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एड्स के टीके का सफल परीक्षण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एचआईवी-एड्स निरोधक टीकों का पहली बार स्वस्थ व्यक्तियों पर सफल परीक्षण किया गया है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के अनुसार पुणे में 10 व्यक्तियों पर एचआईवी-एड्स निरोधक टीके का परीक्षण किया. उनका कहना था कि यदि कोई रुकावट नहीं आई तो अगले पाँच वर्षों में इसका टीका बाज़ार में आ जाएगा. आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर एन के गांगुली ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि द एदेनो एसोसिएटेड वेक्टर बोर्न वैक्सीन (एवी) के पहले चरण का पुणे में परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. उन्होंने घोषणा की कि यदि सब ठीक चलता रहा तो वैक्सीन पाँच साल में उपलब्ध हो जाएगी. इस टीके के परीक्षण अनेक देशों में एक साथ चल रहे हैं. इसी तरह के परीक्षण जर्मनी और बेल्जियम में पहले ही चल रहे हैं. आरंभिक नतीजों के अनुसार ये परीक्षण एड्स वायरस से बचाव की दृष्टि से काफ़ी कारगर माने जा रहे हैं. जाँच आईसीएमआर के महानिदेशक का कहना था कि इस टीके के जिन लोगों पर परीक्षण किए जा रहे हैं, उनकी सेहत की बराबर जांच की जा रही है. उनका कहना था कि अगले 10 व्यक्तियों पर परीक्षण से पहले पुराने कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य की जाँच की जाएगी. उन्होंने कहा कि एड्स निरोधक टीके के परीक्षण के पहले चरण में 30 कार्यकर्ताओं पर परीक्षण किया जाएगा. इन परीक्षणों के असर की जाँच के बाद अगले चरण के परीक्षणों पर विचार किया जाएगा. ये परीक्षण एड्स वायरस के भारत में सबसे ज़्यादा फैले स्ट्रेन सी-टाइप को ध्यान में रख कर किए जा रहे हैं. भारत में एड्स के 90 फीसदी मामलों में यही स्ट्रेन सी-टाइप देखा गया है. भारत में एचआईवी वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या 50 लाख से भी ज़्यादा है. आईसीएमआर के महानिदेशक का कहना था कि आँकड़ों के लिहाज से यह बड़ी संख्या है लेकिन प्रतिशत के हिसाब से अफ़्रीका से बहुत कम है. |
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