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व्यस्त जीवनशैली की क़ीमत! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में व्यस्त जीवन शैली और भौतिकता का असर लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य और पारिवारिक मूल्यों पर नज़र आने लगा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत के उद्योगों में काम करने वाले लोगों की लगभग आधी संख्या मोटापे, ज़्यादा वज़न की शिकार हैं तो क़रीब 27 प्रतिशत संख्या हाईपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप का सामना कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में कामकाजी लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य के बारे में एक सर्वेक्षण कराया है जिसमें यह बात सामने आई है. इस सर्वेक्षण में कामकाज के स्थान से जुड़ी समस्याओं पर भी ग़ौर किया गया है. इस सर्वेक्षण में पता चला है कि कामकाज करने वाले क़रीब 27 प्रतिशत लोग उच्च रक्तचाप से परेशान हैं, क़रीब दस प्रतिशत डायबटीज़ का सामना कर रहे हैं तो लगभग 47 प्रतिशत लोग ज़्यादा वज़न की परेशानी से दो-चार हैं. इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि ये समस्याएँ मुख्य रूप से उन उद्योगों में जो शहरी इलाक़ों में हैं और जहाँ जीवनशैली का गहरे रूप से शहरीकरण हो चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस सर्वेक्षण में सिफ़ारिश की गई है कि कामकाजी लोगों को दिल की बीमारियों से बचने के बारे में स्वास्थ्य प्रशिक्षण दिया जाए और यह आकलन भी किया जाए कि स्वास्थ्य शिक्षा का इन बीमारियों को नियंत्रित करने में कितना योगदान रहता है. इस सर्वेक्षण में भारत के दस विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले लगभग 35 हज़ार कर्मचारियों और उनका परिजनों से बातचीत की गई. ख़ासतौर से 10 से 69 उम्र के लोगों से बातचीत की गई. इसके अलावा बीस हज़ार ऐसे लोगों से भी बात की गई जिन्हें अकस्मात संपर्क किया गया और उनसे स्वास्थ्य और जीवनशैली के बारे में विस्तार से चर्चा की गई. स्वस्थ जीवनशैली इस सर्वेक्षण को नाम दिया गया था - प्रीवेंटिंग कम्यूनिकेबल डिज़ीज़ इन द वर्कप्लेस थ्रू डायट एंड फ़िज़िकल एक्टिविटी यानी खान-पान पर नियंत्रण रखकर और शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाकर कामकाजी स्थानों पर संचारी बीमारियों की रोकथाम.
यह सर्वेक्षण विश्व स्वास्थ्य एसेंबली में सोमवार को जिनेवा में पेश किया गया. इस दस्तावेज़ को विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व आर्थिक फ़ोरम ने मिलजुलकर तैयार किया. इस सर्वेक्षण में ऐसे बहुत से पहलुओं पर प्रकाश डाला गया जो कामकाज के स्थानों पर स्वास्थ्य़ को प्रभावित करते हैं. इस कार्यक्रम में ख़ास ज़ोर इस बात पर दिया गया है कि कामकाज के स्थानों पर रोज़मर्रा की ऐसी आदतों और बर्ताव में बदलाव लाना ज़रूरी है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. इसके उलट स्वास्थ्यवर्धक आदतें और बर्ताव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ख़ासतौर से हृदय संबंधी बीमारियों का सामना करने के प्रयासों के तहत. इस कार्यक्रम में कहा गया है कि लोगों को अपनी शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ानी चाहिए यानी व्यायाम और कसरत को जीवनशैली का नियमित हिस्सा बनाएँ, फल और सब्ज़ियाँ ज़्यादा खाएँ. इस सर्वेक्षण में डायबटीज़, लंबाई और वज़न का तालमेल यानी बीएमआई और हृदय को स्वस्थ रखने पर भी ध्यान दिया गया है. इस कार्यक्रम में कहा गया है कि लोगों को जागरूक बनाने के लिए आकर्षक और प्रभावशाली संदेश प्रसारित करें और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के तमाम प्रयास करें. इसके तहत नियमित तौर पर स्वास्थ्य कक्षाएँ लगें, फ़िल्में दिखाई जाएँ, सेमिनार हों, लोगों को आपस में बहस-मुबाहिसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. इस कार्यक्रम के तहत अनेक देशों में ये तरीक़े अपनाए भी गए जिनका लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर देखा गया. |
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