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बुधवार, 26 नवंबर, 2003 को 00:16 GMT तक के समाचार
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भारत में एड्स की समस्या पर चिंता
एड्स की दवा
भारत जैसे विकासशील देश में एड्स की दवा सस्ते में उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है

पिछले किसी भी साल की तुलना में वर्ष 2003 में दुनिया भर में एचआईवी से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है.

इस वर्ष एचआईवी की चपेट में आने वाले क़रीब 50 लाख लोगों में से लगभग 30 लाख लोगों की जानें जा चुकीं हैं.

अफ़्रीका इस रोग के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में है.

लेकिन रोग के फ़ैलाव को देखते हुए ये आकलन किया जा रहा है कि आने वाले समय में एड्स से प्रभावित होने वालों की संख्या भारत और चीन में बहुत अधिक बढ़ सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चीन में एचआईवी से संक्रमित होने वाले बहुत से रोगियों का अभी बीमार पड़ना बाकी है.

उनका कहना है कि फ़िलहाल एड्स की रोकथाम के लिए इन देशों में उपयुक्त व्यवस्था की कमी है और आने वाले समय में इन देशों में एड्सग्रसित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है.

 मैं सभी विशेषज्ञों को ग़लत सिद्ध कर दूँगी.आप बस अगले साल तक की प्रतीक्षा करें.

भारतीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज

हालांकि भारत की स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने अपना विरोध जताते हुए विशेषज्ञों को ग़लत बताया और अपने सरकार की वक़ालत की.

उन्होंने कहा,"मैं सभी विशेषज्ञों को ग़लत सिद्ध कर दूँगी.आप बस अगले साल तक की प्रतीक्षा करें.जिस तरह से हमलोग इस रोग की रोकथाम की कोशिशें कर रहे हैं,भारत में इसका एक महामारी के रूप में ऊभर पाना असंभव है."

दूसरी तरफ़ संयुक्त राष्ट्र के एचआईवी और एड्स कार्यक्रमों के प्रमुख पिटर पायॉट ने भारत समेत दुनिया भर में एड्स की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति अपना असंतोष जताया है.

वह कहते हैं, " भारत सरकार इस मामले में पर्याप्त काम नहीं कर रही है,लेकिन फिर कोई भी देश संतोषजनक रवैया अपनाता नहीं दिख रहा है.हाँ,इतना है कि केंद्र सरकार और कुछ राज्यों में थोड़ी कोशिशें हो रहीं हैं."

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