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बाबा रामदेव का योग और उनके बड़े-बड़े दावे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
देश में नेताओं, उद्योगपतियों और फ़िल्मी कलाकारों से इतर जो चेहरे 2004 में लोकप्रिय हुए हैं, उसमें एक नाम बाबा रामदेव का भी है. बाबा रामदेव के पास तरह-तरह के दावे हैं, आधुनिक विज्ञान को लेकर सवाल हैं, चिकित्सकों के लिए चुनौतियों से भरी मुद्रा है और इन सबसे प्रभावित लाखों की भीड़ है. हालाँकि चिकित्सक मानते हैं कि उनके दावों में अतिशयोक्ति है और बीमारियों के लिए आख़िरकार चिकित्सा विज्ञान की शरण में ही आना पड़ता है. राष्ट्रपति एपीजे कलाम उनके प्रशंसक हैं तो उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत उनके शिविर में शामिल होते हैं. देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी परेशानियों को लेकर उनके आश्रम में पहुँचते हैं. देश के अनेक नेता, फ़िल्म कलाकार, उद्योगपति भी उनके योग का 'लाभ' उठा रहे हैं. यहाँ तक कि देश के अलग-अलग राज्यों द्वारा स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में परिवर्तन के लिए उनकी राय ली जा रही है. योग की कुंजी योग में ही समस्त परेशानियों की कुंजी तलाशने की बात करने वाले बाबा रामदेव कहते हैं- “हम जो कुछ करते हैं, सब के सामने करते हैं. हमने योग से रहस्य की परतें हटाईं, इसे हम जनता के बीच लेकर आए. आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है और आज लगभग 20 करोड़ लोग मुझसे जुड़ कर योग का लाभ ले रहे हैं.”
मोटापा, रक्तचाप, पक्षाघात, मधुमेह जैसी तमाम तरह की बीमारियों पर क़ाबू पाने का दावा करके लोगों को अपने शिविर में बुलाने वाले बाबा रामदेव का कहना है कि उनके योग से अब तक हज़ारों लोग स्वस्थ हो गए हैं. शिविर में योगाभ्यास के दौरान हर दसवें मिनट पर ऐसे दर्जनों स्वस्थ लोगों को वे सामने ला कर उनसे सवाल-जवाब करके उपस्थित लोगों को योग से अधिकाधिक जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं. योग के सहारे जीवन बदल देने का दावा करने वाले हरिद्वार स्थित दिव्य योग मंदिर के प्रमुख बाबा रामदेव देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार योग शिविरों का आयोजन कर रहे हैं. आलम यह है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और उसके बाद बिलासपुर में चल रहे एक-एक सप्ताह के योग शिविर में कड़कड़ाती ठंढ के बीच सुबह तीन बजे से ही हज़ारों लोगों का हुजूम उमड़ता रहा. रामदेव बाबा को राजकीय अतिथि का दर्जा देने वाले पेशे से डॉक्टर, राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने सभी मंत्रियों को रामदेव बाबा के योग शिविर में शामिल हो कर अपना घमंड दूर करने की हिदायत दी थी. राजनीति नहीं दिग्गज नेताओं से हर रोज़ होने वाली उनकी मुलाक़ातों के कारण भी एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि आने वाले दिनों में रामदेव किसी राजनीतिक पार्टी का दामन ज़रुर थामेंगे. ऐसा न हो तो भी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल ज़रूर करेंगी.
लेकिन योगाभ्यास के दौरान बीच-बीच में नेताओं की तरह धर्मांधता, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद, भ्रष्ट राजनीति, जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स, ज्योतिष, पुरुष मानसिकता और देश की आर्थिक स्थिति के बारे में अपने विचार रखने वाले बाबा रामदेव राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं रखते. दूसरी ओर उन्हें आध्यात्म के नाम पर पाखंड करने वाले बाबाओं, गुरुओं और अवतारों से गहरी चिढ़ भी है. रामदेव का कहना है कि वे कोई वाद या पंथ चला कर धंधा नहीं करना चाहते. हालाँकि उनको भी दूसरे लोगों की तरह 'परम पूज्य स्वामी बाबा रामदेव जी महाराज' कहलाने से कोई गुरेज नहीं है. वह कहते हैं- "मैं तो योग से ही ऐसा काम कर रहा हूँ कि आने वाले दिनों में देश में एक बड़ी क्रांति आएगी. योग एक संपूर्ण चिकित्सा शास्त्र है. मैं योग को विज्ञान के मापदंड के अनुसार स्थापित करना चाहता हूँ." उनका दावा है, "हेपेटाइटिस बी, सिरोसिस ऑफ लिवर, हार्ट ब्लाकेज जैसी बीमारियों पर क़ाबू पाने के मेरे पास हज़ारों उदाहरण हैं. देश के लोग स्वस्थ होंगे तो देश में एक नई क्रांति आनी तय है. अपने शिविर में आने वाले सब लोगों को कहता हूँ कि अपनी चिकित्सकीय जाँच पहले करवाएँ और फिर योग करने के बाद जाँच कराएँ." योग चिकित्सा और दवा दुकान बाबा रामदेव बार-बार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और दवाइयों की सीमा का उल्लेख करते हुए यह कहना नहीं भूलते कि योगाभ्यास करने वालों के लिए किसी भी तरह की दवाइयों की ज़रुरत नहीं पड़ती है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भले ही एड्स की दवा नहीं तलाश कर पाया हो, रामदेव बाबा का दावा है कि उनके पास इसके लिए भी देसी उपाय हैं, दवाइयाँ हैं, आसन हैं और प्राणायाम तो है ही. रामदेव कहते हैं- “दवा और घातक हथियारों का व्यापार दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. इसका मुक़ाबला योग से ही संभव है क्योंकि विभिन्न तरह के प्राणायाम रोगों पर क़ाबू पाने के लिए पर्याप्त हैं और प्राणायाम करने वाला कभी अपराध कर ही नहीं सकता.” हालाँकि दवाओं के ख़िलाफ़ बातें करने वाले बाबा रामदेव ने ख़ुद 42 आयुर्वेदिक दवाइयाँ पेटेंट करा रखी हैं और उनके दिव्य योग ट्रस्ट द्वारा सैकड़ों विभिन्न तरह की औषधियों का निर्माण और विक्रय किया जाता है. बाबा रामदेव जहाँ कहीं भी योग शिविर लगाते हैं, योग शिविर के बाहर दिव्य योग ट्रस्ट की औषधियों की दुकान ज़रुर लगाई जाती है. ज़ाहिर है, इस दुकान में दवाइयों की ख़रीद के लिए लोगों का रेला लगा हुआ है. डाक्टरों की राय रायपुर के शिविर में लगभग 20 हज़ार लोगों में से कुछ लोगों का चयन कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने वाले ह्रदय रोग विशेषज्ञ जी बी गुप्ता बताते हैं, “लोगों के स्वास्थ्य पर शिविर के प्रभाव जानने के लिए हमने 326 लोगों का चयन किया था. मधुमेह के मरीजों के परीक्षण में हमने पाया कि एक सप्ताह में ही लोगों का शुगर घटा है, रक्तचाप में सुधार आया है. 139 लोगों में से 115 का मोटापा भी घटा.” छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास के ख़िलाफ कई वर्षों से काम कर रहे अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष और चिकित्सक डॉ. दिनेश मिश्रा की राय है कि रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा जैसी बीमारियों में सामान्यतः चिकित्सक भी मरीज़ को व्यायाम करने की सलाह देते हैं. "बाबा रामदेव भी वही कर रहे हैं और इसके लाभ भी हैं लेकिन इसकी भी सीमा है." डॉ. मिश्र कहते हैं, "बाबा रामदेव के दावे में अतिश्योक्ति अधिक है. सर्जिकल मामले में योग के बजाय अंततः आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की शरण में ही आना पड़ता है. एक उम्र के बाद शरीर की संरचना में जो परिवर्तन आते हैं, उनको रोक पाना भी संभव नहीं है." |
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