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जागरूकता बनी एड्स के विरुद्ध हथियार
भारत में देहव्यापार के सबसे बड़े इलाक़े कोलकाता के सोनागाछी में यौनकर्मी महिलाओं की जागरूकता एड्स के ख़िलाफ़ उनकी लड़ाई में वरदान साबित हो रही है. ये महिलाएँ इस बात का प्रतीक बन गई हैं कि किस तरह जागरूक और संगठित होकर वह कॉन्डम के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकती हैं. इस इलाक़े में लगभग 9,000 यौनकर्मी काम करती हैं जिनमें से लगभग 6,000 वेश्याघरों में रहती हैं. बाक़ी तीन हज़ार का कोई निश्चित ठिकाना नहीं है. तीन ग्राहकों के औसत से उस इलाक़े में लगभग 27,000 ग्राहक पहुँचते हैं. तो इतनी यौनकर्मियों के बीच जागरूकता आई कैसे ये एक उत्सुकता का विषय बन जाता है. इस बारे में एक यौनकर्मी कुनिका बताती हैं, “पहले हम अपने ग्राहकों को कॉन्डम का इस्तेमाल करने को कहते थे वह नहीं मानता था तो वापस कर देते थे मगर यदि सबको लौटा ही देते तो कमाएँगे क्या और खाएँगे क्या?”
कुनिका के अनुसार, “इसके बाद सभी ने मिलकर तय किया कि संगठन बनाया जाए और जिस ग्राहक को लौटाया जाए उसे कोई न ले. इसके बाद मजबूर होकर लोगों को मानना पड़ता है.” यानी एक बार वो पुरानी कहावत फिर साबित हो गई कि ‘संगठन में शक्ति है’. इस पूरी जागरूकता के जनक डॉक्टर शोरोजित जाना अब केयर इंडिया के साथ काम करते हैं और इस बारे में बताते हैं कि अब तो जागरूकता का आलम ये है कि कोलकाता यौनकर्मियों में एचआईवी 10 प्रतिशत से भी कम में है. यौनकर्मियों के इस आत्मविश्वास के बारे में एक यौनकर्मी की संतान और अब यौनकर्मियों के संगठन में ही काम कर रहे बच्चू दा का कहना है कि महिलाओं ने ख़ुद जीना सीख लिया है और सशक्तीकरण किया है. यौनकर्मियों के इस संगठन ने उनकी विभिन्न समस्याओं पर विचार करके उनका निपटारा भी किया है और देश में देहव्यापार के ऐसे बाक़ी केंद्रों के सामने उदाहरण रखा है कि किस तरह ऐसी महिलाएँ भी सशक्त हो सकती हैं. |
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