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एचआईवी के बारे में चौंकाने वाले तथ्य | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में सरकारी वैज्ञानिकों का कहना है कि एचआईवी से ग्रस्त काले और गोरे अमरीकियों की संख्या में बढ़ते फ़र्क से नस्लवाद का सबूत मिलता है. सरकारी वैज्ञानिकों ने अमरीका के बोस्टन शहर में दुनिया के जाने-माने एचआईवी-एड्स वैज्ञानिकों के एक सम्मेलन में ये बताया है. एचआईवी से ग्रस्त काले अमरीकियों की संख्या दोगुना होकर कुल जनसंख्या का दो प्रतिशत हो गई है. उधर एचआईवी से ग्रस्त गोरे अमरीकियों की संख्या लगभग पहले जितनी ही 0.20 प्रतिशत ही रही है. सम्मेलन में बताया गया कि नशीले पदार्थों के सेवन, ग़रीबी और चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव काले अमरीकियों में फैलते एचआईवी वायरस का कारण है. सेंटर फ़ॉर डिसीस कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के शोधकर्ताओं का कहना था कि एचआईवी से ग्रस्त आधे से ज़्यादा अमरीकियों को एंटिरेट्रोवायरल दवाएँ इसलिए नहीं मिलती क्योंकि ये पता ही नहीं चल पाता कि वे इसका शिकार हैं. |
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