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बुधवार, 20 अप्रैल, 2005 को 02:30 GMT तक के समाचार
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'आँकड़ों की तुलना ठीक नहीं'
भारत में एड्स की गंभीरता
विशेषज्ञ मानते हैं कि एड्स का ख़तरा बढ़ रहा है
भारतीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) के महानिदेशक डॉक्टर वाई एस कुरैशी ने ग्लोबल फंड के कार्यकारी निदेशक रिचर्ड फ़ीशेम के इन दावों का खंडन किया है कि भारत में एचआईवी एड्स के पीड़ितों की संख्या 51 लाख से कहीं ज़्यादा है.

ग़ौरतलब है कि दुनिया भर में एचआईवी/एड्स की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन ग्लोबल फ़ंड टू फ़ाइट एड्स के कार्यकारी निदेशक फ़ीशेम ने आगाह किया है कि भारत में यह महामारी "नियंत्रण से बाहर" हो चुकी है और अगर समय रहते ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो लाखों लोग मौत के मुँह में जा सकते हैं.

डॉक्टर कुरैशी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा कि ये दावा बिल्कुल ही फ़िज़ूल लगता है और यह संख्या तुलना के लायक नहीं है.

"पिछले सर्वे के मुताबिक भारत में एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या 51 लाख के आसपास ही है."

डॉक्टर कुरैशी ने रिचर्ड फ़ीशेम के दावे के बारे में कहा, "हमें नहीं मालूम उनका स्रोत क्या है इन आँकड़ों का. हमारे सर्वेक्षण स्वतंत्र तरीक़े से किए जाते हैं जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूएन एड्स और भारतीय चिकित्सा शोध परिषद (आईसीएमआर) जैसी स्वतंत्र एजेंसियाँ सहयोग और निगरानी करती हैं."

डॉक्टर कुरैशी ने कहा कि कुछ दिन पहले विशेषज्ञों की बैठक हुई थी जिसमें हमने सुझाव माँगे थे कि हमारे सर्वेक्षण में अगर कोई कमी हो तो हम उसे सुधारने के लिए काम करें, लेकिन सभी ने कहा था कि हमारा तरीक़ा सही है.

डॉक्टर कुरैशी ने कहा, "हमारे हिसाब से आँकड़ों में कोई समस्या नहीं हैं. इसमें कोई शक नहीं कि समस्या गंभीर है और इसका हमें अंदाज़ा है, हम उसके अनुसार ही अपनी रणनीति बनाकर काम करते हैं."

डॉक्टर कुरैशी ने कहा कि अगला सर्वे भी तैयार है जो कुछ ही दिन में सार्वजनिक किया जाएगा जिसमें आँकड़े साफ़ हो जाएंगे.

डॉक्टर कुरैशी ने कहा कि 51 लाख की संख्या भारत की कुल आबादी का सिर्फ़ .9 प्रतिशत है जबकि दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी / एड्स पीड़ितों की संख्या वहाँ की आबादी का क़रीब 23 प्रतिशत हिस्सा है, इस दृष्टि से तुलना की बात सही नहीं लगती.

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