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एचआईवी के टीके के लिए 30 करोड़ डॉलर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एचआईवी के निपटने के लिए टीका बनाने के प्रयासों को तेज़ करने के लिए बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन ने कोई 30 करोड़ डॉलर का दान देने की घोषणा की है. इस दानराशि से शोध टीमों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जाएगा जो टीका विकसित करने की नए तरीक़े तलाशने के प्रयास करेगा. इससे पहले गेट्स फ़ाउंडेशन मलेरिया और टीबी से निपटने के लिए करोड़ो डॉलर की सहायता दे चुका है. वैसे एचआईवी वायरस की पहचान को 25 वर्ष हो गए लेकिन वैज्ञानिक अभी भी इसका प्रभावशाली टीका विकसित करने के लिए जूझ रहे हैं. कई मानवीय परीक्षणों के बाद भी अब तक किसी एचआईवी टीके को सफलता नहीं मिली है. इसका कारण यह है कि एचआईवी वायरस सीधे मानव के प्रतिरोधक क्षमता पर ही वार करता है और उसे नष्ट कर देता है जबकि कोई भी टीका मानव शरीर में प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर ही कार्य करता है. साझा प्रयास गेट्स फ़ाउंडेशन ने 28.7 करोड़ डॉलर का दान घोषित करते हुए उम्मीद जताई है कि फ़ाउंडेशन पूरी दुनिया के प्रयासों को संयोजित कर सकेगा. फ़ाउंडेशन 19 देशों के 165 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नई अभिनव रणनीति बनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करेगा. इस राशि से जिन परियोजनाओं को धनराशि मिलनी है उसमें यह भी है कि मनुष्यों और जानवरों में पाए जाने वाले एंटीबॉडीज़ (प्रतिरोधकों) को मिलाकर देखा जाए कि क्या वे मिलकर एचआईवी को ख़त्म कर सकते हैं. इसके तहत उस परियोजना को भी राशि दी जाएगी जिसमें चेचक से जुड़े वायरसों को संभावित टीके के रुप में आजमाकर देखा जाए. फ़ाउडेशन का कहना है कि वे ऐसी योजनाएँ भी बना रहे हैं जिससे विकासशील देशों को भी शोध का फ़ायदा पहुँचाया जा सके. उल्लेखनीय है कि इस समय दुनिया में 70 करोड़ डॉलर से भी अधिक राशि एचआईवी का टीका विकसित किए जाने के शोध में खर्च हो रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह राशि ज़रुरत की राशि की तुलना में आधी है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत में हैं सर्वाधिक एचआईवी रोगी30 मई, 2006 | विज्ञान टीबी से निपटने में बिल गेट्स की पहल27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना एड्स के टीके के परीक्षण का दूसरा दौर05 जुलाई, 2005 | विज्ञान एड्स के टीके का सफल परीक्षण20 अप्रैल, 2005 | विज्ञान नाइजीरिया एड्स की सस्ती दवा बनाएगा28 जुलाई, 2004 | विज्ञान 'ऐंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ भारत में भी मुफ़्त'30 नवंबर, 2003 | विज्ञान एड्स की नई दवाइयों से जीवन वृद्धि17 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान मलेरिया के लिए करोड़ों डॉलर22 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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