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सोमवार, 13 नवंबर, 2006 को 16:41 GMT तक के समाचार
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डायबिटीज़ के बढ़ते ख़तरे पर चेतावनी
मोटापा
विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे के कारण डायबिटीज़-2 होता है
ऑस्ट्रेलिया में हुए एक स्वास्थ्य सम्मेलन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डायबिटीज़ के तेज़ी से फैलने के कारण इस सदी के अंत तक कुछ समुदायों का अस्तित्त्व ख़त्म हो सकता है.

इस सम्मेलन की मेजबानी करने वाले प्रोफ़ेसर पॉल ज़िमेट का कहना है इतिहास में पहली बार दुनिया इतनी ख़तरनाक बीमारी से जूझ रही है.

तेज़ी से फैल रहे पाश्चात्य रहन-सहन, खाने-पीने की आदत और अनुवांशिक गुणों के कारण विश्व के कुछ देशों के लोगों को डायबिटीज़ होने का ख़तरा अन्य देशों की तुलना में ज़्यादा है.

डायबटीज-टू की शुरुआत मोटापे से होती है. सम्मेलन में यह जानकारी भी दी गई कि डायबिटीज़ के कारण हर 10वें सेकेंड एक व्यक्ति की मौत हो जाती है और 30वें सेकेंड में एक नया व्यक्ति इस रोग की गिरफ़्त में आ जाता है.

डायबीटीज के संबंध में इस तीन दिवसीय सम्मेलन का लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र की ओर से उठाए जाने वाले क़दमों की रूपरेखा तैयार करना है ताकि डायबिटीज़ का ख़ात्मा किया जा सके

चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि इस ख़तरे के संबंध में जल्द ही ज़रूरी क़दम उठाने होगें.
इन विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड और अमरीका में रहने वाले देसी लोग आसानी से डायबिटीज़ की गिरफ़्त में आ जाते हैं.

लेकिन इन्हीं देशों में रहने वाले यूरोपीय लोगों में यह बीमारी उतनी नहीं. एक अध्ययन के अनुसार ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागरीय इलाक़ों में रहने वाला हर तीसरा व्यक्ति डायबीटीज़ के सबसे आम रूप डायबटीज़-टू से पीड़ित है.

 इन देशों की जलवायु के कारण यहाँ के लोगों में डायबिटीज़ टाइप टू के लक्षण तेज़ी से पनपते हैं. इस स्थति से निपटने के लिए हमें पर्यावरण सुधारना होगा. साथ ही इन देशों के लोगों को अपने भोजन और व्यायाम के तरीक़ों में भी बदलाव लाना होगा
प्रोफ़ेसर पॉल ज़िमेट

प्रोफेसर पॉल ज़िमेट ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि लोगों के अनुवांशिक गुण और रहन-सहन के तरीक़ों के कारण इन इलाक़ों में डायबिटीज़ का प्रसार ज़्यादा है.

ज़िमेट ने बताया,"इन देशों की जलवायु के कारण यहाँ के लोगों में डायबिटीज़ टाइप टू के लक्षण तेज़ी से पनपते हैं. इस स्थति से निपटने के लिए हमें पर्यावरण सुधारना होगा. साथ ही इन देशों के लोगों को अपने भोजन और व्यायाम के तरीक़ों में भी बदलाव लाना होगा."

वैसे भी इन देशों में स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर नहीं. डायबिटीज़ टाइप-2 अधिकतर उम्रदराज़ लोगों को अपना शिकार बनाता है. लेकिन इन देशों में किशोर और बच्चे भी इस बीमारी से दूर नहीं हैं.

गर्भवती महिलाओं में भी यह बीमारी तेज़ी से फैल रही है. इसका मतलब ये हुआ कि पैदा होने वाले बच्चों में भी डायबिटीज़ की संभावनाएँ बढ़ गई हैं.

पीढ़ियों में पनप रही यह बीमारी सबसे ज़्यादा चिंता का विषय है. विशेषज्ञों ने संयुक्त राष्ट्र से निवेदन किया है कि डायबिटीज़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य समस्या घोषित किया जाए.

डायबिटीज़ समय से पहले मृत्यु की बड़ी वजह है. ऐसा डायबिटीज़ से होने वाले हृदय रोगों के कारण होता है.

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