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मंगलवार, 30 मई, 2006 को 17:07 GMT तक के समाचार
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भारत में हैं सर्वाधिक एचआईवी रोगी
एड्स
एचआईवी प्रसार की दर घटी
एड्स के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएड्स की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे ज़्यादा एचआईवी ग्रस्त व्यक्ति भारत में हैं.

अब तक सबसे ज़्यादा एचआईवी ग्रस्त लोगों का देश दक्षिण अफ़्रीका को माना जाता था.

मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में 57 लाख लोग एड्स के विषाणु एचआईवी का शिकार हैं.

ताज़ा अनुमानों में दक्षिण अफ़्रीका में एचआईवी ग्रस्त लोगों की संख्या 55 लाख बताई जा रही है.

यूएनएड्स की रिपोर्ट में वर्ष 2005 के अंत में उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया गया है.

हालाँकि आबादी में एचआईवी पीड़ितों के प्रतिशत की बात करें तो दक्षिण अफ़्रीका की हालत भारत के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा बुरी है.

दक्षिण अफ़्रीका की वयस्क आबादी का 18.8 प्रतिशत हिस्सा एचआईवी ग्रस्त है, जबकि भारत की जनसंख्या के 0.9 प्रतिशत हिस्से पर ही इस वायरस की मार पड़ी है.

अच्छी ख़बर भी

यूएनएड्स की रिपोर्ट में भारत से जुड़ी अच्छी ख़बर ये है कि एचआईवी प्रसार में सबसे आगे रहने वाले चार राज्यों आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एड्स के विषाणु फैलने की दर कम हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार यह सफलता निरोधात्मक कार्यक्रम लागू किए जाने के कारण हुए हैं. हालाँकि इसमें इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि भारत में पिछले साल जितने लोगों को एचआईवीरोधी दवाओं की ज़रूरत थी उनमें से सात फ़ीसदी को भी वास्तव में दवाएँ मिल पाईं.

पाकिस्तान में क़रीब 85 हज़ार लोग एचआईवी ग्रसित बताए जाते हैं और यूएनएड्स ने आगाह किया है कि समय रहते निरोधात्मक उपाय नहीं किए गए तो वहाँ स्थिति बिगड़ सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार कराची में नशेड़ियों के बीच एचआईवी महामारी की तरह फैल रहा है.

अंतरराष्ट्रीय स्थिति

विश्व स्तर पर बात करें तो 126 देशों के आँकड़े बताते हैं कि दुनिया में इस समय तीन करोड़ 86 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं.

इनमें से 41 लाख लोग वर्ष 2005 में एचआईवी का शिकार बने.

पिछले साल 28 लाख लोग एड्स के कारण मारे गए.

यूएएड्स की रिपोर्ट में अच्छी ख़बर यह है कि 25 साल में पहली बार एचआईवी के प्रसार की दर में स्थायित्व देखने को मिला है.

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