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जंक फ़ूड विज्ञापनों के ख़िलाफ़ अभियान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बच्चों के बीच जंक फ़ूड का विज्ञापन कर रही कंपनियों के लिए एक बुरी ख़बर है. विश्व स्तर पर जंक फ़ूड का प्रचार कर रही कंपनियों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया गया है. पूरी दुनिया से तक़रीबन 50 उपभोक्ता समूहों ने टीवी और इंटरनेट पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों के ख़िलाफ़ कमर कस ली है. इनका कहना है कि इस तरह के विज्ञापन दिखाए जाने के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए. यूरोप और दूसरे पश्चिमी देशों में जंक फ़ूड के विज्ञापन टीवी और इंटरनेट पर दिखाए जाने के लिए पहले से ही क़ानून मौजूद हैं. इन नियमों के अनुसार ऐसी तमाम खाने-पीने की चीज़ों के विज्ञापनों पर सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए जिनमें बहुत ज़्यादा चर्बी, शक्कर और नमक की मात्रा होती है. इसके अलावा इन समूहों ने जंक फ़ूड जैसे खाद्य पदार्थ बनाने वाली कंपनियों से गुज़ारिश की है कि वो अपने विज्ञापनों में मशहूर हस्तियां या कार्टून किरदारों को शामिल न करें. वहीं, इन कंपनियों को आगाह किया गया है कि वो विज्ञापन के लिए किसी तरह की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने या मुफ़्त तोहफ़े बांटने का लालच भी न दें. जंक फ़ूड के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे इस समूह ने मांग की है कि स्कूलों के आस-पास चर्बीयुक्त, तली हुई, चटपटी और मसालेदार चीज़ों की बिक्री पर पाबंदी लगाई जाए. हालांकि, ब्रितानिया के खाद्य पदार्थ बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि ये किसी समस्या का हल नहीं है. मोटापे के आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि 2015 तक पूरी दुनिया में मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियाँ एक परेशानी बनकर सामने आने वाली हैं.
संगठन के मुताबिक़ पूरी दुनिया में इस वक्त तक़रीबन पौने दो करोड़ बच्चे कम उम्र में वज़न बढ़ने यानी मोटापे से परेशान हैं. आंकड़ों की मानें तो आने वाले सात सालों में 15 साल से ज़्यादा उम्र के तक़रीबन ढाई अरब लोग वज़न बढ़ जाने की परेशानी से दो-चार होने वाले हैं. लंदन की 'इंटरनेश्नल ओबेसिटी टास्क फ़ोर्स' का मानना है, "इस सब के लिए जंक फ़ूड और सॉफ़्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं, जो हर साल अरबों रुपए इनके विज्ञापन पर खर्च करती हैं." इस संस्था के प्रमुख प्रोफ़ेसर फ़िलिप जेम्स का कहना है, 'हम चाहते हैं कि सरकारों के अलावा खान-पान की चीज़ें बनाने वाली कंपनियां भी हमारे इस अभियान में हमारा सहयोग करें. वो हमारी इस मुहिम में परेशानी बनने की बजाए इस मुश्किल का हल बनें.' इस अभियान को चला रही कंपनियों में से एक कंपनी के मुख्य नीति अधिकारी स्यू डेवीज़ का कहना है, "मोटापे और असंतुलित खान-पान की वजह से बढ़ रही परेशानियों में कमी लाने के लिए ज़रूरी है कि खाद्य कंपनियां बच्चों के बीच बेची जा रही चीज़ों के बीच ज़िम्मेदारी से विज्ञापन नीतियों को अपनाएं." यूरोप में क़ानून यूरोप के कई देशों की ही तरह ब्रितानिया में भी खान-पान की चीज़ें बेचने वाली कंपनियों पर विज्ञापन को लेकर कुछ पाबंदियां हैं.
ब्रितानिया के 'टेलीविज़न रेगुलेटर- ऑफ़कॉम' के क़ानूनों के मुताबिक़ टीवी पर प्रसारित होने वाले बच्चों के किसी भी कार्यक्रम के दौरान जंक फ़ूड के किसी भी विज्ञापन को नहीं दिखाया जा सकता. ये क़ानून वहां इसी साल जनवरी से लागू किए गए हैं. ब्रितानिया में खाद्य और पेय पदार्थ कंपनियों के संगठन के प्रवक्ता का कहना है जहां तक विज्ञापनों का संबंध है, पूरे यूरोप में सबसे ज़्यादा पाबंदियां झेलने वाली कंपनियां हम ही हैं. 'हम इन नए क़ानूनों के मुताबिक़ खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन विज्ञापनों में इस तरह की पाबंदियाँ लगाए जाने से सारी समस्या हल नहीं हो जाएगी.' |
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