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उनादकट में ऐसा क्या है जो 11.5 करोड़ में बिके?
'पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे ख़राब' - पुराने ज़माने की ये कहावत इन दिनों औंधे मुंह गिर गई है.
इंडियन प्रीमियर लीग में हुई लाखों-करोड़ों रुपए की बारिश ने साबित कर दिया है कि अगर आप अच्छा खेलते हैं तो टैलेंट को पहचानने और दांव लगाने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है.
आईपीएल की दो दिन चली नीलामी में 169 खिलाड़ियों की बोली लगी और उन पर कुल 628.7 करोड़ रुपए न्योछावर किए गए. इनमें 113 भारतीय और 56 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं.
उनादकट और पंड्या की क़िस्मत खुली
इंग्लैंड के बेंजामिन स्टोक्स 12.5 करोड़ रुपए में बिके और क्रुणाल पंड्या 8.80 करोड़ रुपए में. पंड्या ने अब तक एक भी इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है.
अब बात उस खिलाड़ी की जिसे ख़ुद भी अपने इतना महंगा बिकने की उम्मीद नहीं थी.
तेज़ गेंदबाज़ जयदेव उनादकट ने शायद ही सोचा होगा कि बल्लेबाज़ों का गढ़ माने जाने वाले इस टूर्नामेंट में वो सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी बन जाएंगे.
जब वो नेट में पसीना बहा रहे थे तो बेंगलुरु में नीलामी चल रही थी. जैसे ही उनका नाम आया, वो और उनके साथी भागकर ड्रेसिंग रूम में पहुंचे.
क्या हाल हुआ था फ़ोन का?
उनादकट ने कहा, ''एक फ़ोन को 30 लोगों ने घेर कर रखा था. पूरी टीम टूट पड़ी थी. कोई चिल्ला रहा था, कोई हल्ला कर रहा था. ये मज़ेदार था. सभी खुशियां मना रहे थे.''
उनका प्राइस इसलिए बढ़ता चला गया क्योंकि उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाने को लेकर चेन्नई सुपर किंग्स के चीफ़ कोच स्टीफ़न फ़्लेमिंग और किंग्स इलेवन पंजाब की प्रीति जिंटा के बीच बहस सी शुरू हो गई.
लेकिन जब दोनों टीमों में टक्कर जारी थी, तभी तीसरी टीम मैदान में कूदी और उन्हें ले उड़ी. उनादकट इस साल राजस्थान रॉयल्स की तरफ़ से खेलेंगे.
तेज़ गेंदबाज़ के मुताबिक पिछले दो साल के परफॉर्मेंस को देखते हुए उम्मीद थी कि उन्हें अच्छी रकम में ख़रीदा जाएगा, लेकिन इतनी ज़्यादा रकम के बारे में उन्होंने नहीं सोचा था.
कहां पड़ी थी उन पर नज़र?
बाएं हाथ से गेंदबाज़ी करने वाले जयदेव दीपकभाई उनादकट का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 18 अक्टूबर 1991 में हुआ था.
न्यूज़ीलैंड में खेले गए साल 2010 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उनादकट ने भारतीय टीम की अगुवाई की थी. पहली बार उन पर पोरबंदर के दलीप सिंह स्कूल ऑफ़ क्रिकेट में नज़र पड़ी थी.
कोच राम ओदेडरा ने उनके बॉलिंग एक्शन और सीम पर बॉल को लैंड कराने की उनकी काबिलियत को पहचाना.
एकमात्र टेस्ट आठ साल पहले खेला
जिस वक़्त भारतीय टीम के टेस्ट गेंदबाज़ों की धमक साउथ अफ़्रीका से भारत तक सुनी जा रही है, उस बीच उनादकट का इतना महंगा बिकना हैरान भी कर सकता है.
क्योंकि गेंदबाज़ों के लिए सबसे मुफ़ीद माने जाने टेस्ट क्रिकेट में वो अब तक कोई ख़ास छाप नहीं छोड़ सके हैं. उनादकट ने अपना पहला और एकमात्र टेस्ट साल 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सेंचुरियन में खेला था.
हालांकि, उस मैच में वो एक भी विकेट नहीं ले पाए थे. साल 2013 में उन्हें पहली बार ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे मैच खेलने का मौका मिला.
लेकिन सात वनडे मैच खेलने के बावजूद उन्हें कोई ख़ास सफलता नहीं मिल पाई. कुल सात मैचों में वो आठ विकेट ले पाए हैं.
ज़ाहिर है, उनादकट ने टेस्ट और वनडे में ऐसा कुछ नहीं किया था जिसकी वजह से उन्हें कोई ख़ास पहचान मिल पाती.
टी20 क्रिकेट ने संवारा करियर
लेकिन टी20 फ़ॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने कमबैक किया.
पिछले दो सालों में उनादकट ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है. अब तक उन्होंने 47 मैच खेले हैं और 56 विकेट लिए हैं.
आईपीएल के पिछले सीज़न राइज़िग सुपरजाइंट्स के लिए खेलते हुए 12 मैच में उन्होंने 13.14 की औसत से 24 विकेट लिए थे.
पर्पल कैप पाने वाले भुवनेश्वर कुमार के बाद वो सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज़ थे. इसके बाद उन्हें श्रीलंका के ख़िलाफ टी 20 टीम के चुना गया जहां उनका फ़ॉर्म बरक़रार रहा.
हाल में प्रदर्शन अच्छा रहा
टी20 में सीरीज़ में उनकी शानदार गेंदबाज़ी के लिए उन्हें 'मैन ऑफ द सिरीज़' चुना गया था. अब तक खेले गए चार टी20 इंटरनेशनल मैचों में 21.75 के औसत से चार विकेट लिए हैं.
उनादकट को अंतिम ओवरों में अपनी कसी हुई स्विंग गेंदबाज़ी और वेरिएशन के साथ स्लो गेंद फेंकने के लिए जाना जाता है.
माना जा रहा है कि ज़हीर ख़ान और आशीष नेहरा के रिटायरमेंट लेने के बाद एक बाएं हाथ के गेंदबाज़ की कमी महसूस की जा रही है, इसी कारण उनकी क़ीमत में उछाल आया.
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