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एड्स से चिंतित चर्च की मनोरंजक पहल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में बॉलीवुड और रोमन कैथलिक चर्च ने संयुक्त रूप से एक व्यवसायिक फ़िल्म बनाई है जो एड्स की समस्या को उजागर करती है. बॉलीवुड की दूसरी फ़िल्मों की तरह ही ‘ऐसा क्यों होता है’ फ़िल्म गीत संगीत और नृत्य के दृश्यों से भरी हुई है. यह शुक्रवार 17 फ़रवरी को देश के सिनेमा घरों में रिलीज़ हो रही है. फ़िल्म की पटकथा लिखने वाले फ़ादर डॉमिनिक एमानुएल कहते हैं कि रोमन कैथलिक चर्च भारत में हो रहे नैतिक पतन से चिंतित था. भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोई पचास लाख एचआईवी संक्रमित लोग हैं. ऐसा पहली बार है कि भारतीय शहरों में किसी धार्मिक संस्था की बनाई व्यवसायिक फ़िल्म दिखाई जा रही है. भारत का रोमन कैथलिक चर्च विभिन्न समुदायों के आपसी संबंधों के टूटने और एड्स के फैलाव से चिंतित रहा है. दक्षिण अफ़्रीका के बाद भारत में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या सबसे अधिक है. फ़ादर डॉमिनीक कहते हैं कि चर्च ने अपना संदेश फैलाने के लिए बॉलीवुड का सहारा इसलिए लिया क्योंकि उसकी पहुंच दूर दूर तक है. उनका मानना है कि वायएमसीए (यंग मैन क्रिश्चियन एसोसिएशन) और कुछ अन्य ग़ैर सरकारी संगठनों के सहयोग से बनी इस फ़िल्म में उपदेश नहीं दिए गए हैं लेकिन दर्शकों को एक सशक्त संदेश अवश्य जाता है. फ़ादर एमानुएल कहते हैं, “फ़िल्म असुरक्षित यौन संबंधों के ख़तरों को उजागर करती है.” यह फ़िल्म धार्मिक सहिष्णुता का संदेश भी देती है. विशेषकर ऐसे वातावरण में जब देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दंगे और गिरजों और ईसाइयों पर हमले बढ़े हैं. उपदेश नहीं बॉलीवुड की हीरोइन रति अग्निहोत्री जिन्होंने 1981 में फ़िल्म ‘एक दूजे के लिए’ से अपने करियर की शुरुआत की थी इस फ़िल्म में एक ऐसी महिला की भूमिका निभा रही हैं जो अकेले दो बेटों को पाल रही है. नए अभिनेता आर्यन वैद उस बेटे की भूमिका कर रहे हैं जो असावधानी पूर्ण यौन संबंधों की वजह से एड्स का शिकार हो जाता है. फ़िल्म के गीत जाने माने गायकों सुनिधि चौहान, सोनू निगम और अल्का याग्निक ने गाए हैं. दो करोड़ रुपयों से ज़्यादा की लागत वाली इस फ़िल्म के निर्माण में मशहूर फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट ने योगदान किया है. फ़ादर एमानुएल कहते हैं कि इस फ़िल्म से हुए मुनाफ़े का इस्तेमाल अच्छे उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. भारत की एक अरब से अधिक आबादी के दो प्रतिशत लोग ईसाई समुदाय के हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत में कंडोम का प्रचार16 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना 'एड्स से हर मिनट एक बच्चे की मौत'25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना एचआईवी के बारे में चौंकाने वाले तथ्य26 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना 'एड्स दवाओं की लक्ष्यपूर्ति संभव नहीं'29 जून, 2005 | पहला पन्ना एशियाई देशों में एड्स की भयावह तस्वीर01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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