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झूलन-लुढ़कन आसन से मिलती स्फूर्ति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रीढ़ हमारे शरीर का आधार है. योगासन करते समय रीढ़ संचालन के आसनों में सबसे सरल है झूलन-लुढ़कन आसन. इसके अभ्यास से एक नई स्फूर्ति मिलती है. पेट और कमर की माँसपेशियों को सुदृढ़ बनाने के लिए पाद-संचालन आसन भी महत्वपूर्ण है. इस आसन में पैरों को साइकिल की पैडल की तरह चलाना है. यह आसन पेट से संबंधित सभी रोगों को दूर करने में सहायक है. इसे करने से कमर की माँसपेशियों को नई ताक़त मिलती है. कैसे करें सबसे पहले लेट जाएँ. दोनों पैर घुटनों से मोड़ें, घुटनों को छाती की ओर लेकर आएँ और हाथों से पैरों की घुटनी के पास से पकड़ लें.यह इस आसन की प्रारंभिक स्थिति है. पहले साँस भरें और आगे की ओर झूलते हुए साँस छोड़ें और पीछे की ओर लुढ़कते हुए साँस भरें. सिर को बचाकर रखें और कोशिश करें कि आगे की ओर झूलते हुए आप पैरों के बल बैठ जाएँ. इस प्रकार पीठ के बल आगे-पीछे झूलते-लुढ़कते हुए आप रीढ़ के सभी जोड़ों को एक व्यायाम दे सकते हैं.
आपने देखा होगा कि एक-दो साल के छोटे बच्चों को हम पैरों पर लिटा कर झुलाते भी हैं. बस इस आसान क्रिया को एक योगासन का रूप दे दीजिए और रीढ़ की हड्डी एवँ जोड़ों को पहले से ज़्यादा लचकदार और मज़बूत बनाएँ. सावधानी बरतें रीढ़ को ज़्यादा सुरक्षा देने के लिए थोड़ा मोटा कंबल बिछाएँ या कोई पतला गद्दा भी बिछा सकते हैं. पहले से कमर या पीठ में दर्द हो तो इस आसन का अभ्यास न करें. लुढ़कते हुए सिर ज़मीन से न टकराए, इस बात का ध्यान रखें. क्या होगा फ़ायदा? सुबह उठने के बाद सबसे पहले इस आसन का अभ्यास करेंगे तो सारी सुस्ती दूर हो जाएगी. आगे-पीछे झूलने से रीढ़ की मालिश हो जाती है. यह आसन कमर, नितंब और पीठ की चर्बी को कम करता है. इसलिए आमतौर पर जो लोग ज़्यादा देर तक बैठ कर काम करते हैं. जो मोटापे से परेशान हैं, वे इस आसन का पूरा लाभ उठा सकते हैं. पाद संचालन दोहरा कंबल बिछाएँ और पीठ के बल लेट जाएँ. दोनों पैर मिलाते हुए, बाजू सीधी, हथेलियों का रुख़ ज़मीन की ओर रखें. दाएँ पैर को घुटने से मोड़े और साँस छोड़ते हुए दाएँ घुटने को छाती की ओर लेकर आएँ. साँस भरते हुए दाएँ पैर को घुटने को 90 डिग्री तक सीधा करने का प्रयास करें.
इसके बाद साँस छोड़ते हुए दाएँ पैर को बिल्कुल सीधा रखते हुए धीरे-धीरे ज़मीन की ओर लेकर आएँ. एड़ी को ज़मीन से स्पर्श नहीं करेंगे. इस प्रकार पाँच बार एक दिशा में और पाँच बार विपरीत दिशा में दाएँ पैर को साइकिल के पैडल की तरह चलाना है. कुछ देर विश्राम करें और बाएँ पैर से भी पाँच बार एक दिशा में और पाँच बार विपरीत दिशा में पैडल की तरह चलाएँ. पाद संचालन की यह पहली अवस्था है. दूसरी अवस्था में दोनों पैरों को बारी-बारी से चलाना है अर्थात पहले दाएँ पैर से फिर बाएँ पैर से. इस दौरान एड़ी को ज़मीन से स्पर्श नहीं करेंगे. पाद संचालन की तीसरी अवस्था में दोनों पैरों को एक साथ घुटनों से मोड़ें, साँस छोड़ते हुए छाती की ओर लेकर आएँ फिर 90 डिग्री पर दोनों पैरों को सीधा कर लें और साँस भरते हुए दोनों पैरों को एक साथ ज़मीन की ओर लेकर आएँ. एड़ी को ज़मीन से स्पर्श न करें और अपनी शक्ति के अनुसार तीन-चीर बार एक दिशा में और तीन-चार बार विपरीत दिशा में चलाएँ. विशेष बात पैरों को सीधा करते हुए साँस भरें और पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए साँस छोड़ें.
पाद संचालन के लाभ यह आसन घुटनों और कमर के जोड़ों में तनाव कम करता है और स्फूर्ति प्रदान करता है. ख़ास कर पेट की पेशियों को सुदृढ़ करता है. कमर के पीछे की माँसपेशियाँ भी मज़बूत बनती हैं. कब्ज़ दूर होती है. पेट की अतिरिक्त चर्बी कम होती है और पाचन संबंधित सभी विकार दूर होते हैं. (योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं) |
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