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एड्स पर रिपोर्ट में एशिया को चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएड्स ने दुनिया में एड्स की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि एशिया में एड्स तेज़ी से फ़ैल रहा है और इसकी रोकथाम के लिए कारगर क़दम उठाने की ज़रूरत है. मंगलवार को लंदन में यूएनएड्स ने दुनिया में एड्स की स्थिति पर अपनी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में तीन करोड़ अस्सी लाख लोग एचआईवी एड्स के शिकार हो चुके हैं. संस्था के अनुसार केवल पिछले एक साल में 50 लाख लोगों कों एचआईवी का वायरस अपने चंगुल में ले चुका है और इनमें से 11 लाख लोग सिर्फ़ एशिया से हैं. यूएनएड्स ने चेतावनी दी है कि एशिया में तेज़ी से फैल रहे एड्स वायरस की रोकथाम के लिए कारगर क़दम उठाने की सख़्त ज़रूरत है. हालाँकि संस्था ने अफ़्रीका और पूर्वी यूरोप के देशों को भी चेतावनी दी. बैंकॉक में अगले हफ़्ते से शुरू होने वाले एड्स सम्मेलन से पहले यह रिपोर्ट जारी की गई है. ख़ास बात इस रिपोर्ट की एक ख़ास बात यह है कि 2004 में एचआईवी के आंकड़े पिछले साल के मुक़ाबले कम हो गए हैं.
यूनएड्स का कहना है कि यह इसलिए हुआ है क्योंकि अब उनके पास आंकड़े जुटाने के तरीक़े अधिक बेहतर हैं और कुछ ग़रीब अफ़्रीकी देशों के बारे में अनुमानित आंकड़े ग़लत साबित हुए. फिर भी तीन करोड़ अस्सी लाख़ लोग दुनिया में एड्स के जानलेवा वायरस एचाईवी के साथ जी रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि एड्स को रोकने के सभी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों, पैसों और समय के ख़र्च के बावजूद एड्स का फैलना जारी है और पिछले साल 30 लाख लोग एड्स के कारण अपनी जान से हाथ धो चुके हैं. यूएनएड्स के प्रमुख पीटर पायट ने कहा कि बीमारी के फैलने में दो ख़ास बाते ध्यान देने लायक हैं. एक यह कि बीमारी अब दुनिया के सभी हिस्सों में फैल चुकी है, कोई भी हिस्सा अब इससे बच नहीं सका है और एशिया में तेज़ी से फैल रहा है एचआईवी. उन्होंने कहा कि अब यह औरतों की बीमारी बनती जा रही है. 1981 में जब बीमारी की परिभाषा दी गई थी तो कहा गया था कि यह गोरे, समलैंगिक पुरूषों की बीमारी है लेकिन आज अधिक से अधिक महिलाएँ इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं. भारत भारत में भी हाल में जारी आंकड़ों से पता चला कि 51 लाख से ज़्यादा लोग एचआईवी पॉज़िटिव हैं. इस बारे यूएनएड्स के प्रमुख पीटर पायट ने कहा, "भारत में 51 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं और यह दक्षिण अफ़्रीका के बाद दूसरे नंबर पर है. बीमारी बढ़ने की दर में यहाँ ज़रूर कमी आई है लेकिन हमें ध्यान रखना है कि कई जगहों पर यह बीमारी बहुत फ़ैली हुई है." उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक-एक ऐसे ज़िले हैं जहाँ 4 प्रतिशत जनसंख्या को एचआईवी है यानी 25 में से एक व्यस्क को एचआईवी है और यह गंभीर स्थिति है. भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में उन्होंने कहा कि वहाँ अच्छी व्यवस्था नहीं है और स्वास्थ्य को लेकर ख़र्च भी बहुत कम होता है. पीटर पायट ने यह भी बताया कि पूर्वी यूरोप में भी एड्स तेज़ी से बढ़ रहा है और दुनिया में रोकथाम के तरीक़ो की कमी है. उन्होंने बताया कि अफ़्रीका में किशोर लड़कियाँ लड़कों के मुक़ाबले पाँच गुना ज़्यादा एड्स का शिकार हो रही हैं. |
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