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रविवार, 24 जून, 2007 को 18:28 GMT तक के समाचार
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एचआईवी संक्रमण पर उठे सवाल
एचआईवी से संक्रमित कोशिका
वैज्ञानिकों का कहना है कि एचआईवी-एड्स की मौजूदा अवधारण ठीक नहीं है
वैज्ञानिकों ने एचआईवी संक्रमण की उस अवधारणा पर सवाल उठाए हैं जिसके मुताबिक एचआईवी का वायरस धीरे-धीरे संक्रमित व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट कर देता है.

एचआईवी के संक्रमण के बारे में अभी तक अवधारणा यह है कि एचआईवी वायरस शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर हमला करते हैं.

टी हैल्पर के नाम से भी जाने जानेवाली प्रतिरक्षा कोशिकाएँ धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं.

शरीर की सभी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के नष्ट होने में कुछ वर्षों का समय लग जाता है.

यह माना जाता रहा है कि एचआईवी संक्रमित कोशिकाओं से और अधिक एचआईवी वायरस तैयार होते थे.

इससे निपटने के लिए शरीर में बड़ी संख्या में प्रतिरक्षा कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं जो ख़ुद भी संक्रमित हो जाती थीं और नष्ट हो जाती थीं.

इस प्रचलित अवधारणा पर सवाल उठाया है लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं के एक दल ने.

इस दल की ओर से पेश किए मॉडल के मुताबिक अगर घोषित अवधारणा को सही मानें तो प्रतिरक्षा कोशिकाओं को वर्षों नहीं बल्कि कुछ महीनों मे ही ख़त्म हो जाना चाहिए.

इन शोधकर्ताओं ने एक गणितीय मॉडल की मदद से यह समझाने की कोशिश की है कि शरीर में टी कोशिकाओं का निर्माण किस तरह होता है.

इसी के आधार पर उन्होंने बताया है कि टी कोशिकाओं की सक्रियता और संक्रमण, एचआईवी वायरस तैयार करने और कोशिकाओं के नष्ट होने का अभी तक का प्रचलित मॉडल ग़लत है.

अध्ययन की ज़रूरत

इस प्रकाशित शोधपत्र में यह भी कहा है कि प्रचलित मॉडल इस बात को समझा पाने में असमर्थ है कि एचआईवी का संक्रमण प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट करने में वर्षों का समय क्यों लेता है.

 अगर इसे समझा जा सके कि किस तरह से एचआईवी वायरस श्वेत रक्त कणों को प्रभावित करता है तो इससे इस रोग के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण काम हो सकता है
प्रोफ़ेसर जेरोस्लाव स्टार्क

शोधकर्ताओं के इस दल का मानना है कि संक्रमण फैलने की धीमी गति के पीछे एक संभव कारण यह भी हो सकता है कि एचआईवी वायरस को संक्रमण के दौरान अनुकूल होने में ख़ुद काफ़ी समय लगता हो.

हालांकि इनका कहना है कि इस वैकल्पिक अवधारणा की पुष्टि के लिए अलग से विश्लेषण करने की ज़रूरत है.

शोधकर्ता प्रोफ़ेसर जेरोस्लाव स्टार्क कहते हैं, '' अगर इसे समझा जा सके कि किस तरह से एचआईवी वायरस श्वेत रक्त कणों को प्रभावित करता है तो इससे इस रोग के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण काम हो सकता है.''

एचआईवी उपचार पर काम कर रहे एक ट्रस्ट के सलाहकार रोगर पेबॉडी कहते हैं कि एचआईवी एक बहुत ही जटिल किस्म का वायरस है और इसे लेकर अब भी शोध जारी है कि यह किस तरह से काम करता है.

उन्होंने कहा कि किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले इस दिशा में और अध्ययन करने की ज़रूरत है.

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