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कोहली ने आख़िरी ओवर के लिए केदार जाधव को छोड़ विजय शंकर को क्यों चुना?
- Author, सूर्यांशी पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नागपुर में हुए दूसरे वनडे मुक़ाबले के आख़िरी ओवर में ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों का दामन अर्धशतक पूरा कर चुके मार्कस स्टोइनिस ने थामा हुआ था. 11 रनों की ज़रूरत थी और मार्कस स्टोइनिस का एक छक्का भी ऑस्ट्रेलिया को जीत के क़रीब ले जाता.
वहीं, भारत के खेमे में सबसे मुश्किल सवाल का जवाब कप्तान विराट कोहली तलाश रहे थे कि आख़िर 50वां ओवर किसे दिया जाए.
आख़िरी ओवर के बादशाह कहे जाने वाले जसप्रीत बुमराह के 10 ओवर ख़त्म हो चुके थे तो बाक़ी स्थापित गेंदबाज़ भी अपने ओवर पूरे कर चुके थे. बचे थे केवल दो- केदार जाधव (8 ओवर) और विजय शंकर (1 ओवर).
विराट कोहली ने स्पिनर को न चुनते हुए तेज़ गेंदबाज़ विजय शंकर को चुना. अपने नाम को सार्थक करते हुए विजय शंकर ने भारत को 8 रनों से जीत दिलाई.
लेकिन विराट कोहली के इस फ़ैसले के पीछे की कहानी क्या रही?
'बुमराह के पक्ष में थे धोनी'
वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन बताते हैं कि विराट कोहली ने पहले विजय शंकर को 47वें ओवर में इस्तेमाल करने का मन बनाया था लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने जसप्रीत बुमराह को वो ओवर देने का सुझाव दिया.
इसका नतीजा ये रहा कि 47वें ओवर में भारत ने विकट चटकाए और खेल का रुख़ भारत के पक्ष में होने लगा.
लेकिन अब भी आधी जंग बाक़ी थी क्योंकि मार्कस स्टोइनिस चट्टान की तरह भारत के विजय रथ के सामने खड़े थे.
इस खिलाड़ी के लिए कोई तो तोड़ तलाशना था.
जब 49वें ओवर की बात आई तो प्रदीप मैगज़ीन के मुताबिक़ विराट कोहली ने केदार जाधव को छोड़ विजय शंकर को इसलिए चुना होगा क्योंकि नागपुर में आख़िरी ओवर में स्पिनर से ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ चलते हैं. ऑस्ट्रेलिया लक्ष्य से केवल 11 रन की दूरी पर था इसलिए भी यह चयन वाजिब भी था.
अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विजय शंकर ने बताया कि विराट कोहली ने उन्हें पहले ही कह दिया था कि उन्हें 44वें ओवर के बाद गेंदबाज़ी के लिए बुलाया जा सकता है. इस कारण वह मानसिक रूप से तैयार थे.
बुमराह ने दी विजय शंकर को ये सलाह
विजय शंकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि 'जसप्रीत बुमराह ने 48वें ओवर में मुझे बताया कि गेंद रिवर्स हो रही है जिसके चलते सही लाइन और लेंथ से की गई गेंदबाज़ी काम आ सकती है.'
वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि विजय शंकर की गेंदबाज़ी से मिली ये जीत उनको बतौर खिलाड़ी साबित करती है.
उनके मुताबिक विजय शंकर की गेंदबाज़ी में वो धार थी जो आख़िरी ओवर में मात्र तुक्का नहीं कही जा सकती. इसके अलावा उन्होंने बल्लेबाज़ी में 40 रनों का अहम योगदान भी दिया था.
पिछले साल मार्च के महीने में बांगलादेश के ख़िलाफ़ हुई निदास ट्रॉफी तो आपको याद ही होगी जब दिनेश कार्तिक और विजय शंकर बल्लेबाज़ी कर रहे थे और विजय शंकर को अपनी बल्लेबाज़ी के लिए कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
लेकिन खेल विश्लेषकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 5 मार्च को नागपुर में हुए इस वनडे मुक़ाबले में उन्होंने यह जता दिया कि वह लंबी रेस के खिलाड़ी हैं और भारतीय टीम में टिकने के इरादे से आए हैं.
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