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भारत में एड्स के मामलों में बढ़ोत्तरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने एचआईवी संक्रमण के नए आँकड़े जारी किए हैं. इसमें पिछले साल के मुक़ाबले पचास हज़ार मामलों की बढ़ोत्तरी हुई है. एड्स का जानलेवा वायरस एचआईवी भारत में अब 51 लाख छह हज़ार लोगों को जाल में फँसा चुका है. भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, नैको ने एड्स मामलों पर 2003 दिसंबर तक के नए आँकड़े जारी किए हैं. प्रभावितों की इस नई संख्या का मतलब है कि आगे चलकर इन्हीं को पूरी तरह एड्स हो जाने का ख़तरा है. दक्षिण अफ़्रीका में दुनिया के सबसे ज़्यादा एचआईवी पॉज़िटिव लोग हैं और दूसरे नंबर पर है भारत. भारत की पूरी जनसंख्या का 0.9 प्रतिशत हिस्सा अब एचआईवी से संक्रमित है. लेकिन शुक्रवार को इन नए आंकड़ों को जारी करते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की प्रमुख मीनाक्षी दत्ता घोष ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले एचआईवी मामलों की बढ़ोत्तरी की दर में कमी आई है. उन्होंने कहा 2001-2002 में एचआईवी मामलों में 610,000 की बढ़ोत्तरी हुई थी लेकिन 2002-2003 में केवल 520,000 की बढ़ोत्तरी हुई है. नाको की प्रमुख मीनाक्षी दत्ता घोष ने यह भी कहा कि क्योंकि भारत में अब भी जनसंख्या का एक प्रतिशत से कम हिस्सा एचआईवी से प्रभावित है इसलिए स्थिति अब भी उन देशों से कहीं बेहतर है जहाँ एड्स जनसंख्या के बड़े हिस्से तक पहुँच गया है. जो बातें आशाजनक हैं वे यह कि घोष के अनुसार भारत के जिन राज्यों में हालत ज़्यादा ख़राब थी वहाँ स्थिति निंयत्रण में है यानि वहाँ बीमारी का फैलना बहुत तेज़ी से नहीं बढ़ा है. लेकिन ध्यान देने लायक बात है कि शहरों के मुकाबले नए मामले तेज़ी से गाँवो में सामने आ रहे हैं और कुल एचआईवी पॉज़िटिव मामलों में 36 प्रतिशत महिलाएं हैं. यानि गाँवों में, और ख़ासकर महिलाओं में इस बीमारी का ख़तरा बढ़ा है. साथ ही समलैंगिक पुरूषों और इंजेक्शन से नशीली दवाएँ लेने वाले लोग आज भी एचआईवी के सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों में से हैं. |
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