए.
पांड्या ने नेगी की दूसरी गेंद पर लॉन्ग ऑफ़ पर ज़ोरदार छक्का लगाया.
तीसरी गेंद को पांड्या ने एक्स्ट्रा कवर बाउंड्री लाइन के बाहर चार रन के लिए भेजा.
चौथी गेंद पर भी पांड्या ने चौका उड़ाया.
पांचवी गेंद को पांड्या ने बेहद ज़ोरदार शॉट के ज़रिए लॉन्ग ऑन पर छक्के की राह दिखाई.
इसके बाद तो बस जीत की ओपचारिकता ही रह गई थी.
आखिरी गेंद पर एक रन के साथ मुंबई ने यह मैच 19 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.
हार्दिक पांड्या 16 गेंदों पर पांच चौके और दो छक्कों की मदद से 37 रन बनाकर नाबाद रहे.
उनके अलावा सलामी बल्लेबाज़ क्विंटन डी कॉक ने 40, कप्तान रोहित शर्मा ने 28, सूर्यकुमार यादव ने 29 और ईशान किशन ने भी 21 रन का योगदान दिया.
युजवेंद्र चहल ने 27 रन देकर दो विकेट हासिल किए.

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इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर एबी डिविलियर्स के 75 और मोईन अली के 50 रनों की मदद से निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 171 रन बनाए.
डिविलियर्स और मोईन अली के अलावा सलामी बल्लेबाज़ पार्थिव पटेल ने 28 रन बनाए.
बाकी बल्लेबाज़ों का तो ये हाल था कि ख़ुद कप्तान विराट कोहली आठ और आकाशदीप नाथ दो रन बना सके.
मारकस स्टॉयनिस और पवन नेगी के बल्ले से कोई रन नहीं निकला.
मुंबई के लसिथ मलिंगा ने अपनी पुरानी रंगत दिखाते हुए 31रन देकर चार विकेट झटके.
आखिरकार लगातार एक के बाद एक हार के बाद के भी बैंगलोर की टीम कप्तान विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, स्टोइनिस, मोईन अली और युज़वेंद्र चहल जैसे ख़िलाड़ियों के होते हुए भी संभल क्यों नही सकी.

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इस सवाल के जवाब ने क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि पहले अगर मुंबई के ख़िलाफ़ हुए मैच की बात करें तो जिस ओवर में हार्दिक पांड्या ने तूफानी बल्लेबाज़ी की, वह ओवर पवन नेगी को देना ही नहीं चाहिए था.
हार्दिक पांड्या से उनका श्रेय नही छीनना चाहिए लेकिन उन्होंने तो तब अपना बल्ला घुमाना ही था.
उन्होंने चालाकी भी दिखाई कि वह विकेट पर थोड़ा पीछे चले जाते थे ताकि दमदार शॉट लगा सकें.
लेकिन पवन नेगी जिन्हें बाहर खड़े कोच आशीष नेहरा के कहने पर लाया गया उन्होंने बहुत कमज़ोर गेंदबाज़ी की.
उन्होंने पांड्या की रेंज में गेंद की.
इसके साथ ही बैंगलोर ने दिखा दिया कि अच्छी परिस्थिति में होने के बावजूद मैच हारना कोई आरसीबी से सीखे.

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इसके अलावा अपनी ही कमज़ोर फील्डिंग पर विराट कोहली के झल्लाने पर विजय लोकपल्ली कहते हैं कि विराट दूसरों से उम्मीद रखते है कि वह रन बचाए, डाइव लगाए, अपना सर्वश्रेष्ठ दे, लेकिन विराट ने ख़ुद सीधी गेंद को सही नहीं पकड़ा तो उन्हें अपने आप पर ग़ुस्सा आ रहा था.
रह रहकर फिर वही बात कि ना तो उनके पास अच्छी गेंदबाज़ी है, ना फील्डिंग है तो ऐसे में जब तब बैंगलोर 200 या 220 रन नहीं बनाएगी तो कैसे जीतेगी.
और अब तो आठ में से सात मैच हारकर उसका अभियान समाप्त होने के कगार पर ही पहुंच गया है.
इसे लेकर विजय लोकपल्ली कहते हैं कि बाकी बचे छह के छह मैच जीतना बहुत मुश्किल है.
एक ऐसी टीम जिसका मनोबल बिल्कुट टूट चुका है, जिनकी फॉर्म बेहद ख़राब है.
वैसे भी 25 तारीख जो अभी दूर है, तब तो बैंगलोर कुछ विदेशी खिलाड़ियों को भी खो देगी क्योंकि वे विश्व कप की तैयारी के लिए वापस चले जाएंगे.
ऐसे में तो कोई चमत्कार ही बैंगलोर को अंतिम चार का टिकट दिला सकता है.
तो क्या ख़ुद विराट कोहली के बल्ले का न चल पाना बैंगलोर की बुरी हालत की मुख्य वजह है?
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि निश्चित रूप से इसमें कोई दो राय नही है.
यह टीम इस बार केवल और केवल विराट और डीविलियर्स के भरोसे थी.
सोमवार को भी डिविलियर्स मुंबई के ख़िलाफ़ ग़लत समय पर आउट हो गए.

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यहां तक कि आखिरी ओवर में तो तीन विकेट गिर गए.
आकाशदीप नाथ की वजह से डीविलियर्स रन आउट हो गए.
आकाशदीप को डिविलियर्स को रन लेते समय वापस भेजना ही नहीं चाहिए था.
अगर डिविलियर्स स्ट्राइक पर रहते तो कम से कम 15 रन तो और बन ही सकते थे जो काम आते.
यहां बहुत ही कमज़ोर क्रिकेट समझ का परिचय बैंगलोर के खिलाड़ियो ने दिया.
और रही सही कसर पवन नेगी के ओवर ने पूरी कर दी.
नेगी इतने नज़दीकी मैच में सही ओवर नहीं कर सकते.
तकनीकी रूप अब अगर बैंगलोर एक और मैच हार गई तो वह सुपर फोर से बाहर हो जाएगी.
बतौर ग़ालिब उसके सुपर फोर में पहुंचने की उम्मीद
हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल को ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है.
अब भला जो टीम केवल दो बल्लेबाज़ो के सहारे हो उसे आठ में से सात मैच हारकर आईपीएल में बेसहारा तो होना ही था.
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