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शनिवार, 27 सितंबर, 2008 को 00:00 GMT तक के समाचार
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उत्थान और द्रुट उत्कटासन

उत्थान आसन
उत्थान आसन से पेट और पीठ दोनों को लाभ मिलता है
उत्थान आसन और द्रुट उत्कटासन हमारे पैरों, पीठ और कंधों की पेशियों में महत्वपूर्ण खिंचाव लाता है.

देर तक बैठने से हमारी शारीरिक अवस्था में जो कमी आ जाती है उसे इन दोनों आसनों के अभ्यास से सुधारा जा सकता है.

उत्थान आसन

यह आसन पीठ और कमर की उन माँसपेशियों को सशक्त बनाता है जिनका प्रयोग ध्यानात्मक आसन करने में ज़्यादा होता है.

योग के अभ्यासी को कमर या पीठ दर्द ख़ासकर साइटिका और स्लिप डिस्क की संभावना नहीं रहती. जिन्हें पहले से दर्द हो उन्हें खड़े होने वाले यह आसन नहीं करने चाहिए.

योग शिक्षक की सलाह से अपने शरीरिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए आसनों का चयन करना चाहिए.

विधि

सीधे खड़े रहें, दोनो पैरों में लगभग एक मीटर का अंतर रखिए. दोनों पैरों को बाहर की ओर मोड़िए. दोनों हाथों की अँगुलियों को आपस में मिला लीजिए, बाजू को सीधा और ढीला रखिए. साँस भर लीजिए. यह प्रारम्भिक स्थिति है.

पहली अवस्था: साँस छोड़ते हुए घुटने मोड़े और 30 सेंटी मीटर तक नीचे बैठिए, प्रयास करें कि आगे न झुकें. साँस भरते हुए वापस सीधे खड़े हो जाए.

दूसरी अवस्था: इसी प्रकार साँस छोड़ते हुए आधा मीटर नीचे बैठिए. जब आपकी जंघा ज़मीन के समानांतर हो जाए. उस स्थिति में रुकने का प्रयास करें फिर साँस भरते हुए प्रारंभिक स्थिति में आ जाएँ.

तीसरी अवस्था: इस बार साँस छोड़ते हुए घुटने मोड़ते हुए इतना नीचे बैठिए कि हाथों की अँगुलियाँ ज़मीन से स्पर्श हो जाएँ परन्तु आगे न झुकें, रीढ़ को सीधा रखने का प्रयास करें.

बाज़ुओं को और कंधों को ढीला ही रखें. इस स्थिति में कुछ पल रुकने का प्रयास करें तत्पश्चात साँस भरते हुए वापस प्रारम्भिक स्थिति में आ जाएँ.

सावधानी

गर्भवती महिलाएँ पहले से तीन महीने के बाद पहली और दूसरी अवस्था का ही अभ्यास करें. योग प्रशिक्षक और डाक्टर की सलाह भी ली जा सकती है.

लाभ

नाभि से नीचे पेट का व्यायाम होता है. पीठ के मध्य की माँसपेशियाँ सशक्त होती हैं.

उत्थान आसन के अभ्यास से शरीर की प्राण ऊर्जा का प्रवाह नियमित होता है. आप दिन-भर तरोताज़ा महसूस करते हैं.

पैरों के टखने, घुटने और जंघाओं की कसरत हो जाती है और जोड़ लचीले बनते हैं.

द्रुट उत्कटासन

विधि

सीधे खड़े हो जाएँ, दोनों पैर मिलाकर रखें. दोनों हथेलियों को प्रार्थना अर्थात नमस्कार की मुद्रा में रखिए.

द्रुट उत्कटासन
द्रुट उत्कटासन थकावट दूर करने के लिए बहुत कारगर है

पूरे अभ्यास के दौरान दोनों हथेलियाँ आपस में मिली रहेंगी. अब साँस भरते हुए दोनों बाज़ुओं को कंधों से ऊपर की ओर खींचिए. यह प्रारम्भिक स्थिति है.

पहली अवस्था: साँस छोड़ते हुए घुटने मोड़ें और 30 सेंटीमीटर तक नीचे बैठिए तत्पश्चात साँस भरते हुए फिर से खड़े हो जाएँ. हाथ ऊपर की ओर ही मिले हुए रहेंगे.

दूसरी अवस्था: इसी प्रकार साँस छोड़ते हुए आधा मीटर तक नीचे बैठिए, घुटने और जांघाओं की पेशियों में कंपन को महसूस करें. फिर साँस भरते हुए वापस खड़े हो जाएँ.

तीसरी अवस्था: साँस छोड़ते हुए घुटने मोड़ें और पूरी तरह नीचे बैठ जाएँ, हथेलियों को मिलाकर ऊपर की ओर रखें.

प्रयास करें कि आगे न झुकें. इसी प्रकार साँस भरते हुए वापस खड़े हो जाएँ और बाज़ुओं को सामान्य अवस्था में नीचे कर लीजिए.

सावधानी

गर्भवती महिला इस आसन का अभ्यास कर सकती हैं पर सिर्फ़ पहली और दूसरी अवस्था का अभ्यास करें. पूरी तरह नीचे नहीं बैठना चाहिए.

लाभ

द्रुट उत्कटासन के नियमित अभ्यास से साइटिका, स्लिप डिस्क की संभावना नहीं रहती. इसके अलावा यह आसन पीठ और कमर दर्द में राहत देता है.

यह आसन उन व्यक्तियों के लिए ज़्यादा लाभकारी है जिन्हें ज़्यादा देर बैठ कर काम करना पड़ता है. ज़्यादा बैठने से जब थकान हो जाती है. इस आसन को 4-5 बार करने से थकावट को दूर किया जा सकता है.

कमर, पीठ और पैरों की माँसपेशियाँ मज़बूत बनती है. इसके अलावा टखने, घुटने और जंघाएँ सशक्त होती हैं.

विशेष

शुरू में द्रुट उत्कटासन करने पर पैरों की एड़ियाँ ज़मीन से उठ जाती हैं परन्तु अभ्यास हो जाने पर टखनों की लचक बढ़ जाती है और एड़ियाँ ज़मीन से नहीं उठतीं.

(योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार को सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में सुन सकते हैं. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)

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