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भारत में एड्स 'नियंत्रण से बाहर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में एचआईवी एड्स की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन ग्लोबल फ़ंड टू फ़ाइट एड्स ने आगाह किया है कि भारत में यह महामारी "नियंत्रण से बाहर" हो चुकी है. लेकिन भारत के एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) ने इसका खंडन किया है. ग्लोबल फ़ंड के कार्यकारी निदेशक रिचर्ड फ़ीशेम ने कहा है कि यह महामारी भारत में तेज़ी से फैल रही है और इसे रोकने के लिए ठोस क़दम नहीं उठाए गए हैं. फ़ीशेम ने चेतावनी दी कि एड्स के फैलाव के बारे में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को भी पीछे छोड़ दिया है. ग़ौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी/एड्स के मरीज़ों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है. उन्होंने आगाह किया है कि यह महामारी इतनी तेज़ी से फैल रही है कि भारत को जागने की और इस समस्या की गंभीरता को समझने की ज़रूरत है अन्यथा लाखों लोग मौत के मुँह में चले जाएंगे. फ़ीशेम ने कहा, "भारत में यह महामारी तेज़ी से फैल रही है और नियंत्रण के बाहर हो चुकी है. इसे रोकने के लिए भारत में कुछ भी बड़ा या गंभीर नहीं हो रहा है." सरकारी आँकड़े रिचर्ड फ़ीशेम ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "सरकारी आँकड़े दिखाते हैं कि एचआईवी - एड्स के फैलाव के मामले में भारत दक्षिण अफ्रीका के बाद दूसरे स्थान पर आता है लेकिन सरकारी आँकड़े ग़लत हैं. भारत पहले स्थान पर है." लेकिन भारतीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) के महानिदेशक डॉक्टर एस वाई कुरैशी ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच इस संख्या के मामले में तुलना करना सही नहीं है. संयुक्त राष्ट्र संस्था यूएनएड्स ने जुलाई, 2004 में जो आँकड़े जारी किए थे उनके अनुसार दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी से संक्रमित लोगों / एड्स के मरीज़ों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है.
उन आँकड़ों में बताया गया था दक्षिण अफ्रीका में क़रीब 53 लाख वयस्क इसके मरीज़ हैं और संक्रमित बच्चों की संख्या 45 लाख से बासठ लाख के बीच है. भारत में एचआईवी / एड्स से संक्रमित लोगों की संख्या क़रीब 51 लाख बताई गई थी लेकिन भारत में यह संख्या 25 लाख से 85 लाख तक हो सकती है क्योंकि एचआईवी संक्रमण के बारे में पूरे आँकड़े हासिल नहीं हो सके थे. रिचर्ड फ़ीशेम ने चेतावनी के अंदाज़ में कहा कि यह बीमारी भारत में मुसलमानों के मुक़ाबले हिंदुओं में तेज़ी से बढ़ेगी क्योंकि मुसलमानों की ख़तना होती है जो एड्स के विषाणु को रोकने के लिए "एक सर्वस्वीकृत संरक्षण तरीक़ा" है. फ़ीशेम का कहना है कि भारत में एचआईवी का संक्रमण सबसे ज़्यादा पेशेवर यौन कर्मियों के साथ यौन संबंध बनाने से होता है. फ़ीशेम कहते हैं कि समस्या और गंभीर इसलिए हुई है क्योंकि लोगों को एचआईवी के ख़तरों के बारे में जानकारी नहीं है. उन्होंने इस बात के लिए भी आलोचना की कि भारत में एचआईवी की रोकथाम वाली दवाइयाँ बहुत महंगी हैं. फ़ीशेम कहते हैं, "भारत में बनी कोई दवाई ख़ुद भारत के बजाय दक्षिण अफ्रीका में आसानी से मिल जाती है. यह सीधे-सीधे घोटाला है और इसे बदला जाना चाहिए." जानकारी का अभाव ग्लोबल हैल्थ फ़ंड की स्थापना 2001 में दुनिया के विकसित संगठनों के संगठन जी-8 ने की थी जिसका मक़सद एचआईवी/एड्स, मलेरिया और टीबी से प्रभावित देशों को धन देना था. यह संगठन एचआईवी के संक्रमण को रोकने की परियोजनाओं के लिए धन देता है लेकिन ऐसा लचीलापन भी रखा गया है जिसमें इलाज के लिए भी धन दिया जा सकता है. ग्लोबल फ़ंड ने 127 देशों में 300 से ज़्यादा स्वास्थ्य परियोजनाओं के लिए तीन अरब डॉलर से ज़्यादा धन दिया है. इनमें एचआईवी/एड्स, मलेरिया और टीबी की रोकथाम वाली परियोजनाएँ शामिल हैं. |
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