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बंद नाक खोले पदाधीरासन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्राणायाम करने से पहले पदाधीरासन का अभ्यास करना चाहिए. क्योंकि बंद नाक खोलने में पदाधीरासन की भूमिका महत्वपूर्ण है. प्राणायाम करते हुए इतना ध्यान रखें कि साँस भरने पर पहले पेट फूलना चाहिए, फिर छाती में और आखिर में कंधे तक साँस भरें. इसी प्रकार साँस छोड़ते हुए पहले कंधे ढीले होंगे, फिर छाती साँस से बाहर आएगी और अंत में पेट पूरी तरह से पिचक जाएगा. विधि पदाधीरासन के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें अर्थात पैरों को घुटनों से मोड़कर इस प्रकार बैठेंगे, जैसे मुस्लिम भाई नमाज पढ़ने के लिए बैठते हैं. इस स्थिति में दाईं हथेली को बाईं काँख में और बाईं हथेली को दाईं काँख में रखकर दबाना चाहिए. अँगूठे को बाहर ही रखेंगे. अँगूठे और पहली उंगली के बीच की जगह को धीरे-धीरे दबाना चाहिए. आँखें बंद कर लें और साँस के प्रति सजग हो जाएँ. जब दायाँ नाक बंद हो तो उसे खोलने के लिए दाईं हथेली को बाईं काँख में दबाएँ और अगर बायाँ नाक बंद हो तो बाईं हथेली को दाईं काँख में दबाएँ. इस क्रिया को 5 से 10 मिनट तक दोहराना चाहिए. जब एक नाक बंद हो या एक ही स्वर चल रहा हो तब पदाधीरासन का अभ्यास करना चाहिए. हालाँकि कुछ ही सेकेंड में दोनों स्वर बराबर चलने लगते हैं अर्थात बंद नाक खुल जाता है. उस स्थिति में भी 1-2 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करना चाहिए. पदाधीरासन के अभ्यास से बंद नाक खोलने में मदद मिलती है. दोनों स्वर एक साथ चलने पर मानसिक स्थिरता आती है और प्राणायाम करने में ज़्यादा आनंद मिलता है. |
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