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तनाव दूर करते हैं शवासन और अदबासन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा मस्तिष्क कभी विश्राम नहीं करता है. हमेशा विचारों से घिरा रहता है. आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हमारे दिमाग पर भी बोझ बढ़ता जा रहा है. इससे बचने के लिए हमें कुछ पल निकालकर शवासन और अदबासन जैसे विश्रात्मक आसन का अभ्यास करना चाहिए. इससे आप शारीरिक और मानसिक थकान को दूर भगा सकते हैं. बस ज़रूरत है आपको प्रयास करने की. जब भी आप योगाभ्यास करें तीन बातों का विशेष ध्यान रखें, पहली है मानसिक सजगता, दूसरी साँस का ध्यान और तीसरी है आप अपनी शारीरिक गतिविधियों को भी अन्तर्मन से देखने की कोशिश करें. शरीर में किसी प्रकार का तनाव न रखें. अगर आप योग का सहारा लेना चाहते हैं तो शवासन और अदबासन के अभ्यास से आप तनावरहित हो जाएँगे. आपका मस्तिष्क भी शांत अर्थात विचार शून्य हो जाएगा. इससे आपके शरीर की बैटरी भी रिचार्ज हो जाएगी. कैसे करें शवासन पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों में डेढ़ फुट का अंतर रखें. दोनों हाथों को शरीर से 15 सेमी की दूरी पर रखें. हथेली का रुख़ ऊपर की ओर होगा. सिर को सहारा देने के लिए तौलिया या किसी कपड़े को दोहरा कर सिर के नीचे रख सकते हैं. इस दौरान यह ध्यान रखें कि सिर सीधा रहे. शरीर को तनावरहित करने के लिए अपनी कमर और कंधों को व्यवस्थित कर लें. शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें. आँखों को कोमलता से बंद कर लें. शवासन करने के दौरान किसी भी अंग को हिलाना-डुलाना नहीं है. आप अपनी सजगता को साँस की ओर लगाएँ और उसे ज़्यादा से ज़्यादा लयबद्ध करने का प्रयास करें. गहरी साँसें भरें और साँस छोड़ते हुए ऐसा महसूस करें कि पूरा शरीर शिथिल होता जा रहा है. शरीर के सभी अंग शांत हो गए हैं. कुछ देर साँस की सजगता को बनाए रखें, आँखें बंद ही रखें और भू-मध्य में एक ज्योति का प्रकाश देखने का प्रयास करें. अगर कोई विचार मन में आए तो उसे साक्षी भाव से देखें, उससे जुड़िए नहीं, उसे देखते जाएँ और उसे जाने दें. कुछ ही पल में आप मानसिक रूप से भी शांत और तनावरहित हो जाएँगे. आँखे बंद रखते हुए इसी अवस्था में आप 10 से 1 तक उल्टी गिनती गिनें. उदाहरण के तौर पर "मैं साँस ले रहा हूँ 10, मैं साँस छोड़ रहा हूँ 10, मैं साँस ले रहा हूँ 9, मैं साँस छोड़ रहा हूँ 9." इस प्रकार शून्य तक गिनती को मन ही मन गिनें. अगर आपका मन भटक जाए और आप गिनती भूल जाएँ तो दोबारा उल्टी गिनती शुरू करें. साँस की सजगता के साथ गिनती करने से आपका मन थोड़ी देर में शांत हो जाएगा. कितनी देर करें शवासन योग की पाठशाला में आप 1 या 2 मिनट तक शवासन का अभ्यास कर सकते हैं. अलग से समय निकाल पाएँ तो 20 मिनट तक शवासन अभ्यास नियमित करना चाहिए. ख़ासकर थक जाने के बाद या सोने से पहले. विशेष बात शवासन के दौरान किसी भी अंग को हिलाएंगे नहीं. सजगता को साँस की ओर लगाकर रखें. अंत में अपनी चेतना को शरीर के प्रति लेकर आएँ. दोनों पैरों को मिलाइए, दोनों हथेलियों को आपस में रगड़िए और इसकी गर्मी को अपनी आँखों पर धारण करें. इसके बाद हाथ सीधे कर लें और आँखे खोल लें. क्या होगा फ़ायदा शवासन एक मात्र ऐसा आसन है, जिसे हर वर्ग और उम्र के लोग कर सकते हैं. यह सरल भी है. पूरी सजगता के साथ किया जाए तो तनाव दूर होता है, उच्च रक्तचाप सामान्य होता है, अनिद्रा को दूर किया जा सकता है. शरीर जब शिथिल होता है, मन शांत हो जाता है तो आप अपनी चेतना के प्रति सजग हो जाते हैं. इस प्रकार आप अपनी प्राण ऊर्जा को फिर से स्थापित कर पाते हैं. इससे आपके शरीर की बैटरी रीचार्ज हो जाएगी. अदबासन जिस प्रकार मंदिरों में प्रभु के दरबार में दंडवत प्रणाम करते हैं यानी कि मत्था टेकते हैं, उसी प्रकार अदबासन करने के लिए हम पेट के बल लेटते हैं, माथा ज़मीन से स्पर्श करते हैं और दोनों हाथों को सिर से आगे की ओर फैलाकर रखते हैं. इस दौरान हथेलि का रुख़ ज़मीन की ओर होना चाहिए.
साँस को सामान्य रखें. लयबद्ध तरीक़े से साँस लें. पेट को फुलाएँ और साँस छोड़ते हुए पेट को पिचकाएँ. अदबासन को आप 1-2 मिनट या जब तक आपको आराम मिले अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं. विशेष बात आप उल्टी गिनती का अभ्यास साँस की सजगता के साथ कर सकते हैं. अपनी चेतना को साँस के साथ लगाकर रखे. शरीर के सभी अंगों को बारी-बारी से शिथिल करते जाएँ. मन में ऐसी धारणा बनाएँ और अपना ध्यान भ्रू-मध्य में लगाकर रखें. क्या होगा फ़ायदा जिन्हें गले के पिछले हिस्से में दर्द या तनाव रहता है या स्लिप डिस्क की समस्या है, ऐसे लोग अगर अदबासन करें तो उन्हें आराम मिलेगा. इस आसन में वे विश्राम भी कर सकते हैं. यह शरीर के सभी अंगों में शिथिलता लाता है. अदबासन मन को शाँत और तनावरहित करने में भी है सहायक. (योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं) |
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