विराट कोहली ने मांस, दूध-दही खाना क्यों छोड़ा

    • Author, सूर्यांशी पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

एक रेस्तरां में जानी-मानी अमरीकी टेनिस खिलाड़ी सरीना विलियम्स अगर 'वीगन' थाली ऑर्डर करतीं नज़र आ जाएं तो

शायद हैरानी की बात ना हो, क्योंकि यह ख़बर अब पुरानी हो गई है.

सरीना विलियम्स ने गर्भवती होने के बाद अपनी डाइट में बदलाव करते हुए वीगन आहार को अपना लिया है. वीगन आहार का मतलब होता है कि आप शाकाहारी तो हो ही गए हैं, यहां तक कि दूध, दही, घी, मक्खन, छाछ, मलाई और पनीर भी खाना छोड़ चुके हैं. इसमें शहद तक छोड़ना होता है.

विश्व प्रसिद्ध फ़ुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी का गेम सीज़न के दौरान वीगन आहार पर रहना थोड़ा हैरान ज़रूर कर सकता है, क्योंकि अर्जेंटीना के हैं और दक्षिण अमरीका में शाकाहारी भोजन मिलना मुश्किल है. ऐसे में वीगन रहना तो अपने आप में एक चुनौती है.

इस कड़ी में एक और नया नाम जुड़ गया है और वो हैं, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली. सवाल ये उठता है कि भला ये क्यों हो रहा है. आख़िर खिलाड़ी वीगन आहार क्यों अपना रहे हैं?

खिलाड़ियों के आहार की एक्सपर्ट दीक्षा छाबड़ा का कहना है कि वीगन आहार दो तरह से अपनाए जा सकते हैं.

  • फलाहार और धीमी आंच में पकी हुई सब्ज़ियां खाना
  • ज्वार, बाजरा, गेंहू, मक्का और दाल पर रहना और साथ में हाई-फ़ैट फलों एवोकाडो को लेना

इन दोनों तरीकों का मिश्रण भी हो सकता है.

इंजरी से उभरने में वीगन आहार मददगार

उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों में वीगन आहार का चलन इसलिए भी ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि इस आहार को लेने से इंजरी जल्द ठीक हो सकती है.

चोट लगती है तो हमारा शरीर सूजन के ज़रिए रोगाणुओं के लिए प्रतिरोध उत्पन्न करता है ताकि हमारे शरीर को नुक़सान ना पहुंचे. अब ऐसी सूजन हल्की-फुल्की चोट के लिए तो ठीक है, लेकिन अगर इंजरी ख़तरनाक़ है तो सूजन नुक़सानदायक है.

ऐसे में चोटिल खिलाड़ी को चाहिए कि वो ऐसा भोजन करे जिससे उसे एंटी-ऑक्सिडेंट, विटामिन मिले जैसे कि बेर, हरी सब्ज़ियां, लो-शुगर फल. इन्हें एंटी-इन्फ्लेमेटरी फ़ूड भी कहते हैं.

ये सूजन को रोकते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. वहीं प्रो- इन्फ्लेमेटरी फ़ूड जैसे हाई-शुगर फ़ूड, रेड मीट इंजरी के दौरान शरीर को बहुत नुक़सान पहुंचाता है.

वज़न कम करने में कारगर

वीगन आहार में विटामिन के साथ-साथ फ़ाइबर की मात्रा अधिक होती है तो यह मोटापा कम करने में कारगर मानी जाती है. फ़ाइबर युक्त आहार आपके कम खाने के बाद भी आपके पेट को भरा महसूस कराता है जिससे आप ज़रूरत से ज़्यादा खाना नहीं खाते.

वहीं जानवरों से उत्पादित पर्दाथों को न खाने से सबसे बड़ा नुक़सान प्रोटीन की ख़ुराक़ में कमी की आशंका रहती है. खेल में प्रोटीन का सेवनतो सबसे ज़रूरी है. ऐसे में इसकी भारपाई कैसे होगी?

प्रोटीन की कमी कैसे पूरी होगी?

न्यूट्रिशनिस्ट और वेलनेस कोच अवनि कौल का कहना है कि हर खिलाड़ी को अपने खेल के मुताबिक, अपने शरीर के मुताबिक ख़ुराक़ों की ज़रूरत पड़ती है.

एक वेटलिफ़्टर या बॉडी-बिल्डर के लिए प्रोटीन की पूर्ति होना सबसे ज़रूरी है तो वहीं रेस में भाग लेने वाले खिलाड़ी को ताक़त के साथ-साथ ऊर्जा की भी ज़रूरत होती है और वो कार्बोहाइड्रेट-रिच आहार से पूरी होती है.

मतलब स्ट्रेंथ और पावर एथलीट्स की अलग-अलग ज़रूरतें होती हैं.

इसकी पूर्ति के लिए अवनि कौल कहती हैं कि सही मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट का खाने में होना ज़रूरी है.

वीगन आहार से आपका ब्लड-शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है, जिससे आपको मधुमेह की बीमारी होने का ख़तरा

एकदम कम हो जाएगा, लेकिन जो प्रोटीन आपको जानवरों से उत्पादित पर्दाथों से मिलता था उसकी भरपाई कैसे होगी?

क्योंकि मांस, दूध, अंडे और मछली से पॉज़िटिव नाइट्रोजन की कमी नहीं होती, साथ ही इनसे नौ अमीनो एसिड मिलते हैं.

इस कमी को दूर करने के लिए आपको पता होना चाहिए कि किस तरह के वीगन खाने में प्रोटीन की मात्रा है और कैसे

इसको वीगन आहार में डाल सकते हैं. विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ियों के पास इस काम के लिए आहार विशेषज्ञों की टीम होती है, लेकिन आम आदमी के लिए एक संतुलित वीगन आहार तैयार करना मुश्किल हो सकता है.

पर्यावरण के लिए खिलाड़ी बन रहे हैं वीगन?

यूथ ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की वर्कशॉप ले चुकीं अवनि कौल का ये भी कहना है कि आजकल लोग इसलिए भी वीगन आहार को अपना रहे हैं, क्योंकि ये पर्यावरण को बिल्कुल नुक़सान नहीं पहुंचाता.

संयुक्त राष्ट्र की फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक़ पर्यावरण में मांस पकाने की वजह से जो कार्बन फुटप्रिंट बढ़ रहा है. यह उसको भी कम करने में मददगार है और इससे किसानी और किसान को भी फ़ायदा है.

वीगन आहार में अगर आप प्रोटीन की कमी पूरी करना चाहते हैं तो दाल, सेम, सोयाबीन, चिया सीड्स, बैगल, किनोआ, चना, फूलगोभी इन सबका सेवन कर सकते हैं.

क्या वीगन आहार ही है एकलौता उपाय

इंडियन फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. पीएसएम चंद्रन और न्यूट्रिशनिस्ट और मेटाबोलिक बैलेंस कोच हर्षिता दिलावरी का कहना है कि किसी खिलाड़ी का वीगन आहार अपनाना उसका निजी फ़ैसला है.

जो फ़ायदे वीगन आहार के हैं वो आम आहार के भी हो सकते हैं. इसके लिए आहार में पौष्टिक भोजन और संतुलित भोजन को जगह दें.

न्यूट्रिशनिस्ट और मेटाबोलिक बैलेंस कोच हर्षिता दिलावरी कहती हैं कि वीगन आहार में आपको कुछ माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त विटामिन की गोलियों का सेवन करना चाहिए.

उनके अनुसार यूं तो वीगन आहार में फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं जो कैंसर जैसी बीमारियों के लिए रोधक की भूमिका निभाते हैं, लेकिन विटामिन बी 12 जो जानवरों से उत्पादित पर्दाथों में बड़ी आसानी से पाए जाते है उसकी भरपाई भी ज़रूरी है.

इसके लिए वो बताती हैं कि वीगन आहार में दलिया, अनाज और सोयाबीन खाना ज़रूरी है. उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन डी और फ़ैटी एसिड सबसे ज़्यादा ज़रूरी होते हैं.

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