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शुक्रवार, 17 अक्तूबर, 2003 को 13:49 GMT तक के समाचार
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एड्स की नई दवाइयों से जीवन वृद्धि
छोटी सी आशा
नई चिकित्सा से एचआईवी रोगियों को राहत

शोधकर्ताओं का कहना है कि नई दवाइयों और चिकित्सा व्यवस्था की मदद से एचआईवी से ग्रस्त रोगियों का जीवन दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है.

1997 के बाद से यूरोप में चिकित्सा व्यवस्था और दवाइयों से एड्स से मृत्यु की दर में 80 प्रतिशत तक की गिरावट आई है.

पहले एचआईवी से ग्रस्त लगभग आधे लोग ही रोग का पता लगने के बाद 10 वर्षों तक जी पाते थे. अगर वे 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हों तो उनकी ज़िन्दगी और भी कम बचती थी. लेकिन अब स्थिति बहुत सुधर गई है.

डॉ. खोलौद पोर्टर

हालांकि विशेषज्ञों ने ये जानकारी भी दी है कि ब्रिटेन में एचआईवी के कुछ मामलों के उपचार के लिए अभी इस नई प्रणाली की मदद नहीं ली जा रही है.

सिर्फ़ ब्रिटेन में एचआईवी से ग्रस्त लोगों की संख्या 50 हज़ार है.

इस जानलेवा रोग के उपचार के लिए नई चिकित्सा व्यवस्था के तहत जो सबसे कारगर पद्धति अपनाई जा रही है वो है 'हार्ट'.

'हार्ट' का मतलब है 'हाइली ऐक्टिव एंटीरेट्रोवायरल थेरपी.'

यानि 'हार्ट' की मदद से एड्स के वायरसों पर सीधा हमला किया जा सकता है, हालाँकि ये संक्रमण से छुटकारा नहीं दिला सकता.

एड्स से निजात पाने के लिए जब इस नई चिकित्सा व्यवस्था और दवाइयों के मेल को पहली बार प्रयोग में लाया गया था तब इससे मृत्यु दर ठीक आधी हो गयी थी.

पहले एड्स के सिर्फ़ 20 प्रतिशत रोगियों को 'हार्ट' प्रणाली का उपचार दिया जाता था लेकिन अब इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है.

और अब तो इससे रोगियों की बची हुई उम्र के बारे में भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

एक तुलनात्मक अध्ययन

लंदन के 'मेडिकल रिसर्च काउंसिल' के वैज्ञानिकों ने यूरोप के 22 देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी एड्स के रोगियों पर 'हार्ट' चिकित्सा पद्धति के नतीजों का एक तुलनात्मक अध्ययन किया.

इस अध्ययन से यह पता चला कि इन सभी देशों के रोगियों पर 'हार्ट' का प्रभाव समान है.

इस अध्ययन के परिणाम ' लैंसेट मेडिकल जर्नल' में प्रकाशित किए गए.

इस तुलनात्मक अध्ययन के विश्लेषक डॉ. खोलौद पोर्टर का कहना है," एड्स के रोगियों के लिए हार्ट पद्धति का प्रयोग एक बहुत बड़ी सफलता है."

उन्होने कहा," पहले एचआईवी से ग्रस्त लगभग आधे लोग ही रोग का पता लगने के बाद 10 वर्षों तक जी पाते थे. अगर वे 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हों तो उनकी ज़िन्दगी और भी कम बचती थी. लेकिन अब स्थिति बहुत सुधर गई है."

एड्समैप नामक संस्था के जुलियन मेलड्रम ने बीबीसी को बताया कि इस बारे में भी शोध चल रहे हैं कि रोगियों को दस वर्षों से भी अधिक समय तक बचाया जा सके.

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि ब्रिटेन के कई शरणार्थी समुदायों में रोगियों को एड्स से उपचार की ये नई पद्धति मुहैया नहीं कराई जाती.

पिछले साल पूरी दुनिया में एचआईवी से संक्रमित होने वालों की संख्या चार करोड़ से अधिक थी.

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