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समकोण आसन: रीढ़ की विकृति दूर करता है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
योग की पाठशाला में ऐसे आसन भी सम्मिलित होने चाहिए जिनके प्रभाव से रीढ़ और पीठ की माँसपेशियों में खिंचाव आए. समकोण आसन शारीरिक अवस्था में सुधार लाता है और रीढ़ की विकृति को दूर करने में सहायक है. जिन्हे कमर या पीठ दर्द हो वे किसी भी प्रकार का आगे झुकने वाला आसन न करें. कैसे करें दोनों पैर मिलाकर खड़े हो जाएं. दोनो हाथों को सामने की ओर से सांस भरते हुए, सिर के ऊपर लेकर आएं. बाजू सीधी रखे और हथेलियों को कलाई मे मोड़ लिजिए. कमर को थोड़ी पीछे करिए ताकि रीढ़ बिल्कुल सीधी हो जाए. अब नियंत्रणपूर्वक सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकिए. शारीर, गर्दन बाज़ूओं को एक सीध में रखिए और तबतक आगे झुकिए जबतक आपका शरीर ज़मीन के समानांतर न हो जाए. इस स्थिति में पाँच सिकेंड तक रुकिए और सामने की ओर देखने का प्रयास करें. इसी प्रकार सांस भरते हुए फिर से शरीर को सीधा कर लिजिए और सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे कर लिजिए. तीन से पांच बार तक समकोण आसन का अभ्यास करना चाहिए. सावधानी श्याटिका और किसी भी प्रकार के कमर दर्द में समकोण आसन आर्थात आगे झुकेने वाला कोई भी आसन नहीं करना चाहिए. फ़ायदा समकोण आसन के अभ्यास से कमर के ऊपर की माँसपेशियों पर विशेषतौर पर प्रभाव पड़ता है. ख़ासतौर पर छाती के पिछले भाग की माँसपेशियां सशक्त होती है. समकोण आसन रीढ़ की विकृति को दूर करता है और इसके नियमित आभ्यास से शारीरिक अवस्था में भी सुधार होता है. भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्रणायाम हमारे पिनियल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन 'मेलाटोनिन' के स्त्राव को नियमित करता है. फलस्वरूप तनाव और क्रोध पर काबू पाया जा सकता है. 'मेलाटोनिन' हार्मोन रात का भोजन करने के दो घंटे के बाद निकलता है और नींदे लाने में सहायक है इसलिए यह कहा जाता है कि सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए. जिन्हें अनिद्रा की समस्या है उन्हे इस बात का विशेष ख़्याल रखना चाहिए और भ्रामरी प्रणायाम के नियमित आभ्यास से अनिद्रा को दूर किया जा सकता है. कैसे करें किसी भी ध्यानात्मक आसन जैसे पदमासन में बैठिए, रीढ़ को सीधा रखें, दोनों हाथों को घुटनों पर रखें. दोनो बाज़ूओं को कंधों की सीध में यानि 180 डिग्री पर लेकर आए फिर दोनों बाज़ूओं को कोहनी से मोड़े और पहली अँगुलि से कानों के छिद्र को बंद कर दिजिए. आँखे बंद कर लिजिए, मन को शांत होने दिजिए. गहरी लंबी सांस भरिए और गले को संकोच कर ले, आर्थात ठुड्डि को कंठकूप से लगाने का प्रयास करें. तत्पश्चात धीरे-धीरे नियंत्रणूर्वक सांस छोड़े और गले से आवाज़ निकालने जैसे भंवरा गुंजन करता है. गले से जो कंपन और तरंग पैदा होगी उसे अपने मस्तिष्क क्षेत्र में भी अंतर्मन से महसूस कर सकते हैं, सुन सकते हैं. गुंजन लयबद्ध, मधुर, धीमा और शुरू से अंत तक एक जैसा होना चाहिए. इस प्रकार एक क्रम पूरा होगा, सुविधानुसार लगातार पाँच बार दोहराईये. सावधानी जिनके कान में किसी भी प्रकार का संक्रमण हो, घाव या दर्द हो तो वे भ्रामरी प्रणायाम नहीं करेंगे. पहले चिकित्सा करवायें फिर डाक्टर की सलाह से योगासन एंव प्रणायाम करें. जिन्हें डिप्रेशन यानि अवसाद की समस्या है या जो अंतमुर्खी प्रतिभा वाले व्यक्ति है उन्हें भ्रामरी प्रणायाम का अभ्यास योग शिक्षक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. भ्रामरी प्रणायाम हमेशा बैठकर ही करना चाहिए, लेटकर इसका अभ्यास नहीं करें. फ़ायदा उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायक है भ्रामरी प्रणायाम. तनाव को भी दूर करता है. भ्रामरी प्रणायाम के अभ्यास से क्रोध और अनिद्रा पर काब़ू पाया जा सकता है. गले संबंधित रोगों में लाभकारी है ये प्रणायाम. थायरॉइड ग्रंथी पर विशेष प्रभाव डालता है. बढ़ते बच्चों के लिए ख़ासकर फ़ायदामंद है. इसके प्रभाव से आवाज़ साफ़ और सशक्त होती है. (योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें [email protected] पर भेज सकते हैं) |
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